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बेरोज़गारी पर आंकड़े ग़लत, किसी की नौकरी नहीं गई: राय

देश भर में इसे लेकर चिंता है कि अर्थव्यवस्था की हालत ख़राब है और बेरोज़गारी चरम पर है। इसके पक्ष में ऑटो सेक्टर में मंदी और इस वजह से लाखों नौकरियां का जाना, हीरा उद्योग से नौकरियों का जाना, जीडीपी का 5 फ़ीसदी पर आ जाना, सेंसेक्स का गिरना, उत्पादन कम होना, माँग का गिरना जैसे तर्क दिये जा रहे हैं। कुछ समय पहले नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गनाइजेशन (एनएसएसओ) के आंकड़ों से यह भी ख़बर आई थी कि देश में बेरोज़गारी की दर पिछले 45 साल में सबसे ज़्यादा हो गई। लेकिन लोकसभा चुनाव मुंह सामने होने के कारण केंद्र सरकार ने तब इसे नकार दिया था लेकिन चुनाव बाद मान भी लिया था।
कहने का मतलब यह है कि बेरोज़गारी और ख़राब आर्थिक हालात को लेकर अर्थशास्त्रियों से लेकर आम लोग चिंता जता रहे हैं लेकिन केंद्र सरकार में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय का कहना है कि बेरोज़गारी को लेकर आए आंकड़े पूरी तरह ग़लत हैं और किसी की भी नौकरी नहीं गई है। जबकि उन्हीं की सरकार की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही ने मंदी से उबारने के लिए कई अहम घोषणाएँ की हैं, इसका मतलब हुआ कि मंदी है तभी तो राहत की घोषणा की गई। 
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हालाँकि वित्त मंत्री ने ऑटो सेक्टर में मंदी को लेकर एक जोरदार तर्क भी दिया है और कहा है कि इस सेक्टर में आई मंदी का प्रमुख कारण यह है कि युवा वर्ग नई कार के लिए ईएमआई का भुगतान करने से ज़्यादा ओला और उबर जैसी टैक्सी सर्विस का इस्तेमाल करना पसंद कर रहे हैं। 

तो क्या अब यह मान लिया जाना चाहिए कि मंत्री जी की बात ही सही है और पहले जो सरकार ने माना था कि बेरोज़गारी बढ़ी है और मंदी के हालात हैं, वह सब ग़लत था।

मंगलवार को भोपाल में पत्रकारों से बात करते हुए राय ने अपने बयान के बचाव में जोरदार तर्क दिये। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘बुनियादी ढांचे में सुधार हो रहा है, बड़ी कंपनियां विभिन्न क्षेत्रों में निवेश कर रही हैं, कृषि उत्पादन में सुधार हुआ है और करोड़ों लोग मुद्रा योजना के तहत ऋण ले रहे हैं और इससे पता चलता है कि रोज़गार बढ़ रहा है।’

अगर आपको मंत्री जी के बयान को पढ़कर आश्चर्य हुआ हो तो फिर से एक बार पढ़ लीजिए। मंत्री जी ने साफ़ कहा है कि निवेश हो रहा है, रोज़गार बढ़ रहा है। तो यह मान लिया जाना चाहिए कि देश में कहीं भी मंदी नहीं है, बेरोज़गारी नहीं है और इससे किसी की भी नौकरी नहीं गई है। 

राय यहीं नहीं रुके और उन्होंने भरोसा जताया कि देश 5 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी के रास्ते पर चल रहा है। राय ने कहा, ‘कुछ क्षेत्र ऐसे हैं, जहाँ काम करने की ज़रूरत है और सरकार हालात को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है। भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है और इसी तरह आगे भी रहेगी।’ 

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हाल ही में फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन ने कहा है कि साल भर में डीलरों से जुड़े 2 लाख लोगों की नौकरियाँ चली गई हैं। दूसरी ओर, इंडियन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन ने कहा है कि 3 महीने में 15 हज़ार लोगों को नौकरी से निकाला गया है। 'इकनॉमिक टाइम्स' की ख़बर के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान निसान मोटर ने 38 तो हुंदे ने 23 डीलर हटा दिए। होंडा, मारुति, महिंद्रा एंड महिंद्रा और टाटा मोटर्स के डीलर भी कामकाज समेटने पर मजबूर हुए। 

अगस्त महीने में ऑटो इंडस्ट्री की ख़राब हालत पर सोसाइटी ऑफ़ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफ़ैक्चरर्स (एसआईएएम यानी सियाम) ने कहा था कि यही हाल रहा तो इस सेक्टर में लगभग 10 लाख लोगों को बेरोज़गार होना पड़ सकता है और बाद में इतनी ही नौकरियाँ जाने की ख़बर आई थी। 

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ख़राब आर्थिक हालात को लेकर बजाज ऑटो के अध्यक्ष राहुल बजाज ने केंद्र सरकार की तीख़ी आलोचना की थी। बजाज ने कहा था कि क्या आकाश विकास से गिरेगा। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने भी अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता जताई थी और कहा था कि देश में 70 साल में अब तक नक़दी का ऐसा संकट नहीं देखा गया। 

ऐसी ही तमाम ख़बरें देश के ख़राब आर्थिक हालात और बेरोज़गारी को लेकर आती रही हैं। लेकिन जब देश के गृह राज्यमंत्री यह कह रहे हों कि किसी की भी नौकरी नहीं गई है और हम पाँच ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं, तो यह मानना होगा कि या तो सारे अर्थशास्त्री, उद्योग जगत से जुड़े संगठन ग़लत हैं या फिर मंत्री जी। 

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क़मर वहीद नक़वी

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