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असम: गायक ज़ुबीन बने सरकार के ब्रांड एंबेसडर, सीएए-विरोधी आंदोलन से धोखा?

सोशल मीडिया पर अधिकतर लोग कह रहे हैं कि ज़ुबीन सीएए के ख़िलाफ़ आंदोलन के दौरान 5 निर्दोष लोगों के बलिदान को भूल गए हैं और आंदोलन के समय दिये गए अपने वक्तव्यों की भी उन्हें परवाह नहीं है। 

दिनकर कुमार
असम में नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएए) के ख़िलाफ़ आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले राज्य के सर्वाधिक लोकप्रिय गायक ज़ुबीन गर्ग ने असम सरकार के कृषि विभाग का ब्रांड एंबेसडर बनना स्वीकार कर लिया है। इस बात पर राज्य में ज़बरदस्त प्रतिक्रिया हुई है। लोगों को लगता है कि गायक ने बीजेपी सरकार का पक्ष लेने की मंशा से ऐसा किया है और इससे सीएए- विरोधी आंदोलन को नुक़सान हो सकता है। 

सोशल मीडिया पर जब जुबीन की तीखी आलोचना शुरू हुई तो इससे विचलित होकर जुबीन की पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग ने फेसबुक पर लिखा--'किसी को कुछ कहने सुनने की ज़रूरत नहीं। जुबीन गर्ग नामक देशद्रोही को सड़क पर फाँसी दे दीजिये।'

क्या है मामला?

नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के ख़िलाफ़ काफी मुखर रहने वाले जुबीन शनिवार को राज्य के कृषि मंत्री अतुल बोरा के दिसपुर स्थित सरकारी निवास पर मिलने गए और बीजेपी सरकार के नारे 'जाति (समुदाय) और माटी (भूमि)' को दोहराते देखे गए।
ऐसे समय में जब राज्य के लोग और संगठन नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के ख़िलाफ़ कोविड -19 महामारी के बीच अपने आंदोलन को तेज़ करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और राज्य के सर्वाधिक लोकप्रिय गायक से सहभागिता की उम्मीद कर रहे हैं, वैसे समय में ज़ुबीन गर्ग को अपने एक शानदार प्रोजेक्ट 'वृंदावन सुपर मार्ट' को पूरा करने के लिए एक के बाद एक मंत्रियों से मिलते हुए देखा गया है।  

सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि ज़ुबीन सीएए के ख़िलाफ़ आंदोलन के दौरान 5 निर्दोष लोगों के बलिदान को भूल गए हैं और आंदोलन के समय दिये गए अपने वक्तव्यों की भी उन्हें परवाह नहीं है।

ऐसा पहले भी कर चुके हैं

2016 के विधानसभा चुनाव के दौरान जुबीन ने सर्बानंद सोनोवाल के समर्थन में एक गीत गाया था। उस गीत पर पछतावा व्यक्त करते हुए जुबीन ने पिछले साल सीएए विरोधी आंदोलन के दौरान उस गीत के एवज में मिले पैसे सोनोवाल को लौटाने का ऐलान किया था।
उन्होंने आंदोलन को बढ़ावा देने के लिए विशेष रूप से रचे गए गीत 'पोलटिक्स नकरिबा बंधु' (राजनीति मत करो मित्र) जनसभाओं में गाना शुरू कर दिया था। 

सुपर मार्ट की परियोजना

कृषि मंत्री से मिलने से पहले ज़ुबीन ने मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल से भी मुलाक़ात की और अपनी परियोजना वृन्दावन सुपर मार्ट पर चर्चा की। जुबीन के आलोचक आरोप लगा रहे हैं कि अपनी परियोजना बृंदावन सुपर मार्ट के पक्ष में सरकारी समर्थन हासिल करने के लिए ज़ुबीन ने राज्य के कृषि मंत्री अतुल मोरा से मुलाक़ात की।
विरोधी कह रहे हैं कि ज़ुबीन सीएए-विरोधी आंदोलन में अपनी भागीदारी की बात भूल गए और बीजेपी के जाति (समुदाय) और माटी (भूमि) के नारे का समर्थन किया।
इसके पुरस्कार के रूप में राज्य सरकार ने गायक जुबीन गर्ग को कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए ब्रांड एंबेसडर बनाने का प्रस्ताव रखा। मंत्री बोरा ने कहा, ‘मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के साथ चर्चा करने के बाद हमने जुबीन गर्ग को कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए ब्रांड एंबेसडर बनने का प्रस्ताव दिया है।’ 

क्या कहना है सरकार का?

मंत्री ने आगे कहा, ‘राज्य की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए, विशेष रूप से कोरोना महामारी के बाद, असम को कृषि उत्पादन और सभी क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा, 

'मानना ​​है कि जुबीन जैसे व्यक्तित्व की भागीदारी कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में ध्यान केंद्रित करने के लिए हजारों लोगों को प्रेरित करेगी। हम खुश हैं कि ज़ुबीन इस बात के लिए सहमत हो गए हैं।’


अतुल मोरा, कृषि मंत्री, असम

ज़ुबीन का तर्क

बोरा के प्रस्ताव पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जुबीन ने कहा, ‘मैं खुश हूं और विश्वास करता हूँ कि राज्य सरकार द्वारा मुझे दिया गया प्रस्ताव काम करने और लक्ष्य हासिल करने का मार्ग खोलेगा। मैं सरकार की विभिन्न योजनाओं की संभावनाओं का पता लगाने के लिए आया हूँ। हम अपने साथ पूरे समुदाय (जाति) को साथ लेकर बड़ी योजना बना रहे हैं। माटी (भूमि) के बिना जाति (समुदाय) कभी नहीं टिकेगी। केवल माटी ही हमारी रक्षा करेगी।’

जुबीन ने आगे कहा, ‘कोविड -19 महामारी का अनुभव करने के बाद राज्य के युवा अपने अस्तित्व बचाने के लिए कमर कस रहे हैं। यह एक सकारात्मक संकेत है। कोविड -19 महामारी ने हमें एक सकारात्मक विचार दिया है। चूंकि योजना बड़ी है, इसमें समय लगेगा। हम कदम दर कदम प्रगति हासिल करेंगे। मुझे इस योजना वृंदावन सुपर मार्ट में सफलता प्राप्त करने के लिए राज्य के सभी युवाओं से सहयोग की आवश्यकता है।’ 
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दिनकर कुमार

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