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प्रतिकात्मक तसवीरफ़ोटो साभार/अनस्पलैश

ऐसी लापरवाही! अस्पताल में ऑपरेशन के बाद आँखें क्यों निकालनी पड़ रही हैं?

कहते हैं कि 'आँखों के मामले में लापरवाही नहीं, तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें'। लेकिन क्या हो जब अस्पताल और डॉक्टर ही लापरवाही से लोगों की आँखों की रोशनी छीन लें! बिहार के मुजफ्फरपुर में एक अस्पताल में ऐसी ही घोर लापरवाही के मामले सामने आए हैं। ख़बर है कि जूरन छपरा स्थित आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने के बाद कई लोगों की आँखें निकालनी पड़ी हैं। इस मामले में जाँच टीम ने संदेह जताया है कि मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने वाले सभी 65 लोगों की आँखों में इन्फ़ेक्शन हो गया है और इससे उनकी रोशनी चली गई है। हालाँकि, इसकी पुष्टि आधिकारिक तौर पर की जानी बाक़ी है।

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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जूरन छपरा के आई हॉस्पिटल में इस मामले के आने के बाद अब तक कम से कम 7 लोगों की आँखें निकालनी पड़ी हैं। हालाँकि, 'दैनिक भास्कर' की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 12 लोगों की आँख निकालनी पड़ी हैं और 7 और लोगों की आँखें निकाली जाएँगी क्योंकि इन्फेक्शन काफ़ी ज़्यादा फैल गया है।

उस आई हॉस्पिटल में भारी लापरवाही का मामला सामने आ रहा है। इसी की पड़ताल करने के लिए मंगलवार को मुजफ्फरपुर के उस अस्पताल में मेडिकल टीम जाँच करने पहुँची थी। 

जिन लोगों की आँखों का ऑपरेशन हुआ है उनमें ऑप्थेल माइटिस संक्रमण हो गया है। प्रभात ख़बर की रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा है कि जाँच टीम ने अस्पताल के ओटी की मशीन का स्वाब लिया। इसके साथ ही रिएजेंट का सैंपल लिया गया है, जिससे ऑपरेशन के पहले आँख की सफ़ाई की जाती है। माना जाता है कि जाँच रिपोर्ट दो-तीन दिनों में आ जाएगी, जिससे पता चलेगा कि मरीजों की आँखों में संक्रमण फैलने की वजह क्या रही है।

जाँच के दौरान टीम ने वहाँ मौजूद सात मरीजों की आँखों को देखा और उन्हें तत्काल एसकेएमसीएच रेफर कर दिया गया। जाँच टीम ने ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर से भी पूछताछ की है।

कुछ रिपोर्टों में आई हॉस्पिटल में भारी लापरवाही की ख़बरें सामने आई हैं। 'दैनिक भास्कर' ने ख़बर दी है कि अस्पताल में सर्जन नहीं होने के बाद भी ऑपरेशन का मामला सामने आया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 22 नवंबर को जिस डॉक्टर एनडी साहू ने 65 लोगों के मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया वह कॉन्ट्रैक्ट पर आए थे क्योंकि, पैनलिस्ट डॉ. अमित और डॉ. प्रवीण 2 माह पहले ही अस्पताल में सेवा देनी बंद कर चुके हैं। रिपोर्ट है कि एक ही दिन में डॉ. साहू ने 65 मरीजों की सर्जरी की। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह एमसीआई के मानक का उल्लंघन है।

दैनिक भास्कर ने रिपोर्ट में यह भी कहा है कि जिस डॉ. साहू ने एक दिन में 65 सर्जरी की उन्होंने उस आई हॉस्पिटल में पहले एक दिन भी सर्जरी नहीं की थी। 

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इधर, मोतियाबिंद के ग़लत ऑपरेशन का मामला अब मानवाधिकार आयोग तक पहुँच गया है। मानवाधिकार के वकील एसके झा ने बिहार मानवाधिकार आयोग एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में याचिका दाखिल की है। उन्होंने कहा है कि प्रथम दृष्ट्या यह मामला लापरवाही का प्रतीत होता है। इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा है कि सभी पीड़ितों को सरकारी खर्च पर इलाज होनी चाहिए।
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