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प्रतीकात्मक तसवीर।

कर्नाटक: दूसरे धर्म की लड़की के साथ यात्रा करते युवक को घायल किया

कर्नाटक में 23 वर्षीय युवक की सिर्फ़ इसलिए पिटाई कर दी और नुकीली चीज घोंप दी कि वह दूसरे धर्म की लड़की के साथ बस से यात्रा कर रहा था। यह उस राज्य में घटना हुई है जहाँ की बीजेपी सरकार कथित 'लव जिहाद' को लेकर क़ानून लाने की तैयारी करती रही थी। कर्नाटक ही नहीं, बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश सहित कुछ राज्यों में क़ानून लाया भी जा चुका है। यह सब कुछ दक्षिणपंथियों द्वारा नफ़रत फैलाने वाले देश भर में चलाए जा रहे अभियान के बीच हुआ है। 

कर्नाटक का यह ताज़ा घटनाक्रम मंगलुरु में गुरुवार को चला है। रिपोर्ट के अनुसार जिस बस में युवक-युवती जा रहे थे उसको कार से आए कुछ लोगों ने रोकवा दिया और युवक की पिटाई कर दी। उसको चाकू भी मारे गए। 

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घटना को लेकर पुलिस ने कार्रवाई की है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलुरु के पुलिस आयुक्त शशि कुमार ने कहा, 'मंगलुरु शहर के बाहरी इलाक़े में कल रात लगभग 9:30 बजे एक बस को रोक दिया गया और लड़का-लड़की, जो सहपाठी व दोस्त हैं और विभिन्न धर्मों से संबंधित थे, को वाहन से नीचे उतारा गया। लड़के की पिटाई की गई और जब लड़की बीच में आने की कोशिश की तो उसे भी चोट लगी।' आरोपियों के ख़िलाफ़ हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया गया है। 

रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि 7-8 लोगों को हिरासत में लिया गया है और घटना में शामिल बजरंग दल से जुड़े 4 लोगों को भी गिरफ़्तार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि युवक को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उसकी हालत स्थिर बनी हुई है। 

पुलिस ने कहा है कि युवती बेंगलुरु जा रही थी और उसका सहपाठी बस से सिर्फ़ उसकी सहायता करने जा रहा था क्योंकि वह शहर को अच्छी तरह जानता था। पुलिस ने यह भी कहा है कि वे दोनों एक-दूसरे को काफ़ी लंबे वक़्त से जानते थे। 

बता दें कि जिस क्षेत्र में यह घटना हुई है उस क्षेत्र में पहले से ही सांप्रदायिक तनाव वाली घटनाएँ घट चुकी हैं। आरोप लगते रहे हैं कि राज्य में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से ऐसी घटनाएँ बढ़ गई हैं। यह सब तब हो रहा है जब राज्य में 'लव जिहाद' को लेकर हो हल्ला मचाया जा रहा है। 

हाल ही में बीएस येदियुरप्पा सरकार की ओर से कई बार ऐसे बयान आए हैं कि अंतर धार्मिक शादी को लेकर क़ानून बनाया जाएगा। लेकिन इस मामले में सरकार को तब झटका लगा था जब कर्नाटक हाई कोर्ट ने इस पर फ़ैसला दिया था।

मुसलिम लड़के से शादी करने को लेकर एक लड़की के मामले में दाखिल याचिका का निपटारा करते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट ने साफ़ कहा था कि, ‘किसी भी वयस्क व्यक्ति के लिए अपनी पसंद की शादी करना, संविधान में दिए गये मौलिक अधिकार के अंतर्गत है’। कोर्ट का यह फ़ैसला पिछले साल दिसंबर में आया था। 

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इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो सिंगल बेंच के एक फ़ैसले में शादी के लिए धर्म परिवर्तन को ग़ैर क़ानूनी क़रार दिया था लेकिन उसी हाईकोर्ट की डबल बेंच ने दोनों सिंगल बेंच के आदेशों को पलटते हुए साफ़ कहा था कि, ‘किसी भी व्यक्ति को अपनी पसंद का जीवन साथी चुनने का मौलिक अधिकार है। महज अलग-अलग धर्म या जाति का होने की वजह से किसी को साथ रहने या शादी करने से नहीं रोका जा सकता है। दो बालिग लोगों के रिश्ते को सिर्फ़ हिन्दू या मुसलमान मानकर नहीं देखा जा सकता’। हालाँकि इलाहाबाद हाईकोर्ट के कथित लव जिहाद पर इस टिप्पणी के बावजूद यूपी की योगी सरकार ने अध्यादेश लाकर कथित लव जिहाद को आपराधिक क़ानून में बदल दिया जिसमें 1 से 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान भी कर दिया गया। 
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