loader

कलेक्टर, दो एसपी से ‘गुहार’ काम न आयी, मप्र के पत्रकार की सरेआम हत्या  

उत्तर प्रदेश के झांसी के ज़िला मजिस्ट्रेट, पुलिस सुपरिटेंडेट और मध्य प्रदेश के निवाड़ी के पुलिस सुपरिटेंडेंट से जान बचाने की एक पत्रकार की ‘गुहार’ काम नहीं आयी। बुधवार देर शाम दबंगों ने पत्रकार को बेहद निर्मम तरीके से मौत के घाट उतार दिया। निवाड़ी पुलिस ने 7 लोगों के ख़िलाफ़ हत्या समेत अन्य धाराओं में मुक़दमा कायम किया है।

पूर्व नियोजित हमला

यह वारदात बुधवार शाम निवाड़ी जिला मुख्यालय से क़रीब 22 किलोमीटर दूर करगवाँ और पुतरी खेड़ा गाँव के बीच  हुई। सुनील तिवारी नामक पत्रकार निवाड़ी से पुतरी खेड़ा लौट रहा था। गाँव पहुँचने के ठीक पहले घात लगाये बैठे कुछ लोगों ने उस पर हमला बोल दिया।

मध्य प्रदेश से और खबरें
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार घात लगाये बैठे आधा दर्जन से ज्यादा लोगों ने सुनील पर डंडे, लाठियों और धारदार हथियारों से हमला बोला। सुनील को संभलने का मौका नहीं मिला। 

बताया गया है हमलवार सुनील तिवारी को तब तक पीटते रहे जब तक की वह बेसुध नहीं हो गया। पीटने और हमला बोलने के बाद वे लोग फ़रार हो गये। ग्रामीणों की सूचना पर मौके पर पहुँची पुलिस गंभीर हालत में लेकर सुनील को झाँसी पहुँची। अस्पताल ने देखने के बाद सुनील को मृत घोषित कर दिया।

हत्या की आशंका जताई थी 

सुनील तिवारी ने करीब दो महीने पहले सोशल मीडिया पर स्वयं का एक वीडियो वायरल किया था। करीब साढ़े तीन मिनट के इस वायरल वीडियो में सुनील झाँसी के कलेक्टर-एसपी और निवाड़ी एसपी से स्वयं की जान बचाने की गुहार करता नज़र आया था।

उस वीडियो में सुनील ने कहा था उसी के गाँव के रहने वाले अवधेष तिवारी उर्फ पप्पू, नरेन्द्र तिवारी उर्फ बबलू और अनिल तिवारी उर्फ राजू तथा इनके समर्थक उसके एवं उसके परिवार की जान के पीछे हाथ पड़े हैं। सभी का आपराधिक रिकॉर्ड है। मध्य प्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश और राजस्थान में इनकी ख़ासी पैठ है। नरेंद्र तिवारी ब्राह्मण सभा का राष्ट्रीय अध्यक्ष है।

क्या कहा था सुनील ने?

सुनील ने अपने वायरल वीडियो में दावा किया था, ‘इन लोगों की काली करतूतें उजागर करने के कारण ये लोग उसके तथा परिवार के पीछे पड़े हैं। झूठे मुकदमे में फँसाने का प्रयास ये लोग कर रहे हैं। जान से मारने की धमकियाँ बार-बार दे रहे हैं।

सुनील ने वायरल वीडियो में यह भी कहा था, ‘यदि उसके साथ कोई अनहोनी हो जाती है तो ये और इनके समर्थक ही जिम्मेदार होंगे।’ वायरल वीडियो में सुनील स्वयं की जान बचाने की गुहार भी कई बार झाँसी और निवाड़ी के अफसरों से करता है।

पिछले साल ही मीडिया से जुड़ा था सुनील ‘सत्य हिन्दी’ को छानबीन में मालूम हुआ है कि सुनील तिवारी पिछले साल ही मीडिया से जुड़ा था। ‘नवदुनिया’ ग्वालियर संस्करण से वह जुड़ा था। उसके पास समाचार पत्र की एजेंसी भी थी। कोरोना संक्रमण की वजह से मार्च महीने से लगे लाॅकडाउन के पहले तक वह समाचार पत्र को अपनी सेवाएं देता रहा था। 

सुनील संपन्न परिवार से था। निवाड़ी में उसने टीवीएस मोटर साईकिल एजेंसी ले रखी थी। झाँसी में उसका एक घर है। जबकि निवाड़ी ज़िले पुतरी खेड़ा गाँव में उसकी पुश्तैनी जमीन और खेती-बाड़ी है। सुनील के परिवार में माता-पिता के अलावा पत्नी और दो बच्चे हैं।

निवाड़ी ज़िले के स्थानीय पत्रकार ब्रजेश तिवारी का कहना है, ‘सुनील अच्छे इंसान थे। वे श्रमजीवी पत्रकार संघ से काफी वक्त से जुड़े रहे।’
बकौल ब्रजेश, सुनील की हमलावरों से पुरानी अदावत थी। जिसे लेकर वह चिंतित रहा करते थे। पुलिस को कई बार शिकायतें भी कीं। ज़मीन को लेकर भी हमलावरों से सुनील का झंझट चल रहा था। पुलिस वक़्त रहते चेत जाती तो सुनील की जान नहीं जाती।

पुलिस ने दर्ज किया मामला 

निवाड़ी पुलिस ने सात लोगों के खिलाफ सुनील की हत्या का मामला दर्ज किया है। फिलहाल निवाड़ी पुलिस झांसी में है। सुनील के शव का पोस्टमार्टम हो रहा है।

निवाडी की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रतिभा त्रिपाठी का कहना है, ‘प्रथम दृष्टया हत्या की वजह ज़मीन के पुराने विवाद के तौर पर सामने आयी है। पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद ही पूरी तरह से कारण साफ हो पायेंगे।’ एक सवाल के जवाब में त्रिपाठी ने मीडिया से कहा, ‘सुनील के वायरल हुए वीडियो को पुलिस ने संज्ञान में लिया था। जो नाम उन्होंने वीडियो में लिये थे, उनकी निगरानी की गई थी। सभी के नाम गुंडालिस्ट में जोड़े भी गये थे।’

सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
क़मर वहीद नक़वी

अपनी राय बतायें

मध्य प्रदेश से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें