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‘अल्टीमेटम’ के बाद भी बाज़ नहीं आ रहीं साध्वी प्रज्ञा ठाकुर!

मालेगांव बम धमाकों की आरोपी और बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर अल्टीमेटम के बावजूद पार्टी को ‘संकट’ में डालने वाले बयानों से बाज़ नहीं आ रही हैं। बीजेपी नेताओं की स्वाभाविक मौतों को विपक्ष की ‘मारक शक्ति’ का नतीजा बताकर पार्टी की किरकिरी कराने वाली साध्वी ने एक बार फिर राम मंदिर को लेकर ऐसा बयान दिया है, जो पार्टी लाइन से ‘उलट’ है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने ‘मारक शक्ति’ वाले बयान पर खिंचाई करते हुए उन्हें नसीहत दी थी कि वह ग़ैर-जिम्मेदाराना बयानबाज़ी से बाज़ आयें।

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प्रज्ञा सिंह भोपाल से लोकसभा की सदस्य हैं। उन्होंने शुक्रवार को भोपाल में आयोजित रामकथा के एक कार्यक्रम में कहा, ‘अब सभी को विश्वास हो गया होगा कि भारत देश अखंड है। देश में अनुच्छेद 370 हटा दिया गया है। अब भव्य राम मंदिर भी बनेगा और हम सब उसके साक्षी बनेंगे।’

राम मंदिर का मुद्दा फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। लंबे समय से बीजेपी इस मुद्दे पर ‘सीधी बात’ (मंदिर कब बनेगा? के सवाल पर बात) करने से बचती है। पार्टी के सयाने रणनीतिकारों का सधा-सधाया जवाब यही होता है - ‘कोर्ट के निर्णय का इंतजार कीजिये। फ़ैसला आने पर यह मसला ख़ुद ही हल हो जायेगा।’ सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर तेज गति से सुनवाई कर रहा है। ऐसी स्थितियों में साध्वी के बयान ने पार्टी में फिर ‘हलचल’ पैदा की है।

बता दें कि, साध्वी प्रज्ञा सिंह ने बीते सोमवार को कहा था, 'एक महाराज जी ने मुझसे कहा कि आप अपनी साधना को कम मत करना, साधना का समय बढ़ाते रहना क्योंकि यह बहुत बुरा समय है और विपक्ष भारतीय जनता पार्टी पर ‘मारक शक्ति’ का प्रयोग कर रहा है और हमें नुक़सान पहुँचा रहा है। महाराज जी ने कहा, यह बीजेपी के कर्मठ, योग्य नेताओं को हानि पहुँचा सकता है। आप टारगेट पर हैं, इसलिए सावधान रहें। उस समय मैं इस बात को भूल गयी लेकिन आज जब मैं देखती हूँ कि बाबूलाल गौर, सुषमा जी, जेटली जी चले गए तो मेरे मन में यह सवाल आया कि कहीं उनकी बात सच तो नहीं।’

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उन्होंने यह भी दावा किया था कि लोकसभा चुनाव के दौरान विरोधियों ने उनके ख़िलाफ़ भी इस तरह की ‘मारक शक्ति’ का प्रयोग किया था लेकिन जप-तप और आध्यात्मिक बल के चलते, कांग्रेस की मारक शक्ति उनके ख़िलाफ़ कारगर सिद्ध नहीं हो पायी थी।
बता दें कि मार्च 2019 में मनोहर पर्रिकर का निधन हुआ था। उनके बाद अगस्त महीने में सुषमा स्वराज, फिर बाबूलाल गौर और अरूण जेटली का देहावसान हो गया। इन सभी नेताओं की मौतें स्वास्थ्य कारणों से हुईं। बावजूद इसके प्रज्ञा सिंह द्वारा इन मौतों को विपक्ष की कथित ‘मारक शक्ति’ से जोड़ दिये जाने पर बवाल मचा हुआ है। कांग्रेस इस पर जमकर बिफरी है। बीजेपी ने भद्द पिटती देख ख़ुद को साध्वी प्रज्ञा सिंह के बयान से अलग कर लिया है।
बीजेपी के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार ‘मारक शक्ति’ वाले बयान पर प्रज्ञा सिंह से पार्टी ने ना केवल जवाब माँगा, बल्कि उन्हें फटकार भी लगाई। बताते हैं कि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने तो उन्हें दो टूक चेतावनी भी दी कि आगे से इस तरह के विवाद पैदा करने वाले बयानों को देने से बचें। यदि पुन: ऐसे बयान दिये तो एक्शन की ताकीद भी सिंह ने उन्हें दी। राकेश सिंह जैसी नसीहत दिल्ली हाईकमान ने भी प्रज्ञा सिंह को दी है। 
हैरतअंगेज तथ्य यह है कि आला नेताओं की फटकार और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह की नसीहत के कुछ ही घंटों बाद प्रज्ञा सिंह ने राम मंदिर को लेकर बयान दे दिया।
सूत्रों ने बताया कि साध्वी के राममंदिर के बयान को पार्टी ने गंभीरता से लिया है। संकेत हैं कि पार्टी उनके ख़िलाफ़ कोई सख़्त एक्शन ले सकती है। यह एक्शन क्या होगा? बहुत जल्दी सामने आ सकता है। बहरहाल, यह पहला मौक़ा नहीं है जब साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने राममंदिर जैसे संवेदनशील मसले को लेकर बयान दिया है। लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी उम्मीदवार की हैसियत से प्रचार करते हुए उन्होंने कहा था कि बाबरी ढांचा ढहाने में उनकी भी अहम भूमिका रही थी।
साध्वी प्रज्ञा सिंह ने होटल ताज पर आतंकी हमले में शहीद हुए मुंबई के जांबाज पुलिस अफ़सर हेमंत करकरे को लेकर भी विवादास्पद बयान दिया था। यह बयान भी लोकसभा चुनाव के दरमियान आया था। करकरे वाले बयान पर प्रज्ञा सिंह की जमकर थू-थू हुई थी और बीजेपी को भी आड़े हाथों लिया गया था।
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चुनाव आयोग ने करकरे और बाबरी विध्वंस वाले बयान पर साध्वी प्रज्ञा सिंह को नोटिस भी दिया था। जवाब-तलब के बाद चुनाव आयोग ने प्रज्ञा सिंह के चुनाव प्रचार पर 72 घंटों की रोक भी लगाई थी। तमाम विवादास्पद बयानबाजी और इस पर हुई राजनीतिक एवं प्रशासनिक उठापटक के बावजूद, साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कांग्रेस उम्मीदवार दिग्विजय सिंह से भोपाल सीट को साढ़े तीन लाख से ज़्यादा वोटों से जीत लिया था।

नौ सितंबर को होगी सुनवाई

साध्वी प्रज्ञा सिंह के निर्वाचन के ख़िलाफ़ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। मध्य प्रदेश के एक वरिष्ठ पत्रकार ने यह याचिका लगाई है। साध्वी का निर्वाचन अवैध घोषित करने की प्रार्थना याचिका में की गई है। डेढ़ सौ पेज की याचिका में ऑडियो-वीडियो प्रमाण दिये गये हैं। याचिकाकर्ता का दावा है कि साध्वी ने धर्म और भावनाएँ भड़काने वाले कृत्य किये हैं। आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने के आरोप भी प्रज्ञा सिंह पर लगाए गए हैं। इस याचिका पर सुनवाई नौ सितंबर को होनी है।

मोदी ने कहा था, माफ़ नहीं करुंगा

लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान प्रज्ञा सिंह ने अपने प्रचार में महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बता दिया था। उनके इस बयान पर खूब हंगामा हुआ था। पार्टी ने खुद को साध्वी के बयान से अलग भी कर लिया था। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि प्रज्ञा का बयान घृणा के लायक है और वह इसके लिए उन्हें कभी माफ़ नहीं कर पायेंगे। हालाँकि इसके कुछ समय बाद कुछ लोगों ने गोडसे की पुण्यतिथि का न केवल जश्न मनाया था बल्कि गांधी जी के पुतले को बनावटी गोलियों से ‘छलनी’ करने वाले बेहूदे वीडियो भी सोशल मीडिया पर अपलोड किए थे। इस पूरे कृत्य की ख़ूब भर्त्सना हुई थी।

बैटमार विधायक पर जताई थी नाराजगी

मध्य प्रदेश के बैटमार विधायक आकाश विजयवर्गीय के आचरण पर भी मोदी जमकर बरसे थे। इंदौर के विधायक आकाश विजयवर्गीय ने अतिक्रमण हटाने पहुंचे नगर निगम के अफ़सर की क्रिकेट बैट से पिटाई कर दी थी। इसका वीडियो देश भर के न्यूज़ चैनलों की हेडलाइन बना था। बाद में मोदी ने एक बैठक में कहा था, ‘ऐसा करने वालों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा देने में कोई गुरेज नहीं करना चाहिए।’ 
बता दें कि आकाश विजयवर्गीय मध्यप्रदेश बीजेपी की राजनीति का बड़ा नाम कैलाश विजयवर्गीय के बेटे हैं। कैलाश विजयवर्गीय के पास बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव पद की जिम्मेदारी है और वह अमित शाह के बेहद क़रीबियों में शुमार होते हैं। मोदी के कहने के बाद भी आकाश विजयवर्गीय पर कोई एक्शन नहीं होने पर यही कहा गया था कि अमित शाह ने आकाश को बख़्श दिया।
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संजीव श्रीवास्तव

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