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ओमिक्रॉन के बाद भी विदेशी उड़ानें रोकने में देरी क्यों: केजरीवाल

क्या कोरोना की पहली लहर आने से पहले अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर रोक लग जाती तो भारत में इतने ख़राब हालात नहीं होते? क्या चीन की तरह स्थिति संभाली जा सकती थी? और अब जबकि कोरोना का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन दुनिया के कई देशों में फैल चुका है तो क्या अंतरराष्ट्रीय उड़ानें तुरंत रोक कर इससे बेहतर तरीक़े से निपटा जा सकता है? 

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसी ओर संकेत किया है। उन्होंने कहा है कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रोकने में देरी की जब पिछले साल देश में कोरोना की पहली लहर आई थी। केजरीवाल ने आज सुबह ट्वीट कर कहा कि अधिकतर विदेशी उड़ानें दिल्ली में आती हैं इसलिए दिल्ली सबसे ज़्यादा प्रभावित होती है। इसी को लेकर उन्होंने तुरंत उड़ानों को बंद करने का आग्रह किया।

उन्होंने 'एएनआई' की एक पोस्ट भी साझा की है कि दक्षिण अफ्रीका से लौटा एक 39 वर्षीय व्यक्ति चंडीगढ़ में कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। उसके संपर्क में आए दो लोगों में भी यह वायरस था। नमूने जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजे जाएंगे।

केजरीवाल का यह ट्वीट उस ओमिक्रॉन के फैले डर के बीच आया है जिसे शुरुआती जाँच-पड़ताल के बाद बेहद ख़तरनाक माना जा रहा है। यह वैरिएंट कम से कम 13 देशों में पाया जा चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ ने एक दिन पहले ही यानी सोमवार को एक सख्त चेतावनी में कहा है कि नया वैरिएंट बहुत ज़्यादा वैश्विक जोखिम पैदा करता है और जहाँ कहीं भी संक्रमण बढ़ेगा वहां गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

दो दिन पहले ही प्रधानमंत्री मोदी को लिखे एक पत्र में उन्होंने प्रभावित देशों से उड़ानें तुरंत बंद करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि कोई भी देरी बहुत नुक़सानदेह हो सकती है।

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महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे सरकार ने भी केंद्र सरकार से उन देशों से उड़ानें निलंबित करने का अनुरोध करने का फ़ैसला किया है जहाँ नया वैरिएंट मिला है।

इन राज्यों की मांग इसलिए ठोस है क्योंकि दक्षिण अफ्रीका में पहली बार मिले इस नये वैरिएंट के बाद ब्रिटेन, जर्मनी और इटली सहित कई देशों ने अपनी उड़ानों को रद्द कर दिया है। हालाँकि जब ये देश नये वैरिएंट ओमिक्रॉन से प्रभावित देशों की अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द करने की घोषणा कर रहे थे तो भारत में अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने की घोषणा की गई थी। 26 नवंबर को नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा कि मामले की समीक्षा की गई है और इसी को देखते हुए सक्षम प्राधिकारी ने भारत की निर्धारित अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को फिर से शुरू करने का फ़ैसला किया है।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि निर्धारित वाणिज्यिक अंतरराष्ट्रीय यात्री सेवाओं को लेकर गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के परामर्श से इसकी पड़ताल की गई है और इसके बाद इस पर निर्णय लिया गया।

उड्डयन मंत्रालय ने कहा कि 14 देशों को स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जोखिम के रूप में नामित किया गया है, और जिनके साथ मौजूदा 'एयर बबल' समझौता है। इन देशों के कोरोना के पूर्व की तरह 75 प्रतिशत संचालन को फिर से शुरू करने की अनुमति दी जाएगी।

इन 14 देशों में यूनाइटेड किंगडम, सिंगापुर, चीन, ब्राजील, बांग्लादेश, मॉरीशस, जिम्बाब्वे और न्यूज़ीलैंड शामिल हैं। सूची में दक्षिण अफ्रीका, बोत्सवाना, इज़राइल और हांगकांग भी शामिल हैं, लेकिन ये वे देश हैं जहाँ कोरोना वायरस के नए बी 1.1.529 वैरिएंट के मामले आए हैं। दक्षिण अफ्रीका में पहली बार मिले इन संक्रमण के मामलों के बाद ब्रिटेन, जर्मनी और इटली सहित कई देशों ने दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों की अपनी उड़ानों को रद्द कर दिया है जहाँ ओमिक्रॉन के मामले आए हैं।

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उड्डयन मंत्रालय ने कहा कि जिन देशों को जोखिम के रूप में नामित किया गया है, लेकिन भारत के साथ 'एयर बबल' समझौता नहीं है उन देशों में द्विपक्षीय क्षमता की 50 प्रतिशत उड़ानों को बहाल करने की अनुमति दी जाएगी।

बता दें कि डब्ल्यूएचओ ने देशों से टीकाकरण में तेज़ी लाने और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं को बनाए रखने का आग्रह किया है। डब्ल्यूएचओ ने एक बयान में कहा कि ओमिक्रॉन में अभूतपूर्व संख्या में स्पाइक म्यूटेशन हैं, जिनमें से कुछ महामारी के बड़े प्रभाव लाने के लिए ज़िम्मेदार हैं।

भारत में सरकार ने प्रभावित देशों से आने वालों के लिए कुछ नियमों की घोषणा की है। भारत आने वाले प्रत्येक अंतरराष्ट्रीय यात्री को एक स्व-घोषणा पत्र भरना होगा और नेगेटिव आरटी-पीसीआर टेस्ट रिपोर्ट दिखानी होगी।

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