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मनोज बाजपेयी की ‘द फ़ैमिली मैन’ सीरीज़ से समझें देशभक्ति, लिंचिंग को

वेब सीरिज: द फ़ैमिली मैन 

स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म: अमेज़ॉन प्राइम वीडियो

स्टारकास्ट: मनोज बाजपेयी, प्रियामणि, शारीब हाशमी, नीरज माधव, शरद केलकर, गुल पनाग

डायरेक्टर: राज और डीके

रेटिंग: 4.5

आजकल फ़िल्मों के साथ ही वेबसीरीज़ का अनोखा क्रेज़ लोगों में देखने को मिल रहा है और इसी बीच सभी ने ‘द फ़ैमिली मैन’ के बारे में भी काफ़ी सुना होगा। यह पहली सीरीज़ नहीं है जो रिलीज़ हुई है। इससे पहले भी कई सीरीज़ रिलीज़ हो चुकी हैं और दर्शकों द्वारा पसंद की गई हैं। ‘द फ़ैमिली मैन’ सभी वेबसीरीज़ को थोड़ा-सा मात देती हुई दिख रही है और इसकी वजह है कि इस वक़्त देश-दुनिया में चल रहे गंभीर मुद्दों को लेकर इसे बनाया गया है। राज और डीके ने ‘द फ़ैमिली मैन’ का निर्देशन किया है और सुमन कुमार और सुमित अरोरा के साथ मिलकर इसकी कहानी भी लिखी है। इसके अलावा इस सीरीज़ में मनोज बाजपेयी समेत कई दमदार कलाकार मौजूद हैं। सीरीज़ जैसे ही शुरू होती है, पहले ही लिखा नज़र आता है इसकी कहानी प्रतिदिन आने वाली ख़बरों से प्रेरित है। आइए, एक नज़र डालते हैं कि आख़िर इस सीरीज़ में ख़ास क्या है।

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क्या है ‘द फ़ैमिली मैन' 

‘द फ़ैमिली मैन’ की कहानी श्रीकांत तिवारी (मनोज बाजपेयी) के ईर्द-गिर्द घूमती हुई नज़र आती है और साथ ही कहानी मुंबई से शुरू होकर पाकिस्तान, बलूचिस्तान, सीरिया, कश्मीर और दिल्ली तक पहुँचती है। जैसा कि नाम रखा गया है ‘द फ़ैमिली मैन’ उसी तरह कहानी श्रीकांत तिवारी से शुरू होती है। जो कि एक पिता व पति हैं और सुखी परिवार संजोने में लगा हुए हैं। श्रीकांत की पत्नी सुचित्रा (प्रियामणि) व उनके दोनों बच्चों को लगता है कि उनके पिता सरकारी दफ़्तर में फ़ाइलें उठाने-रखने का काम करते हैं। तो वहीं दूसरी तरफ़ श्रीकांत इंटेलिजेंस एजेंसी एनआईए के लिए काम कर रहा है, जिसका मुख्य मक़सद है आतंकवादी गतिविधियों को रोकना।

श्रीकांत तिवारी के साथ उनके दोस्त व साथ काम करने वाले जेके (शारीब हाशमी) हैं जो कि लगभग हर वक़्त साथ ही रहते हैं। इंटेलिजेंस एजेंसी एनआईए के अफ़सर श्रीकांत को ख़बर मिलती है कि आतंकवादी देश में हमला करने की तैयारी कर रहे हैं और यह हमला 26/11 से बड़ा होने वाला है। इस ख़बर को पाते ही इसकी जाँच के लिए तिवारी जुट जाते हैं और 2 आतंकियों को पकड़ते हैं, जिसमें से एक आतंकी मूसा (नीरज माधव) सही सलामत हाथ आता है। इस सीरीज़ को अंत तक देखने पर आपको पता चलेगा कि आख़िर कैसे श्रीकांत इस ख़तरनाक मिशन को सफल होने से रोकते हैं।

इन मुख्य बिंदुओं पर बनी है सीरीज़ 

‘द फ़ैमिली मैन’ में कुछ ख़ास बिंदुओं को दिखाया गया है जैसा कि हम आए दिन ख़बरों में पढ़ते और सुनते हैं कि लोग आईएसआईएस ज्वॉइन कर रहे हैं और पत्थरबाज़ी कर रहे हैं। कॉलेज और कुछ जगहों पर मुसलिम छात्रों और लोगों को बेवजह निशाना बनाया जाता है और कुछ हिंदू संगठन मुसलिमों के ख़िलाफ़ भड़काकर आवाम को गुमराह करते हैं। इसके साथ ही दिखाया गया है कि कैसे देशभक्ति नहीं दिखाने पर किसी को भी ‘एंटी-नेशनल’ क़रार दे दिया जाता है तो वहीं गोमांस को लेकर किसी को भी पकड़ लिया जाता है। इसके साथ ही जो मुद्दा आजकल सबसे ज़्यादा सुनने में आ रहा है मॉब लिंचिंग का उसे भी इस सीरीज़ में दिखाया गया है। सभी ख़ास मुद्दों को समेटकर इस सीरीज़ को पेश किया गया है।

‘द फ़ैमिली मैन’ सीरीज़ का एक दृश्य।

मॉब लिंचिंग और राजनीति

आए दिन गोरक्षा के नाम पर कोई मॉब लिंचिंग का मामला हो या फिर किसी दूसरे कारण का हो, इन सभी में राजनीति के अलावा कुछ भी नहीं हो रहा। मॉब लिंचिंग में किसी की मौत हो जाए लेकिन कुछ वक़्त बाद पता चलता है कि वह शख्स हार्ट अटैक से मर गया था। यह मामला तबरेज़ अंसारी का है जो कुछ दिनों पहले तक काफ़ी चर्चा में रहा।

गोरक्षा के नाम पर राजनीति हो या किसी को देशद्रोही साबित करने का मामला हो, सब जगह राजनीति आ जाती है। किसी धर्म या समुदाय विशेष को लेकर तगड़ी राजनीति देखने को मिलती है जिसपर सभी लोग लड़ रहे हैं। कहीं न कहीं लोगों में यह पूर्वाग्रह है कि अगर कोई मुसलमान है तो वह आतंकवादी होगा या उसके लिए हमारा मुल्क कोई अहमियत नहीं रखता है। अगर राजनीति और धर्म से हटकर इस देश में कुछ और होने लगे तो शायद तसवीर ही कुछ और होगी और इसी से जुड़े कुछ पहलुओं को सीरीज़ में निर्देशक ने पिरोया है। जिसे देखकर आपको हाल-फ़िलहाल में हुए कई क़िस्से और घटनाएँ याद आ जाएँगी।

कलाकारों की अदाकारी

इस सीरीज़ को मनोज बाजपेयी के नाम पूरी तरीक़े से किया जा सकता है क्योंकि पूरी कहानी उन्हीं के ईर्द-गिर्द घूमती है और इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि मनोज बाजपेयी ने हर एक सीन में अपनी दमदार एक्टिंग से लोगों के दिलों में जगह बनाई है। फिर चाहे वह पिता-पति का रोल हो या फिर एक स्पाई का रोल। मनोज बाजपेयी की शानदार एक्टिंग तो लोगों को पहले भी नज़र आई है लेकिन यह सीरीज़ जिस तरह के मुद्दों पर बनी है और जैसा उन्होंने रोल अदा किया है उससे कोई भी दर्शक ख़ुद को जुड़ा हुआ महसूस कर सकता है। इसके अलावा जे.के. तलपड़े के किरदार में शारीब हाशमी ने भी बेहतरीन काम किया है। 

एक्ट्रेस प्रियामणि ने एक साधारण वर्किंग वुमन का किरदार निभाते हुए हर सीन को मज़बूती से निभाया है। मतलब हर एक किरदार अपनी भूमिका में ज़बरदस्त है, मलयालम बोली बोल रहे कलाकार हों या फिर कश्मीरी बोलते हुए कलाकार हों। निर्देशक ने इस बात का ख़ास ख्याल रखा है कि कहीं भी कोई एक्टर अपनी भाषा से अलग न दिखाई दे।

एक्ट्रेस प्रियामणि

क्यों देखें यह सीरीज़

आपने कई सीरीज़ देखी होंगी जो कि भरपूर एक्शन और कॉमेडी से बनी होंगी लेकिन अमेज़ॉन प्राइम जो सीरीज़ लेकर आया है वह हकीक़त में हमारे देश का आईना है। जो कि इन दिनों आए दिन हम पढ़ते और सुनते हैं उसे दिखाया गया है। ‘द फ़ैमिली मैन’ 10 एपिसोड की सीरीज़ है लेकिन आपको कहीं भी बोर नहीं करेगी और हर किरदार आपको ख़ुद से जुड़ा हुआ लगेगा। इस सीरीज़ को देखते हुए कई जगहों पर आपको लगेगा कि वाक़ई में क्या हो रहा है देश में। कई जगह आपके अंदर देश के प्रति देशभक्ति भी उमड़ेगी। इसके लिए भी बता दें कि इस सीरीज़ में यह भी दिखाया गया है कि कैसे हम बिना अपनी देशभक्ति का प्रमाण दिए देश की रक्षा कर सकते हैं। इस सीरीज़ में आपको ज़बरदस्त एक्शन, सस्पेंस और कॉमेडी का तड़का मिलेगा। बस फिर थोड़ा-सा वक़्त निकालिए और 10 एपिसोड की यह सीरीज़ देख डालिए।

दीपाली श्रीवास्तव

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