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सुनील जोशी हत्याकांड की फ़ाइल खोलेगी कमलनाथ सरकार

महात्मा गाँधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को हाल ही में देशभक्त बताकर ‘महिमा मंडित’ करने वाली बीजेपी नेत्री और भोपाल लोकसभा सीट से पार्टी प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है, ‘हमारी सरकार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक सुनील जोशी हत्याकांड की फ़ाइल एक बार फिर खोलेगी।’ प्रज्ञा सिंह इस हत्याकांड में आरोपी रही हैं।
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बता दें कि संघ प्रचारक सुनील जोशी की मध्य प्रदेश के देवास के औद्योगिक क्षेत्र में 29 दिसंबर 2007 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड के आरोप में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को गिरफ़्तार किया गया था। प्रज्ञा सिंह तब देश भर में सुर्खियों में आयीं थी, जब उनका नाम 29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगाँव में हुए बम धमाकों में भी आया था। महाराष्ट्र पुलिस ने उन पर मकोका लगाया था। मालेगाँव बम ब्लास्ट मामले की जाँच एनआईए को सौंपी गई थी। सुनील जोशी हत्याकांड मामले में पर्याप्त सबूतों के अभाव में निचली अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था।
जोशी हत्याकांड के आरोपों से निचली अदालत से बरी किए जाने के बाद मामला अपील में नहीं ले जाया गया था। राज्य में बीजेपी की सरकार थी। माना गया था कि शिवराज सरकार जान-बूझकर अपील में नहीं गई।
भोपाल लोकसभा सीट के लिए हुए ज़बरदस्त मुक़ाबले के नतीजे आने से पहले मध्य प्रदेश के विधि मंत्री पी.सी. शर्मा ने कहा, ‘सरकार इस पूरे मामले की नये सिरे से समीक्षा करेगी। विधिवेत्ताओं से राय लेकर मामले की फ़ाइल पुन: खोली जायेगी और सरकार हाईकोर्ट में अपील भी करेगी।’
विधि मंत्री शर्मा की बात पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंगलवार को भोपाल में इस तर्क से मोहर लगाई कि, ‘हमारी काबीना के मंत्री ने जो कहा है (सुनील जोशी हत्याकांड की फ़ाइल खोलेंगे और हाईकोर्ट जायेंगे), सरकार उस पर अमल करेगी।’
मालेगाँव बम ब्लास्ट को लेकर मुंबई में एनआईए की विशेष अदालत में चल रहे मामले में साध्वी प्रज्ञा सिंह को बार-बार पेशी पर जाने से कोर्ट ने राहत दी है। निजी परेशानियों का हवाला देकर प्रज्ञा सिंह ने राहत के लिए याचिका लगाई थी। कोर्ट ने उनके अलावा मामले के दो अन्य आरोपियों को भी इसी तरह की राहत दी है। जबकि चार अन्य आरोपियों को हर सप्ताह कोर्ट में हाजिरी लगाने के निर्देश दिये गये हैं। बता दें कि मालेगाँव बम ब्लास्ट में छह लोग मारे गये थे, जबकि 100 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे।
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साध्वी प्रज्ञा सिंह ने भोपाल में वोटिंग के बाद अंतिम चरण के चुनाव प्रचार में पार्टी के एक प्रत्याशी के प्रचार के दरमियान मीडिया से बातचीत में कहा था, ‘गाँधी जी की हत्या करने वाले गोडसे सच्चे देशभक्त थे, देशभक्त हैं और देशभक्त रहेंगे।’ उनके इस बयान पर जबरदस्त बवाल हुआ। विरोधी दलों ने बीजेपी की जमकर बखिया उधेड़ी थी।

बीजेपी की नाराज़गी और कारण बताओ नोटिस के तुरंत बाद प्रज्ञा ने इस बयान के लिए माफ़ी माँग ली थी। बाद में वह प्रायश्चित के लिए ‘मौन साधना’ पर चली गईं थीं। उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रज्ञा के बयान पर गहरा अफसोस जताते हुए कहा था, ‘मैं मन से प्रज्ञा सिंह को कभी भी माफ़ नहीं कर पाऊँगा।’ हालाँकि उनकी भोपाल से उम्मीदवारी को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने उचित करार दिया था।

विवादित बयान देती रही हैं प्रज्ञा

भोपाल में लोकसभा चुनाव लड़ते हुए प्रज्ञा सिंह ने मुंबई के होटल ताज पर हुए हमले में शहीद हुए मुंबई के जांबाज पुलिस अफ़सर हेमंत करकरे और बाबरी मसजिद ढहाने को लेकर भी विवादित बयान था। पार्टी ने प्रज्ञा के बयानों से ख़ुद को अलग कर लिया था। बाद में दोनों ही बयानों पर उन्होंने माफ़ी माँगी थी। चुनाव आयोग ने साध्वी से जवाब-तलब किया था। उनके जवाब से असंतुष्ट होने पर आयोग ने साध्वी प्रज्ञा सिंह के चुनाव प्रचार को 72 घंटे के लिए बैन भी किया था।
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क़मर वहीद नक़वी

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