यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता से भारतीय समाज में व्याप्त धार्मिक, सांस्कृतिक और नस्लीय समस्याएँ ख़त्म होंगी या नहीं, यह बताना अभी मुश्किल है। लेकिन इतना ज़रूर है कि इस पर राजनीति शुरू होगी।
जब हिंदुओं के लिए ही एक सिविल कोड नहीं बन पाया है तो सभी समुदायों के लिए यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड की बात क्यों? आज़ादी की लड़ने वाले नेता भी इससे सहमत नहीं थे तो आरएसएस और बीजेपी क्यों करते रहे हैं इसकी माँग? देखिए शैलेश की रिपोर्ट में इनका जवाब।