loader

मोदी सरकार के निशाने पर क्यों हैं कांग्रेस के ताक़तवर नेता भूपेश बघेल?

प्रचंड बहुमत से चुनाव जीतकर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की जोरदार वापसी कराने वाले पिछड़े वर्ग के नेता भूपेश बघेल मोदी सरकार के निशाने पर हैं। दिल्ली से रायपुर पहुंची 100 से ज़्यादा अधिकारियों की फौज़ ने रायपुर सहित विभिन्न जिलों में मुख्यमंत्री के खास कहे जाने वाले अधिकारियों के ख़िलाफ़ छापेमारी की है। यह मामला न सिर्फ विधानसभा में उठा है, बल्कि कांग्रेस ने इस मामले में राज्यपाल को ज्ञापन भी दिया है। 

कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व भी इस मसले पर सक्रिय हो गया है। कहा जा रहा है कि लालू प्रसाद, मायावती, मुलायम सिंह यादव की श्रृंखला में एक और बहुजन नेता का नाम जुड़ने जा रहा है, जिसे भ्रष्टाचार के मामले में निशाना बनाकर उसकी राजनीतिक हत्या की जाएगी।  

ताज़ा ख़बरें

कहां से शुरू हुआ मामला

दरअसल, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के प्रमुख सचिव रहे अमन सिंह की पत्नी यास्मीन सिंह के ख़िलाफ़ शिकायत मिलने के बाद राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन ने मई, 2019 में जांच शुरू की थी। आरोप था कि 2005 में यास्मीन सिंह की नियुक्ति स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में प्रचार-प्रसार एवं क्षमता वर्धन संचालक के पद पर संविदा पर हुई। 10 दिसंबर, 2018 तक इस पद पर रहीं यास्मीन का वेतन इस दौरान 35,000 रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया गया। उन पर आरोप लगा कि वह प्रशासकीय काम छोड़कर कत्थक नृत्य में ही ज़्यादा समय देती थीं

इस मामले में राहत की मांग को लेकर अमन सिंह उच्च न्यायालय पहुंचे। 10 फरवरी, 2020 को बिलासपुर उच्च न्यायालय ने कहा कि यास्मीन के ख़िलाफ़ छत्तीसगढ़ शासन आपराधिक मामलों में कार्रवाई कर सकता है। 27 फरवरी को आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने अमन और यास्मीन के ख़िलाफ़ आय से अधिक संपत्ति का प्रकरण दर्ज कर लिया। यह भी ख़बर आई कि आर्थिक अपराध शाखा और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) दोनों अधिकारियों के करीब 10 देसी-विदेशी संदिग्ध खातों की जांच कर रहे हैं। वहीं, यास्मीन के ख़िलाफ़ आतंकी संगठन स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ इंडिया (सिमी) के साथ संबंध, सऊदी अरब और ट्यूनीशिया के नेओम सिटी परियोजना में निवेश, दुबई के बुर्ज ख़लीफ़ा में फ्लैट होने की जांच चल रही है।

सक्रिय हुई केंद्र सरकार 

बीजेपी के दिग्गज नेता और राज्य में लगातार 15 साल तक मुख्यमंत्री रहे रमन सिंह के नजदीकी अधिकारी के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू होते ही केंद्र सरकार सक्रिय हो गई। कहा जाता है कि बीजेपी को असल समस्या सिमी से संबंधों और दुबई में फ्लैट की जांच को लेकर हुई। उच्च न्यायालय से अमन को राहत न मिलने के बाद से ही केंद्र सरकार सक्रिय हो गई थी। 

राज्य सरकार ने जैसे ही अमन के ख़िलाफ़ जांच तेज की, केंद्र सरकार ने दिल्ली से चार्टर्ड प्लेन से 100 से ज़्यादा अधिकारी रायपुर में उतार दिए। राज्य से सुरक्षा बल न लेकर अधिकारियों ने सीआरपीएफ़ के 200 जवानों के साथ कार्रवाई शुरू कर दी।

रायपुर के मेयर व कारोबारी एजाज ढेबर, उनके भाई अनवर ढेबर, राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी और मुख्यमंत्री की उपसचिव सौम्या चौरसिया, रेरा के चेयरमैन आईएएस अधिकारी विवेक ढांड, उद्योग विभाग के संयुक्त सचिव अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग में ओएसडी एपी त्रिपाठी सहित मुख्यमंत्री की कोर टीम में शामिल हर अधिकारी को आयकर विभाग ने जांच के घेरे में ले लिया। 

क्यों अहम हैं भूपेश बघेल?

भूपेश बघेल अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में शामिल कुर्मी जाति से आते हैं। कांग्रेस की बदली नीति के तहत पार्टी पिछड़े और ग़ैर-ब्राह्मण चेहरों को सामने ला रही है। इसी रणनीति के तहत राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को आगे लाया गया। भूपेश बघेल न सिर्फ राजनीतिक पदों पर पिछड़े वर्ग को बढ़ा रहे हैं, बल्कि वह जातीय सम्मेलनों में भी जाते हैं और हर मोर्चे पर पिछड़े वर्ग को पार्टी से जोड़ने में जुटे हैं। 

कांग्रेस ने पिछड़ों का वोट खींचने के लिए उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली में विधानसभा चुनाव के दौरान प्रचार में उनका इस्तेमाल किया है और पार्टी उन्हें प्रमुख चेहरे के रूप में पेश कर रही है। सामाजिक समीकरणों व हर वर्ग को प्रतिनिधित्व देकर लोकप्रियता हासिल करने वाले भूपेश बघेल ने अपने प्रशासन में इसे दिखाया है।

इस समय उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, गुजरात सहित तमाम राज्यों में कुर्मी मतदाता मजबूती के साथ बीजेपी के साथ जुड़ा हुआ है। ऐसे में अगर भूपेश कांग्रेस के केंद्रीय नेता के रूप में उभरकर सामने आते हैं तो निश्चित रूप से बीजेपी के मजबूत वोट बैंक में सेंध लगने की संभावना है। इसकी वजह यह है कि बीजेपी ने सरदार बल्लभ भाई पटेल की मूर्ति लगाकर प्रतीकात्मक राजनीति की है और राष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा कुर्मी चेहरा नहीं उभरने दिया है। 

विचार से और ख़बरें

कांग्रेस के तीन नेता निशाने पर

कर्नाटक के वोक्कालिगा, गुजरात के पटेल और छत्तीसगढ़ के बघेल राष्ट्रीय स्तर के कुर्मी संगठन से जुड़े हुए हैं। इन समुदायों के नेता क्रमशः कर्नाटक के डीके शिवकुमार, गुजरात के नेता हार्दिक पटेल और छत्तीसगढ़ के नेता भूपेश बघेल हैं। शिवकुमार राज्य के कृषक समुदाय वोक्कालिगा जाति से आते हैं। कई बार वह कांग्रेस के संकटमोचक के रूप में सामने आए। चाहे वह गुजरात में राज्यसभा चुनाव का मसला रहा हो, कर्नाटक में कांग्रेस के विधायकों को समेटकर सरकार बनाने का मसला रहा हो, या हाल में महाराष्ट्र में सरकार बनाने का। शिवकुमार हर मामले में पार्टी के साथ मजबूती से ख़ड़े नजर आए। उनके ख़िलाफ़ आय से अधिक संपत्ति, धनशोधन के मामले चल रहे हैं। उन्हें तिहाड़ जेल में रहना पड़ा। राज्य में उनकी धमक इस कदर है कि वहां के बीजेपी के तमाम नेताओं ने यह कामना की कि शिवकुमार जल्द से जल्द जेल से छूटकर बाहर आएं। 

इसी तरह गुजरात में खेतिहर पटेल समुदाय ताक़तवर है। गुजरात में मोदी युग आने के बाद यह समुदाय राजनीति में हाशिये पर है और आरोप लगते रहते हैं कि मोदी की इच्छा के मुताबिक़ ही राज्य में इस समुदाय के बीजेपी नेता तय किए जाते हैं। आरक्षण की मांग को लेकर राज्य में उभरे हार्दिक पटेल अब कांग्रेस में हैं और उनके ख़िलाफ़ भी तमाम केंद्रीय व राज्य सरकार की एजेंसियां जांच कर रही हैं। 

आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई तोड़फोड़ व अन्य मामलों में गुजरात की सरकार ने हार्दिक पटेल के ख़िलाफ़ राजद्रोह का मुक़दमा दर्ज कराया है और ज़्यादा सक्रिय होने पर पुलिस उन्हें उठा लेती है।

भूपेश बघेल की छवि बेदाग रही है। इन छापों के बाद यह कयास लगाए जाने लगे हैं कि जांच एजेंसियां उन्हें किसी न किसी मामले में घेरे में लेने की तैयारी में हैं, जिससे उनके बढ़ते राजनीतिक क़द पर काबू पाया जा सके। पिछड़ों का आरक्षण बढ़ाने से लेकर नियुक्तियों आदि में बघेल ने जिस तरह से वंचित तबक़े को आगे बढ़ाया है, उससे वह तेजी से लोकप्रिय हुए हैं। इसके अलावा वह बीजेपी नेताओं के भ्रष्टाचार के मामलों को तेजी से खोलने की कवायद भी कर रहे थे। लेकिन केंद्र सरकार और बीजेपी ने पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह पर उंगली उठते ही बघेल को निशाने पर ले लिया है। 

सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

'सत्य हिन्दी'
की ताक़त बनिए


गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
प्रीति सिंह

अपनी राय बतायें

विचार से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें