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लक्षद्वीप: हाई कोर्ट ने केंद्र से पूछा- खाने की आदतों में क्यों चाहता है बदलाव?

केरल हाई कोर्ट ने मंगलवार को लक्षद्वीप के प्रशासन के दो विवादित आदेशों पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है। इसमें से एक डेयरी फ़ार्म्स को बंद करने और दूसरा लक्षद्वीप में स्कूली बच्चों के मिड डे मील से जुड़ा है। लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल कुमार पटेल के कुछ प्रस्तावों और फ़ैसलों के कारण यह इलाक़ा बीते कई दिनों से चर्चा में है। 

पटेल ने हाल ही में आदेश दिया था कि सरकार की ओर से चलाए जा रहे डेयरी फ़ार्म्स को बंद कर दिया जाए। इसके अलावा मिड डे मील में से मांस और चिकन को बाहर रखने का भी फरमान उन्होंने दिया था। लक्षद्वीप के ही रहने वाले अजमल अहमद ने इसके ख़िलाफ़ केरल हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। 

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याचिका में अहमद ने कहा था कि मिड डे मील से जुड़ा जो आदेश पटेल ने दिया है, वह ग़लत इरादे से दिया गया है और यह लक्षद्वीप के लोगों के खाने की आदतों को बदलने की कोशिश है। अहमद ने कहा था कि सरकार की ओर से चलाए जा रहे डेयरी फ़ार्म्स को बंद करने के पीछे मक़सद गुजरात के डेयरी उत्पादों को बढ़ावा देना है। प्रफुल पटेल गुजरात से ही आते हैं। 

इन दोनों फ़ैसलों पर रोक लगाते हुए केरल हाई कोर्ट ने यहां के प्रशासन को दो हफ़्ते के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। चीफ़ जस्टिस एस. मणिकुमार और जस्टिस शाजी पी. चाली की बेंच ने केंद्र सरकार से पूछा कि वह इस इलाक़े के लोगों के खाने की आदतों में क्यों बदलाव करना चाहता है। 

याचिका में कहा गया था कि लक्षद्वीप के प्रशासक को ऐसे किसी सुधार से दूरी बनाए रखनी चाहिए जो यहां की संस्कृति, विरासत लोगों के खाने की आदतों के ख़िलाफ़ हो और साथ ही भारत के संविधान की ओर से दिए गए अधिकार अनुच्छेद 19ए और 300ए की भी अवहेलना करता हो। 

कौन हैं प्रफुल पटेल?

जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे तो पटेल वहां गृह मंत्री थे। साफ है कि पटेल मोदी के क़रीबी लोगों में शामिल हैं। पटेल बीते साल दिसंबर में यहां प्रशासक बनकर आए थे और कुछ ही महीनों में उनके ख़िलाफ़ लोग सड़कों पर आ गए हैं। 

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कई विवादित फ़ैसले

पटेल के इन फ़ैसलों के अलावा लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण विनियमन 2021 के मसौदे का भी लक्षद्वीप में विरोध हो रहा है। यहां के लोग इस मसौदे को ज़मीन को हड़पने वाला बता रहे हैं। पटेल ने बीफ़ पर बैन लगाने का क़दम भी उठाया है। 

अपराध बेहद कम होने के बाद भी गुंडा एक्ट लगाने और ऐसे लोग जिनके दो से ज़्यादा बच्चे हैं, उन्हें पंचायत चुनाव में अयोग्य ठहराने जैसे उनके प्रस्तावों के कारण शांत माने जाने वाले इस द्वीप में घमासान मचा हुआ है। 

राजनीतिक दलों ने किया विरोध 

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने पटेल के प्रस्तावों का कड़ा विरोध किया है तो वाम दलों और कांग्रेस के सांसदों ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ख़त लिखकर इसमें दख़ल देने की मांग की है। 

कांग्रेस ने इसे लक्षद्वीप के सांस्कृतिक मामलों में घुसपैठ बताया है और कहा है कि पटेल यहां के सामाजिक ताने-बाने को बर्बाद कर रहे हैं। कांग्रेस सांसद हाईबी इडेन कहते हैं कि पटेल ने सीएए के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने वालों पर मुक़दमे लगा दिए और उन्हें देशद्रोही घोषित कर दिया।

आलोचनाओं को किया खारिज

इतनी सारी आलोचनाओं के बाद भी लक्षद्वीप प्रशासन पीछे नहीं हटा है और उसने कहा है कि ऐसे क़दम लक्षद्वीप के भविष्य की आधारशिला रख रहे हैं और अगले दो दशक में इसे मालदीव जैसा बनाया जाएगा। 

लक्षद्वीप के डीएम एस. एस्केर अली ने कहा है कि कुछ लोग अपने फ़ायदे के लिए और ऐसे लोग जो अवैध व्यापार में शामिल हैं, वे प्रफुल पटेल के ख़िलाफ़ एजेंडा चला रहे हैं। 

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