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जेएनयू: ABVP और AISA के समर्थकों में मारपीट, कई घायल

दिल्ली में स्थित जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में छात्र संगठनों अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स यूनियन (AISA) के समर्थकों के बीच झड़प और मारपीट हुई है। इसमें कई छात्र घायल हो गए हैं। यह मारपीट रविवार रात को कैंपस के अंदर हुई है। 

गंभीर रूप से घायल छात्रों को एम्स में भर्ती कराया गया है। 

एएनआई के मुताबिक़, दिल्ली पुलिस के साउथ-वेस्ट जोन के डीसीपी गौरव शर्मा ने कहा कि उन्हें इस बात की सूचना मिली थी कि वसंत कुंज स्टेशन में कुछ हंगामा हुआ है। पुलिस के जांच करने पर पता चला कि छात्रों के दो गुटों के बीच एक सेमिनार को लेकर बहसबाज़ी हुई है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जेएनयू छात्र संघ की ओर से कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। 

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हालांकि ABVP ने लिखित शिकायत दी है और AISA से जुड़े एक छात्र ने भी शिकायत दर्ज कराई है। डीसीपी ने कहा कि छात्रों के दोनों गुट एक-दूसरे पर उनकी बैठक में खलल डालने का आरोप लगा रहे हैं। इस मामले में जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। 

ABVP राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का छात्र संगठन है जबकि AISA सीपीआई (एमएल) का। दोनों छात्र संगठनों के बीच कई मुद्दों पर भिड़ंत होती रही है। 

नक़ाबपोशों ने किया था हमला 

5 जनवरी, 2020 को सैकड़ों की संख्या में नक़ाबपोश जेएनयू में घुसे थे, उन्होंने तीन घंटे तक कोहराम मचाया था, छात्र-छात्राओं और टीचर्स को पीटा था लेकिन अब तक इस मामले में किसी की गिरफ़्तारी नहीं हुई है।  इस हिंसा के फ़ोटो-वीडियो सोशल मीडिया पर ख़ूब वायरल हुए थे। 

इस हिंसा में 36 लोग घायल हुए थे। इनमें टीचर्स और छात्र-छात्राएं शामिल थे। जेएनयू छात्र संघ की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष भी बुरी तरह घायल हुई थीं। 

ABVP AISA Clash in JNU - Satya Hindi

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अगस्त में संसद में बताया था कि इस मामले में दिल्ली पुलिस के द्वारा तीन मुक़दमे दर्ज किए गए हैं और संदिग्धों को पकड़ने के लिए कई तरह की जांच की गई हैं। हिंसा और गुंडई की ये जघन्य वारदात उस दिल्ली में हुई थी, जहां की सुरक्षा केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास है और जिसके पास बेहतर संसाधनों वाली पुलिस फ़ोर्स है और जो देश की राजधानी भी है। 

हिंसा के दौरान ABVP की छात्रा कोमल शर्मा की फ़ोटो काफ़ी वायरल हुई थी। दिल्ली पुलिस की एसआईटी ने उससे भी पूछताछ की लेकिन कोमल का कहना है कि वह उस दिन कैंपस में मौजूद ही नहीं थी। 

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आंतरिक जांच को किया बंद 

जेएनयू प्रशासन ने भी इस मामले में आंतरिक जांच के लिए 5 लोगों की एक कमेटी बनाई थी। लेकिन इस साल की शुरुआत में आंतरिक जांच को बंद कर दिया गया था। प्रशासन का कहना था कि पुलिस की जांच चल रही थी इसलिए इस जांच को बंद कर दिया गया। जबकि हिंसा में घायल हुए टीचर्स और छात्रों ने कहा था कि कमेटी ने एक बार भी उनसे इस मामले में बात नहीं की। 

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