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अब हरियाणा कांग्रेस में उठी ‘चिंगारी’, हुड्डा को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की मांग

कांग्रेस आलाकमान के नसीब में शायद इन दिनों दुख ही दुख लिखा हुआ है। आलाकमान जब तक एक राज्य का झगड़ा सुलझाने के क़रीब पहुंचता है, कई दूसरे राज्यों में झगड़े शुरू हो जाते हैं और राज्यों में झगड़े न हों तो G-23 गुट का कोई न कोई नेता ऐसा बयान दे देता है जिससे आलाकमान का ब्लड प्रेशर लाज़िमी रूप से बढ़ जाता होगा। 

पंजाब-राजस्थान का झगड़ा 

पंजाब में सिद्धू-बनाम अमरिंदर की जंग ने आलाकमान का जीना मुहाल किया हुआ है, राजस्थान में पायलट-गहलोत गुट आमने-सामने हैं, केरल कांग्रेस में वीडी सतीशन को नेता विपक्ष बनाए जाने से वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला और ओमन चांडी नाराज़ हैं तो अब हरियाणा में सिर-फुटव्वल शुरू होने के आसार नज़र आ रहे हैं। 

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प्रभारी से मिले विधायक 

हुआ यूं है कि हरियाणा कांग्रेस के 19 विधायकों ने पार्टी के प्रभारी विवेक बंसल से मुलाक़ात की है। बताया जाता है कि इन्होंने प्रदेश में मज़बूत नेतृत्व की ज़रूरत बताते हुए हुड्डा को प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाने की मांग की है। ये सभी विधायक पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के ख़ास हैं। 

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक़, इन विधायकों में से कुछ ने प्रदेश प्रभारी से कहा कि अगर कांग्रेस फिर से हरियाणा की सत्ता में आना चाहती है तो इसके लिए हमें यहां एक मज़बूत नेता की ज़रूरत है। 

हालांकि विवेक बंसल ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा कि पार्टी में गुटबाज़ी की बातें महज अफ़वाह हैं और किसी भी विधायक ने प्रदेश अध्यक्ष को बदलने की मांग नहीं उठाई है। इन दिनों प्रदेश संगठन की कमान पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद कुमारी शैलजा के पास है। 

इस दौरान इन विधायकों ने पिछले 8 सालों में कांग्रेस की जिला इकाइयों का गठन न होने का मुद्दा भी उठाया। इसके बाद ये विधायक हुड्डा के बेटे और राज्यसभा सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा के घर पहुंचे, जहां दीपेंद्र ने इन्हें लंच कराया। 

Haryana congress crisis MLA met to vivek bansal - Satya Hindi
कार्यकर्ताओं संग प्रदर्शन करतीं कुमारी शैलजा।

मज़बूत नेता हैं हुड्डा 

यहां इस बात का ज़िक्र करना ज़रूरी होगा कि हरियाणा कांग्रेस में हुड्डा सबसे ताक़तवर नेता हैं। 2019 के विधानसभा चुनाव से पहले हुड्डा ने प्रदेश कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष अशोक तंवर के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया था। कहा जाता है कि राहुल गांधी के क़रीबी नेताओं में शुमार रहे तंवर को पार्टी को हुड्डा के ही दबाव में अध्यक्ष पद से हटाना पड़ा था और इसके बाद तंवर ने भी कांग्रेस को अलविदा कह दिया था। तंवर की जगह पर कुमारी शैलजा को अध्यक्ष बनाया गया था। 

हुड्डा ने विधानसभा चुनाव में अपनी ताक़त दिखाई थी और तब कांग्रेस को 31 सीटों पर जीत मिली थी और इनमें अधिकतर विधायक हुड्डा के समर्थक थे। बड़ी बात यह थी कि हुड्डा ने बीजेपी को अकेले दम पर सरकार बनाने से रोक दिया था और उसे जेजेपी के साथ मिलकर सरकार बनानी पड़ी थी।

एक बड़ी बात और थी कि नवंबर, 2019 में हुए विधानसभा चुनाव से छह महीने पहले यानी मई, 2019 में जो लोकसभा के चुनाव हुए थे, वहां कांग्रेस को राज्य की सभी 10 सीटों पर हार मिली थी और छह महीने में ही पार्टी ने बेहतर प्रदर्शन कर दिखाया था तो इसका श्रेय हुड्डा को गया था। 

हुड्डा दस साल तक हरियाणा के मुख्यमंत्री रहने के साथ ही वर्तमान में विधायक दल के नेता भी हैं। 

‘हुड्डा हैं हमारे नेता’

प्रदेश प्रभारी से मिलने गए विधायकों में से एक  कुलदीप वत्स ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा कि हमने अपनी ‘भावनाएं’ उन तक पहुंचा दी हैं। अगले हफ़्ते हम संगठन (महासचिव) केसी वेणुगोपाल से मिलेंगे और उसके बाद सोनिया और राहुल गांधी से भी। उन्होंने कहा कि प्रदेश प्रभारी से मिलने पहुंचे सभी विधायकों के नेता हुड्डा ही हैं। इससे साफ है कि ये विधायक क्या चाहते हैं। 

कुलदीप वत्स ने यह भी कहा कि जिला और ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति का मुद्दा भी पार्टी हाईकमान की ओर से देखा जाना है। दूसरी ओर, कुमारी शैलजा के समर्थकों ने हुड्डा कैंप पर आरोप मढ़ा है कि वे जिला और ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति में रोड़े अटका रहे हैं। 

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बदल चुके हैं हालात

किसान आंदोलन के बाद हरियाणा में हालात तेज़ी से बदले हैं। बीजेपी-जेजेपी के विधायकों, मंत्रियों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। इंडियन नेशनल लोकदल की हालत पतली है और उसे बीते विधानसभा चुनाव में सिर्फ़ 1 सीट मिली थी। ऐसे में कांग्रेस के लिए अच्छी संभावनाएं बनती हैं। 

किसान आंदोलन के कारण जेजेपी पर दबाव बढ़ा है और लोकदल को इसमें ख़ुद के लिए उम्मीद की किरण दिखाई देती है। लोकदल के लिए सुकून की बात यह भी है कि पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला सजा काटकर बाहर आ चुके हैं। 

हालांकि अभी विधानसभा चुनाव होने में सवा तीन साल का वक़्त बचा है लेकिन बीजेपी-जेजेपी की सरकार कितना आगे चल पाएगी कहना मुश्किल है क्योंकि इन दोनों दलों के कई विधायकों में किसान आंदोलन को लेकर केंद्र व खट्टर सरकार के रूख़ के प्रति नाराज़गी है।

गुटबाज़ी से पाना होगा पार

कांग्रेस आलाकमान के लिए हरियाणा में भी चुनौती कम नहीं है क्योंकि अशोक तंवर के जाने के बाद भी यहां तमाम बड़े नेताओं के अपने-अपने गुट हैं। हरियाणा में कांग्रेस विधायक दल की नेता रहीं किरण चौधरी, कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला, भूपेंद्र हुड्डा और कुमारी शैलजा के गुटों में बंटी हुई है। इन सभी में हुड्डा की पूरे राज्य में अच्छी पकड़ है। 

कांग्रेस विधायकों ने कहा है कि वे अपनी बातों को आलाकमान के सामने रखेंगे। देखना होगा कि आलाकमान इस नई संभावित मुसीबत से कैसे निपटता है। 

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