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‘फ़ेसलेस टैक्स सिस्टम’ यानी आपको पता नहीं कि इनकम टैक्स अफ़सर कौन है!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए टैक्स सिस्टम का आगाज़ कर दिया है। उनका कहना है कि यह नए भारत के शासन के मॉडल का प्रयोग है। इसकी दो ख़ास बातें हैं, ट्रांसपैरेंसी यानी पारदर्शिता और ऑनर यानी सम्मान।  

'फ़ेसलेस टैक्स सिस्टम’

पारदर्शिता की भी खास चीज़ है ‘फ़ेसलेस टैक्स सिस्टम’। यानी अब आपको अपने इनकम टैक्स अफ़सर की शक्ल नहीं देखनी पड़ेगी। ज़ाहिर है कि उसका डर भी गायब हो जाएगा और टैक्स के बोझ से बचने के लिए घूस देने की ज़रूरत और रिवायत भी ख़त्म हो जाएगी। जब आपको पता ही नहीं कि आपका टैक्स अफ़सर कौन है तो आप किससे डरेंगे और किसे खुश करेंगे।
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यही हाल अफ़सर का भी है। उसे सिर्फ यही दिखेगा कि पार्टी का एकाउंट कैसा है और हिसाब सही बैठता है या नहीं। ऐसे में यदि कोई भ्रष्ट अफ़सर पैसे ऐंठना चाहे तो भी ऐसा नहीं कर सकता, क्योंकि उसे पता ही नहीं कि यह करदाता कौन है। 

डॉक्युमेंट आइडेंटिफ़िकेशन नंबर

अगर कोई नोटिस जारी होगा तो उसमें भी पानेवाले को यह पता नहीं चलेगा कि नोटिस किस अफ़सर ने भेजा। बस एक डॉक्युमेंट आइडेंटिफ़िकेशन नंबर होगा जिससे किसी जाँच की स्थिति में पता चल सके कि यह नोटिस किस दफ़्तर के किस अफ़सर की तरफ से निकला है।
दफ़्तर की तो छोड़ ही दें, यह भी ज़रूरी नहीं है कि अब आपकी फ़ाइल आपके शहर के ही इनकम टैक्स ऑफिस में खुले। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का कंप्यूटर अपने आप किसी भी अफ़सर को कोई भी फाइल भेज सकता है। यही नहीं कोई जाँच करनी हो तो टीम बनाने का काम भी कंप्यूटर ही कर देगा। 

ईमानदारी

अगर आप अपने एसेसमेंट से खुश नहीं हैं तो 25 सितंबर यानी दीनदयाल जयंती के बाद से अपील का काम भी इसी तरह ऑनलाइन और फेसलेस होनेवाला है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आम आदमी की ईमानदारी पर विश्वास करके ही यह व्यवस्था चल सकती है। पुरानी व्यवस्था में इसकी शुरुआत ही ईमानदार करदाता को कटघरे में खड़ा करके होती थी। 

टैक्सपेयर्स चार्टर

इसके साथ ही ‘टैक्सपेयर्स चार्टर’ भी जारी किया गया है, जिसमें करदाताओं के अधिकार औऱ कर्तव्य साफ़- साफ़ लिखे हुए हैं। चार्टर बनाकर नियम साफ़ करने का कारण प्रधानमंत्री ने यह बताया कि नीति स्पष्ट होती है तो ‘ग्रे एरिया’ यानी भ्रम की गुंजाइश ख़त्म हो जाती है और फिर बात अफ़सरों के मूड या उनके दिमाग के भरोसे नहीं रह जाती। यानी यह इस बात का इंतजाम है कि आम आदमी को टैक्स अफसरों के हाथों बेवजह परेशान न होना पड़े।

चार्टर बहुत लंबा- चौड़ा नहीं है। उसमें कुछ बुनियादी बातें साफ़ की गई हैं, जिन्हें आसानी से समझा जा सकता है। कोई भी टैक्स भरनेवाला अपने अधिकारों की माँग कर सकता है। साथ ही यह भी बताया गया है कि किन स्थितियों में आपके ख़िलाफ़ कार्रवाई हो सकती है। 

दूसरी तरफ ईमानदार करदाताओं के सम्मान का ज़िक्र भी हुआ है। यह किसी कंपनी की मार्केटिंग स्कीम जैसी योजना दिखती है, जिसमें ज्यादा टैक्स देनेवालों को लुभाने के लिए उन्हें कुछ तोहफे दिए जाएंगे। मगर सवाल यह है कि जिसकी कमाई जितनी होगी वह उसी हिसाब से तो टैक्स भरेगा। 

प्रधानमंत्री ने यह अपील भी की कि जो लोग सक्षम होते हुए भी टैक्स नहीं भर रहे हैं, उन्हें अपनी आत्मा में झांकना चाहिए और टैक्स भरने के लिए आगे आना चाहिए। कितने लोग आगे आते हैं, यह तो भविष्य में ही दिखेगा। और जो नहीं आते हैं उनके साथ क्या होगा, यह भी दिखेगा। लेकिन जो लोग उम्मीद कर रहे थे कि कोरोना काल में सरकार मध्यवर्ग के लिए किसी राहत का एलान करेगी, फ़िलहाल वे हाथ मल रहे हैं।   

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आलोक जोशी

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