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पकड़े गए पाक आतंकवादी ने कैमरे पर कहा- उसे 20 हज़ार रुपये दिए गए

जिस पाकिस्तानी आतंकवादी को तीन दिन पहले सेना ने जम्मू कश्मीर के उरी सेक्टर से पकड़ा था उसका उसने एक वीडियो जारी किया है। उस वीडियो में आतंकवादी यह कबूल करता सुना जा सकता है कि उसे आतंकवादी संगठन लश्कर ए तैयबा द्वारा प्रशिक्षण दिया गया था। आतंकवादियों द्वारा सीमा पार करने के लिए उसे 20 हज़ार रुपये दिए गए थे और वापस लौटने पर 30 हज़ार रुपये और दिए जाने का वादा दिया गया था।

पकड़े गए आतंकवादी का नाम अली बाबर है। हाल के वर्षों में यह एक दुर्लभ ऑपरेशन है जब सेना ने नियंत्रण रेखा के पास एक पाकिस्तानी आतंकवादी को पकड़ लिया। घुसपैठ की कोशिश को उसी इलाक़े में रोक दिया गया था। 18 सितंबर को यह घुसपैठ हुई थी। इसके बाद सेना ने इन्हें पकड़ने के लिए अभियान चलाया। रविवार को एक आतंकवादी को पकड़ लिया गया। 

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सेना की ओर से कहा गया कि 26 सितंबर को एक आतंकवादी मारा भी गया था। दो आतंकवादी ही भारतीय सीमा में थे जबकि चार आतंकवादी सीमा के उस पार ही थे। जवाबी कार्रवाई के बाद चारों पाकिस्तान की तरफ़ चले गए थे।

इससे पहले 2016 में 18 सितंबर को ही उरी में आतंकियों ने घुसपैठ की थी। उन्होंने सेना के एक कैंप पर दो आत्मघाती हमले किये थे जिनमें 19 जवान शहीद हो गए थे।

बहरहाल, रविवार को पकड़े गए 19 वर्षीय आतंकवादी अली बाबर का ही वीडियो सेना ने जारी किया है। वीडियो में दिखता है कि उरी में सेना के कैंप में वह मीडिया के सवालों का जवाब दे रहा है। 

आतंकवादी का यह भी कहना है कि उन्हें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके के मुजफ्फराबाद में लश्कर शिविर में प्रशिक्षित किया गया था और 18 सितंबर को छह आतंकवादियों के एक समूह के साथ उसे घुसपैठ कराई गई थी।

उसने कैमरे के सामने कबूल किया है कि वह पाकिस्तान के पंजाब के दिपलपुर में गांव वासेववाला का रहनेवाला है। उसने सातवीं तक पढ़ाई की है। आतंकियों की घुसपैठ का मक़सद 2016 के उरी जैसे बड़े हमले को अंजाम देना था।

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आतंकवादी ने कहा है कि लश्कर-ए-तैयबा में शामिल होने के लिए लालच दिया गया। उसकी मां के इलाज के लिए 20 हजार रुपये आतंकियों की ओर से दिए गए। साथ ही 30 हजार रुपये देने का वादा भी किया गया। उसने कहा कि उसे लश्कर ए तैयबा ने तीन महीने प्रशिक्षण दिया और हथियार चलाने का प्रशिक्षण देने वालों में अधिकतर पाकिस्तानी सेना के जवान थे। उसने यह भी कहा कि उससे कहा जाता था कि इसलाम ख़तरे में है, मुसलमानों पर अत्याचार हो रहा है।

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क़मर वहीद नक़वी

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