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क्या आयकर में कुछ छूट देंगी निर्मला सीतारमण?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 5 जुलाई को अपना पहला बजट पेश करेंगी। सबकी निगाहें इस पर टिकी हुई हैं कि क्या वह मध्य वर्ग को टैक्स में कुछ रियायत देंगी या उनकी जेब पर बेरहमी से डाका डालेंगी। हम आपको बताएँगे इससे जुड़ी 5 बातें…

आयकर छूट की सीमा

यह मुमकिन है कि वित्त मंत्री टैक्स न चुकाने की सीमा बढा कर तीन लाख रुपये कर दें। यानी तीन लाख रुपए सालाना कमाने वालों को कोई इनकम टैक्स नहीं देना पड़े। फ़िलहाल यह सीमा ढाई लाख रुपए है। यदि ऐसा हुआ तो आपको कम से कम 2,500 सालाना बचेंगे। 2014 के बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आयकर न चुकाने की सीमा दो लाख रुपये से बढ़ा कर ढाई लाख रुपये कर दी थी। समझा जाता है कि सरकार निम्न मध्यवर्ग को राहत देने की कोशिश इसके जरिए कर सकती है। इसकी एक वजह यह भी है कि इस वर्ग के पास वेतन के अलावा आमदनी का कोई स्रोत नहीं होता और यह वर्ग हमेशा दबाव में रहता है। 

एनपीएस से निकासी

रिटायर कर चुके या करने वालों के लिए भी अच्छी ख़बर हो सकती है। यह मुमकिन है कि एनपीएस यानी नैशनल पेन्शन स्कीम से एक मुश्त पैसे निकालने वालों को अब उस पर कोई टैक्स नहीं चुकाना पड़े। पहले 40 एकमुश्त पेन्शन निकालने की स्थिति में 40 प्रतिशत रकम पर आयकर नहीं लगते थे। इसे जेटली ने बढ़ा दिया। फ़िलहाल 20 प्रतिशत रकम पर ही टैक्स देना होता है। अब यदि वित्त मंत्री मेहरबान हुईं तो हो सकता है कि पेन्शन को पूरी तरह कर मुक्त कर दिया जाए, यानी आपको पेन्शन से एक मुश्त पैसे निकालने पर कोई टैक्स नहीं चुकाना पड़े। 

80 सी सी के तहत छूट

बचत और निवेश पर आयकर की धारा 80 सी सी के तहत जो छूट मिलती है, उसे भी बढ़ाया जा सकता है। फिलहाल प्रावधान यह है कि डेढ़ लाख रुपए तक की बचत और निवेश को कुल आय से घटा दिया जाता है, उसके बाद इनकम टैक्स का हिसाब होता है। यह रकम बढ़ाई जा सकती है। 

इसी तरह स्वास्थ्य बीमा लेने पर आयकर की धारा 80 डी के तहत 25 हज़ार रुपये तक की छूट मिलती है। यानी 25,000 रुपये तक के स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम को आपकी आय से घटा दिया जाता है, यानी आपको उतनी कम रकम पर टैक्स देना होता है। आयकर की धारा 80 सी सी और 80 डी के तहत मिलने वाली छूट का फ़ायदा मध्यवर्ग को मिलता है। इस वर्ग का बड़ा हिस्सा शहरों और कस्बों में रहने वाला होता है। यह समूह बीजेपी का प्रबल समर्थक है और पार्टी को सबसे ज़्यादा समर्थन इसी वर्ग से मिला है। 

टैक्स-फ्री बॉन्ड

सरकार ढाँचागत सुविधाओं के विकास के लिए पैसे उगाहने की मक़सद से टैक्स फ्री बॉन्ड भी लाने की छूट दे सकती है। यानी ऐसे बॉन्ड लाए जा सकते हैं, जिन पर मिलने वाले ब्याज पर आपको आयकर नहीं चुकाना होगा। टैक्स फ्री बॉन्ड समय की ज़रूरत है। इसकी वजह यह है कि सरकार अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए बड़े पैमाने पर ढाँचागत सुविधाओं के निर्माण की घोषणा कर सकती है। टैक्स फ्री बॉन्ड से उसे इसके लिए पैसे आसानी से मिल सकेंगे। 

एलटीसीजी टैक्स

सरकार लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में छूट की सीमा 1.50 लाख रुपए से बढ़ा सकती है। इसका मतलब यह है कि पूँजी बाज़ार में कारोबार करने से जो आमदनी होती है उस पर जो टैक्स लगता है, उसमें छूट मिलती है। फ़िलहाल एक लाख रुपए तक की आमदनी पर छूट मिलती है। इसे बढ़ाया जा सकता है। पूँजी बाज़ार को इससे थोड़ा बल मिल सकता है। मझोले और छोटे शेयरधारकों और कारोबारियों को खुश करने के लिए सरकार यह फ़ैसला कर सकती है। 

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