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भारत में 1% लोगों के पास है 27% आय : संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट

भारतीय अर्थव्यवस्था में पिछले दो दशकों में सुधार हुआ है, लोगों की आय बढ़ी है, पर असमान विकास हुआ है और यह असमानता दूसरी जगहों से ज़्यादा है। असमानता का आलम यह है कि सिर्फ़ एक प्रतिशत लोगों के पास पूरी आमदनी का 20 प्रतिशत हिस्सा है। 

संयुक्त राष्ट्र मानव विकास रिपोर्ट 2019 में ये बातें कही गई हैं। यूएनडीपी ने कोलंबिया में यह रिपोर्ट जारी की है। 

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इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के 10 प्रतिशत लोगों के पास कुल आमदनी का 55 प्रतिशत हिस्सा है। इसमें यह भी कहा गया है कि अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़े वर्ग के लोगों की आर्थिक स्थिति दूसरों से बदतर ही रही है, शिक्षा और डिजिटल उपकरणों तक पहुँच जैसे इंडीकेटरों में वे पीछे हैं।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन वर्गों में 5 से 12 साल की स्कूली शिक्षा पाए लोगों की तादाद दूसरे वर्गों की तुलना में कम है। 
यूएन रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 1980-2016 के बीच भारत में आर्थिक रूप से एक एलीट वर्ग उभरा है। इस वर्ग में पूरी आबादी का 1 प्रतिशत हिस्सा है। लेकिन इसके पास इस दौरान की कुल आय के 27 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा है। इस रिपोर्ट के मुताबिक़, यह असमानता अमेरिका और रूस समेत दूसरे देशों में भी देखी गई है। इस तरह की असामनता रूस में ज़्यादा गंभीर है।

संयुक्त राष्ट्र की यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब भारत की आर्थिक स्थिति ख़राब है और बद से बदतर होती जा रही है। भारतीय रिज़र्व बैंक ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए अनुमानित सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी वृद्धि दर में एक बार फिर कटौती कर दी है। केंद्रीय बैंक ने गुरुवार को घोषित अपनी मुद्रा नीति में वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए जीडीपी विकास दर का अनुमान 6.1 प्रतिशत से कम कर 5 प्रतिशत कर दिया।

रिज़र्व बैंक ने एक बयान में कहा, ‘दूसरी छमाही की जीडीपी वृद्धि दर अनुमान से काफ़ी कम है। कई महत्वपूर्ण इंडीकेटरों से पता चलता है कि घरेलू और बाहरी माँग कमज़ोर ही रही हैं। लेकिन आउटलुक सर्वे से यह भी संकेत मिलता है कि वित्तीय वर्ष की चौथी तिमाही में स्थिति तेज़ी से सुधरेगी।’

याद दिला दें कि सरकारी एजेन्सी सेंट्रल स्टैटिस्टिकल ऑफ़िस (सीएसओ) ने बीते दिनों इस साल की दूसरी छमाही के लिए जीडीपी वृद्धि दर 4.5 प्रतिशत कर दी थी। अब आरबीआई ने इसका अनुमान 5 प्रतिशत लगाया है।

बैंक का मानना है कि चालू वित्तीय वर्ष की दूसरी छमाही  के लिए जीडीपी वृद्धि दर 5.5 प्रतिशत से 4.95 के बीच हो सकती है। अगले वित्तीय वर्ष की पहली छमाही के लिए इसका अनुमान 5.9 से 6.3 प्रतिशत है। 

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