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अनुच्छेद 370: श्रीनगर में 24 घंटे में 23 जगहों पर प्रदर्शन 

कश्मीर में कर्फ़्यू लगे 56 दिन हो चुके हैं लेकिन अभी तक घाटी में हालात सामान्य नहीं हो सके हैं। इतने दिनों में कश्मीर का मुद्दा हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच से संयुक्त राष्ट्र और फिर दुनिया भर तक के देशों तक पहुँच गया है। अंग्रेजी अख़बार ‘द हिंदू’ के मुताबिक़, कश्मीर में 24 घंटे के भीतर कुल 23 जगहों पर प्रदर्शन हुए हैं। इसमें से 15 रात में और 8 प्रदर्शन दिन में हुए हैं। इन प्रदर्शनों में पत्थर फेंकने की घटनाएं हुईं हैं। 

‘द हिंदू’ के मुताबिक़, शुक्रवार को इमरान ख़ान के भाषण के बाद श्रीनगर में कम से कम 15 जगहों पर प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे और उनकी सुरक्षा बलों के साथ झड़प भी हुई। इस दौरान उन्होंने जमकर नारेबाज़ी भी की। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। ये प्रदर्शन बाटापोरा, लाल बाज़ार, सौरा, चानापोरा, बाग़-ए-मेहताब और कई दूसरी जगहों पर हुए। 

एक पुलिस अफ़सर ने ‘द हिंदू’ को बताया कि कई प्रदशर्नकारी मसजिदों में घुस गए और उन्होंने वहाँ से भारत के विरोध में नारेबाज़ी की और धार्मिक गाने बजाये।
पुलिस ने शनिवार दिन में पुराने श्रीनगर और शहर के ऊपरी इलाक़ों में पत्थर फेंके जाने की 8 घटनाएँ दर्ज की हैं। पुलिस अफ़सर ने अख़बार से कहा कि प्रदर्शनकारियों ने 9 जगहों पर अवरोधक भी बना दिये थे। इससे पहले 20 अगस्त को ऐसी ख़बरें आई थीं कि घाटी में कई जगहों पर प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे थे। 
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बता दें कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाये जाने के बाद से ही राज्य में कई तरह के प्रतिबंध लगा दिये गये थे। अभी तक राज्य के सिर्फ़ कुछ ही इलाक़ों में टेलीफ़ोन सेवाओं को शुरू किया गया है। कश्मीर के हालात को लेकर चिंतित अमेरिकी कांग्रेस के सांसदों ने अमेरिका के दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात कर वहाँ फ़ोन सेवाओं को बहाल करने की मांग की थी। भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने 13 अन्य सांसदों के साथ पीएम मोदी से मुलाक़ात की थी और कश्मीर में मानवाधिकारों को लेकर चिंता जताई थी। 

5 अगस्त के बाद कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने ख़बर दी थी कि कश्मीर में प्रतिबंधों में आंशिक ढील दिये जाने के बाद श्रीनगर सहित कई इलाक़ों में लोग सड़कों पर उतरे थे और उन्होंने केंद्र सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया था। शुरुआत में भारत सरकार ने ऐसे किसी प्रदर्शन से इनकार किया था लेकिन बाद में सरकार ने प्रदर्शन होने की बात स्वीकार कर ली थी। 

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अंग्रेजी अख़बार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक़, शनिवार दिन में श्रीनगर के निचले इलाक़े में तैनात सीआरपीएफ़ के सुरक्षाकर्मियों पर ग्रेनेड फेंका गया था लेकिन इसमें किसी सुरक्षाकर्मी के घायल होने की ख़बर नहीं है। सीआरपीएफ़ की ओर से कहा गया है कि अनुच्छेद 370 को हटाये जाने के बाद से यह पहला आतंकवादी हमला है। 

अख़बार के मुताबिक़, शनिवार सुबह श्रीनगर में एक बार फिर से पुलिस और पैरामिलिट्री के जवानों को तैनात कर दिया गया। इसके अलावा सड़कों पर कंटीली तार लगा दी गई और बैरिकेड भी लगा दिये गये। पुलिस ने इलाक़े में घोषणा करवाई कि प्रतिबंधों को फिर से लगा दिया गया है। लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध है और साथ ही यह भी आदेश दिये गये कि लोग घरों के अदंर ही रहें। 

ऑल-वुमन फ़ैक्ट-फ़ाइंडिंग नाम की टीम ने हाल ही में कश्मीर की स्थिति का जायजा लिया था और राज्य के अलग-अलग हिस्सों में जाकर लोगों से मिलकर एक रिपोर्ट तैयार की थी। रिपोर्ट के मुताबिक़, जम्मू-कश्मीर में ज़िंदगी ख़ौफ़ और पाबंदी में क़ैद है।
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक़, शनिवार सुबह को कुछ दुकानों को जबरन बंद करा दिया गया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक़, संयुक्त राष्ट्र में इमरान ख़ान के भाषण के बाद से ही सतर्कता बरतते हुए घाटी में फिर से प्रतिबंध लगा दिये गये हैं।
अख़बार के मुताबिक़, श्रीनगर के निशात, शालीमार और हरवान इलाक़ों में लोगों ने अनुच्छेद 370 को हटाये जाने के विरोध में प्रदर्शन किये। इसके अलावा भी कई जगहों पर प्रदर्शन होने की ख़बर है।
ये प्रतिबंध ऐसे समय में लगाये गये हैं जब कुछ ही दिन पहले सरकार ने दावा किया था कि घाटी में लोगों के आने-जाने पर से प्रतिबंध हटा दिये गये हैं। इमरान ख़ान के भाषण के बाद जम्मू-कश्मीर के सूचना सचिव एमके द्विवेदी ने शुक्रवार रात को ट्वीट किया था कि कश्मीर में सभी 105 पुलिस स्टेशनों के इलाक़ों में प्रतिबंधों को हटा दिया गया है और अब जम्मू-कश्मीर के सभी 22 जिलों में कोई भी प्रतिबंध नहीं है। लेकिन अख़बार ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि श्रीनगर के अलावा अनंतनाग, अवंतीपोरा, गांदरबल, कुपवाड़ा, हंदवाड़ा में भी फिर से प्रतिबंध लगा दिये गये हैं। 
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अनुच्छेद 370 को हटाये जाने के बाद से ही पाकिस्तान ने इस मुद्दे को दुनिया भर के कई देशों के सामने उठाया लेकिन चीन और तुर्की के अलावा उसे कहीं भी सफलता नहीं मिली है। भारत कह चुका है कि अनुच्छेद 370 को हटाना पूरी तरह उसका आंतरिक मामला है और पाकिस्तान बेवजह इस मुद्दे पर दुनिया भर के लोगों को गुमराह कर रहा है।
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