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चुनाव से पहले सरकार को समझ आया कि किसान से बड़ा कोई नहीं: प्रियंका

कृषि क़ानून वापस लेने के केंद्र सरकार के फ़ैसले पर कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीयत पर भरोसा करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तव में किसानों के लिए गंभीर है तो उसे केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा को बर्खास्त करना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में किसानों के हालात बेहद ख़राब हैं। 

प्रियंका ने शुक्रवार को कहा, “600 से अधिक किसानों की शहादत, 350 से अधिक दिन का संघर्ष, मोदी जी आपके मंत्री के बेटे ने किसानों को कुचल कर मार डाला, तब आपको कोई परवाह नहीं थी।” 

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि बीजेपी के नेताओं ने किसानों का अपमान करते हुए उन्हें आतंकवादी, देशद्रोही, गुंडे, उपद्रवी कहा लेकिन तब प्रधानमंत्री चुप रहे। 

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लेकिन अब चुनाव में हार दिखने लगी तो आपको अचानक इस देश की सच्चाई समझ में आने लगी कि यह देश किसानों ने बनाया है, यह देश किसानों का है। कांग्रेस नेता ने कहा कि किसान की सदैव जय होगी।  
Priyanka gandhi on farm laws repealed - Satya Hindi

किसान महापंचायतों ने बदला माहौल 

कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ हुई किसान महापंचायतों के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सियासी माहौल तेज़ी से बदला। राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के किसानों के समर्थन में खुलकर उतरने के बाद कांग्रेस ने भी किसान महापंचायतें की थी। 

प्रियंका ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ‘जय जवान जय किसान’ अभियान चलाया था। यह अभियान 10 दिन तक 27 जिलों में चला था। तब प्रियंका ने किसानों से कहा था, “ये आपकी ज़मीन का आंदोलन है, आप पीछे मत हटिये। हम आपके साथ खड़े हैं, जब तक ये क़ानून वापस नहीं होते तब तक डटे रहिये।”  

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सियासी नुक़सान का था डर 

निश्चित रूप से कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ जिस तरह का माहौल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बन गया था, उससे इस इलाक़े में और उत्तराखंड में बीजेपी को बड़ा सियासी नुक़सान होना तय माना जा रहा था। ऐसे में मोदी सरकार ने अपने क़दम वापस लेना ही बेहतर समझा। 

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सभी राजनीतिक दलों विशेषकर कांग्रेस ने किसानों की आवाज़ को पुरजोर तरीक़े से उठाया। राहुल गांधी ने कई बार कहा कि ये तीनों कृषि क़ानून दो-तीन उद्योगपतियों के फ़ायदे के लिए लाए गए हैं और सरकार को ये क़ानून वापस लेने ही पड़ेंगे। लखीमपुर खीरी की घटना के मामले में भी राहुल और प्रियंका पीड़ित परिवारों से मिले थे और उन्होंने इसे जोर-शोर से उठाया था। 
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