कई राज्यों को बारिश के कहर का सामना करना पड़ रहा है। तमिलनाडु के बाद आंध्र प्रदेश पर बारिश की मार पड़ी है। उत्तराखंड में भी बारिश के कारण काफी नुकसान हो चुका है।
कृषि क़ानूनों को वापस लेने से क्या नरेंद्र मोदी की छवि पहले से बेहतर हुई है या उनकी छवि को चोट पहुँची है? ऐसा क्यों लगता है कि उनके समर्थक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मनमर्जी की कार्यशैली की वजह से ही कृषि क़ानूनों को अंत में रद्द करना पड़ा, रद्द करने के तरीके से भी उनकी यह कार्यशैली ही उजागर होती है।
एक साल के लगातार संघर्ष के बाद भी किसान थके नहीं थे। किसान नेता लगातार कहते थे कि अगर पांच साल तक भी किसान आंदोलन चला तो वे इसे चलाएंगे। उन्होंने हाल ही में संसद मार्च का भी आह्वान किया था।
तीन कृषि क़ानूनों को वापस लिए जाने की प्रधानमंत्री मोदी की घोषणा पर अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त कृषि पैनल के सदस्य अनिल घनवत ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने क्यों कहा कि प्रधानमंत्री सिर्फ़ चुनाव में जीत चाहते हैं?
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा तीनों कृषि क़ानूनों पर ताज़ा घोषणा के बाद भी आख़िर कृषि आंदोलन तुरंत क्यों नहीं ख़त्म होगा? जानिए, किसान नेता राकेश टिकैत ने क्या कहा।
कृषि क़ानून वापस लेने के केंद्र सरकार के फ़ैसले को विपक्षी दलों ने किसानों की जीत बताया है। किसान आंदोलन के कारण मोदी सरकार और बीजेपी को लगातार विरोध का सामना करना पड़ रहा था।