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फ़ोटो क्रेडिट- @PIB_Panaji

...मैं जानता हूं मेरे बोलने से कुछ लोगों को दिक्क़त होगी: मलिक

मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने एक बार फिर मोदी सरकार पर जोरदार हमला किया है। मलिक ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर तंज कसते हुए कहा है कि वे जानते हैं कि उनके बोलने से कुछ लोगों को दिक्कत होगी। किसान आंदोलन शुरू होने के बाद से ही मलिक लगातार कुछ न कुछ ऐसा बोलते रहे हैं, जिससे बीजेपी व मोदी सरकार की खासी किरकिरी हुई है। 

मलिक रविवार को जयपुर में आयोजित जाट समुदाय के एक सम्मेलन में बोल रहे थे। मलिक ने कहा, “मुझे दिल्ली में दो-तीन बड़े लोगों ने राज्यपाल बनाया था, मैं उनकी इच्छा के विरूद्ध बोल रहा हूं, ये मैं जानकर बोल रहा हूं कि मेरे बोलने से उन्हें दिक्क़त होगी, वे जिस दिन मुझे कह देंगे कि हमें दिक्क़त है छोड़ दो, मैं एक भी मिनट नहीं लगाऊंगा।” 

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किसान आंदोलन से ख़ासे प्रभावित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ से आने वाले मलिक यहीं नहीं रुके और जोरदार हमले करते रहे। उन्होंने आगे कहा, “पहले दिन जब मैं किसानों के हक़ में बोला था, यह तय करके बोला था कि मैं फ़ौरन छोड़ दूंगा और किसानों के धरने में आकर बैठ जाऊंगा।” इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने जमकर तालियां बजाई और किसान एकता जिंदाबाद के नारे लगाए। 

राज्यपाल मलिक ने आगे कहा, “देश में इतना बड़ा आंदोलन आज तक नहीं चला है जिसमें 600 लोग शहीद हो गए हैं, कुतिया भी मरती है तो दिल्ली के नेताओं का शोक संदेश जाता है, लेकिन 600 किसानों का प्रस्ताव लोकसभा में पास नहीं हुआ।” 

मलिक ने कहा कि न तो सिखों को हराया जा सकता है और न ही जाटों को। बताना होगा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर हरियाणा, राजस्थान और पंजाब में हिंदू के साथ ही सिख जाट भी इस आंदोलन में खासे सक्रिय हैं।

‘निशाने पर राम माधव’

मलिक ने कुछ दिन पहले एक बयान देकर सियासत में खलबली मचा दी थी। मलिक ने कहा था कि जब वे कश्मीर के उप राज्यपाल बने, तब उनके पास दो फ़ाइलें आयी थीं। 

मलिक के मुताबिक़, एक फ़ाइल में अंबानी शामिल थे जबकि दूसरी फ़ाइल में आरएसएस के एक बड़े अफ़सर। राज्यपाल ने कहा था कि जिन विभागों की ये फ़ाइलें थीं, उनके सचिवों ने उन्हें बताया था कि इन फ़ाइलों में घपला है और इन दोनों फ़ाइलों में उन्हें 150-150 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। मलिक के इस बयान पर कि ‘दूसरी फ़ाइल में आरएसएस के एक बड़े अफ़सर’ शामिल थे, इसे लेकर जोरदार चर्चा पत्रकारिता से लेकर सियासी गलियारों में हो चुकी है। चर्चा इसी बात को लेकर हुई कि आख़िर वह आरएसएस के बड़े अफ़सर कौन थे। 

मलिक ने कहा था कि आरएसएस के उस अफ़सर का नाम लेना सही नहीं होगा लेकिन सब जानते हैं कि उस वक़्त जम्मू-कश्मीर में आरएसएस का प्रभारी कौन था।

लेकिन बीजेपी के बड़े नेता राम माधव ने कहा था कि मलिक जब तक जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल रहे, तब तक हुए सभी समझौतों की जांच होनी चाहिए। मलिक ने बस नाम नहीं लिया बाक़ी उनका साफ इशारा राम माधव की ही ओर था।

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...ईडी, इनकम टैक्स वाले पहुंच जाते

मलिक ने कुछ दिन पहले कहा था कि कश्मीर के उप राज्यपाल पद से हटने के बाद उन्होंने किसानों को लेकर बेधड़क होकर कई बयान दिए, अगर वे कश्मीर में कुछ ग़लत कर देते तो उनके घर ईडी और इनकम टैक्स वाले पहुंच जाते। 

मलिक ने कहा था, “प्रधानमंत्री के पास सारी संस्थाएं हैं, मेरी जांच करा लें, मैं इसी तरह बेधड़क रहूंगा क्योंकि मेरे पास कुछ नहीं है।”

‘दोबारा नहीं आएगी सरकार’

मलिक ने हाल ही में केंद्र सरकार से अपील की थी कि वह आंदोलनकारी किसानों की मांगों को मान ले। उन्होंने कहा था कि अगर किसानों की मांगें नहीं मानी गईं तो ये सरकार दोबारा सत्ता में नहीं आएगी। उनके इस बयान को सोशल मीडिया से लेकर मेन स्ट्रीम मीडिया में ख़ूब जगह मिली थी। 

मलिक ने कहा था कि बीजेपी का कोई नेता उत्तर प्रदेश के मेरठ, बाग़पत, मुज़फ्फरनगर के किसी गांव में घुस तक नहीं सकता। 

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