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हेमंत सोरेन :  टीका खरीदने का बोझ राज्यों पर डालना संघवाद के ख़िलाफ़

कोरोना टीका खरीदने की ज़िम्मेदारी राज्य सरकारों पर डालने के केंद्र सरकार के फ़ैसले का अब मुखर विरोध हो रहा है और राज्य सरकारें खुल कर सामने आ रही हैं।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिख कर कहा है कि राज्यों से टीका खरीदने को कहना सहकारी संघवाद के सिद्धांत के ख़िलाफ है। उन्होंने केंद्र से मुफ़्त टीका देने को कहा है। 

झारखंड के मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के 1.57 करोड़ लोगों को कोरोना टीका देने पर लगभग 1,100 करोड़ रुपए का खर्च बैठेगा, जो राज्य पर बहुत बड़ा आर्थिक बोझ होगा।

क्या कहना सोरेन का?

उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी में कहा है कि 12 साल से 18 साल की उम्र के बच्चो-किशोरों को कोरोना वैक्सीन देने से राज्य सरकार पर अतिरिक्त 1,000 करोड़ रुपए का बोझ पड़ेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना और लॉकडाउन की वजह से राज्य सरकार की आर्थिक स्थिति वैसे भी अच्छी नहीं है। झारखंड के मख्यमंत्री ने कहा, 

आज़ाद भारत के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि राज्यों से कहा गया है कि वे अपने लोगों के लिए टीका ख़ुद खरीदें।


हेमंत सोरेन, मुख्यमंत्री, झारखंड

उन्होंने इसके आगे कहा, 'जब देश एक साल से इस विकट स्थिति से जूझ रहा हो, राज्यों को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा हो, ऐसा कहना सहकारी संघवाद के सिद्धान्त के ख़िलाफ़ है।'
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हेमंत सोरेन ने यह भी कहा कि कोरोना वैक्सीन मिल नहीं रहा है, जो ऑर्डर टीका कंपनियों को दिए गए हैं, वे भी पड़े हुए हैं और टीका का आबंटन पूरी तरह केंद्र पर निर्भर है। 

उन्होंने कहा कि केंद्र 45 वर्ष से ऊपर के लोगों के लिए जो टीके खरीद रहा है राज्यों को 18 से 44 साल की उम्र के लोगों के लिए टीके पर उससे अधिक कीमत देना पड़ रहा है। 

इसके पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी यह मुद्दा उठाया था और केंद्र से कहा था कि राज्यों को केंद्र मुफ़्त टीका दे। केंद्र सरकार का कहना है कि वह जो टीका राज्यों को दे रही है, वह मुफ़्त है। लेकिन केंद्र जो टीके दे रही है, उससे पूरा टीकाकरण कार्यक्रम नहीं चल सकता। उससे अधिक टीका चाहिए, केंद्र का कहना है कि राज्य खुद वह टीका खरीदे। 
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