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कोरोना: 2 माह बाद 1 लाख से कम केस, 66 दिनों में सबसे कम

कोरोना संक्रमण के मामले दो महीने में सबसे कम आए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार मंगलवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार सोमवार को 24 घंटे में 86 हज़ार 498 मामले दर्ज किए गए। 66 दिनों में यह सबसे कम है। इससे पहले 4 अप्रैल को केस 1 लाख के मार्क पार किया था और 1 अप्रैल को क़रीब 81 हज़ार मामले आए थे। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान हर रोज़ संक्रमण के मामले सबसे ज़्यादा 6 मई को 4 लाख 14 हज़ार दर्ज किए गए थे। तब से केस लगातार घट रहे हैं। पहली लहर के दौरान सबसे ज़्यादा संक्रमण के मामले 97 हज़ार 894 दर्ज किए गए थे।

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स्वास्थ्य विभाग के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, 24 घंटे में 1 लाख 82 हज़ार 282 लोग ठीक हुए और 2123 लोगों की मौत हुई। अब तक कुल 3 लाख 51 हज़ार 309 लोगों की मौत दर्ज की गई है। देश में कुल 2 करोड़ 89 लाख 96 हज़ार संक्रमण के मामले दर्ज किए गए हैं और इसमें से 2 करोड़ 73 लाख 41 हज़ार मरीज़ ठीक हो चुके हैं। एक्टिव मामलों की संख्या अब क़रीब 13 लाख रह गई है जो एक समय तक 37 लाख पर पहुँच गई थी। 

देश में अब पॉजिटिविटी दर भी गिरकर 4.62 फ़ीसदी तक पहुँच गई है। पिछले 24 घंटों में सबसे अधिक कोरोना संक्रमण के मामले दर्ज करने वाले शीर्ष पांच राज्यों में तमिलनाडु (19,448 मामले), कर्नाटक (11,958 मामले), महाराष्ट्र (10,219) मामले, केरल (9,313 मामले) और ओडिशा (6,118 मामले) हैं।

लगातार संक्रमण के मामले कम आने के बीच देश में अब तक क़रीब 23 लाख 61 हज़ार टीके की खुराक लगाई जा चुकी है। वैसे टीकाकरण पर सरकार ने सोमवार देर शाम को ही बड़ी घोषणा की है। काफ़ी आलोचनाओं के बाद वैक्सीन नीति में अब बदलाव किया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार की शाम देश को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार टीका बनाने वाली कंपनियों से उनके कुल उत्पादन का 75 प्रतिशत हिस्सा खरीद कर राज्यों को मुफ़्त देगी। इससे यह होगा कि 18 साल से ऊपर की उम्र के सभी लोगों को मुफ़़्त कोरोना टीका दिया जा सकेगा। 

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इसके अलावा 25 प्रतिशत कोरोना टीका निजी क्षेत्र के लिए छोड़ दिया जाएगा। निजी अस्पताल ये टीके खरीद कर उन लोगों को दे सकेंगे जो पैसे देकर उनसे टीका लेना चाहेंगे। लेकिन ये अस्पताल टीका की क़ीमत के ऊपर सिर्फ़ 150 रुपए सेवा शुल्क के रूप में ले सकेंगे।

सरकार का यह फ़ैसला तब आया है जब क़रीब हफ़्ते भर पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की वैक्सीन नीति को लेकर ज़बरदस्त आलोचना की थी। विपक्ष के नेता तो उस नीति की पहले से ही आलोचना कर रहे थे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी वैक्सीन नीति को लेकर आलोचना की जा रही थी।

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