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मप्र में औंधे मुँह गिरी कांग्रेस, दिग्गी, सिंधिया भी हारे

मध्य प्रदेश में भी लोकसभा चुनाव 2019 के चुनाव नतीजे एग्ज़िट पोल के अनुसार रहे। प्रदेश की कुल 29 में से 28 सीटों पर कांग्रेस हार गई। लगातार तीस सालों से हार रही भोपाल सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी और वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह (समर्थक उन्हें राजा साहब कहते हैं) भगवा बिग्रेड की फ़ायर ब्रांड लीडर साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर से बुरी तरह हार गये। राज्य में सबसे चौंकाने वाली और बेहद करारी हार गुना में ज्योतिरादित्य सिंधिया की हुई। वह अपने एक पुराने चेले और बीजेपी के उम्मीदवार डॉ. के.पी.यादव से एक लाख से ज़्यादा वोटों से चुनाव हार गये।

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मध्य प्रदेश में चुनावी रूझान आने के साथ ही बीजेपी ने बढ़त बनानी शुरू कर दी थी। एक-दो अवसरों को छोड़कर बीजेपी लगातार बढ़त बनाती रही। मतगणना के दौरान पूर्वान्ह से देर शाम तक सभी 29 सीटों में अधिकांशत: 27-2 और 28-1 के अंतर से बीजेपी की बढ़त के हालात बने रहे।

आरंभिक रूझान में कुछ समय तक 18-11 (बीजेपी 18 और कांग्रेस 11) की स्थिति हुई। जब यह नंबर न्यूज चैनलों के स्क्रीन पर डिसप्ले हुए तो मायूस कांग्रेसियों के चेहरे खिल उठे लेकिन उनकी ख़ुशी कुछ देर ही टिक पायी। दरअसल, कुछ ही देर में आंकड़े पुन: बदल गये। इनके बदलने के बाद कांग्रेसियों को फिर से ख़ुश होने का मौक़ा नहीं मिला।

देश भर में भोपाल लोकसभा सीट सबसे हॉटेस्ट सीटों में से एक थी। राजनीति में दिलचस्पी रखने वाला हरेक शख़्स भोपाल के नतीजे जानने के लिए उत्सुक था। इस सीट को कांग्रेस ने आख़िरी बार 1984 में जीता था। इसके बाद 1989 से बीजेपी लगातार भोपाल सीट जीत रही थी। कांग्रेस ने इस बेहद मुश्किल सीट जीतने की ज़िम्मेदारी अपने वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के कंधों पर डाली थी।
बीजेपी ने सिंह से मुक़ाबले के लिए हिंदू कार्ड खेलते हुए साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को टिकट दिया था। मतगणना शुरू होते ही डाक पत्रों की ग़िनती से बीजेपी प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा ने बढ़त बनाई और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। चक्र दर चक्र वह आगे निकलती चली गईं।
भोपाल लोकसभा सीट में कुल आठ विधानसभा क्षेत्र आते हैं। सात क्षेत्र भोपाल ज़िले में हैं, जबकि सीहोर विधानसभा क्षेत्र सीहोर ज़िले में आता है। भोपाल के साथ सीहोर ज़िला मुख्यालय पर भी वोटों की ग़िनती हुई। सीहोर में काउंटिंग के दौरान जिला कांग्रेस अध्यक्ष रतन सिंह ठाकुर को हार्ट अटैक आ गया। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इधर, दोनों ही ज़िला मुख्यालयों पर वोटों की ग़िनती जैसे-जैसे आगे बढ़ी दिग्विजय सिंह के समर्थकों और कांग्रेस का चेहरा लटकता चला गया।

दिग्विजय सिंह सुबह अपनी पत्नी के साथ भोपाल सेन्ट्रल जेल मुख्यालय स्थित मतगणना स्थल पर पहुँच गये थे। घर से निकलने से पहले दिग्विजय सिंह ने मीडिया से कहा था, ‘एग्ज़िट पोल बोगस हैं। कांग्रेस राज्य में एक दर्जन से ज़्यादा सीटें जीतेगी।’ सिंह ने स्वयं की जीत का दावा भी किया था। लेकिन तसवीर साफ़ होने और लंबी हार मिलने की संभावना पर सिंह का सुर बदल गया था। उन्होंने कहा, ‘पूरी शिद्धत और ताक़त से कांग्रेस ने चुनाव लड़ा। जनता के फ़ैसले का सम्मान करता हूँ।’ 

उधर, महात्मा गाँधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को महिमा मंडित करने वालीं बीजेपी प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा दोपहर तक भोपाल के रिवेयरा टाउन स्थित अपने घर पर ही बनी रहीं। समर्थकों और रिश्तेदारों के साथ वह मतगणना की पल-पल की जानकारियाँ लेती रहीं। लंबी बढ़त बनाने के बाद सबसे पहले वह अपने दो मंजिला घर की बालकनी में आयीं। बालकनी से ही मीडिया के हाथ जोड़े और वी (विक्टरी) की विजयी मुद्रा बनाकर अपनी ख़ुशी का इजहार किया। बाद में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर नीचे आयीं और मीडिया से मुख़ातिब होते हुए भोपाल की जनता का आभार जताया। इसके बाद वह अपने समर्थकों के साथ जीत का प्रमाण पत्र लेने के लिए सेन्ट्रल जेल मुख्यालय स्थित मतगणना स्थल के लिए रवाना हो गईं। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को 3,64,822 वोटों से जीत मिली है।
एग्ज़िट पोल के जो परिणाम आये थे उनके बाद से ही यह सवाल खड़ा हो रहा था कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस आख़िर अपनी कौन सी एकमात्र सीट बचा पायेगी?
बीजेपी ने 2014 के चुनाव में राज्य की कुल 29 में 27 सीटें जीतीं थी। कांग्रेस महज गुना और छिंदवाड़ा सीट ही जीत सकी थी। बीजेपी ने तभी से छिंदवाड़ा और गुना को निशाने पर ले लिया था। मध्य प्रदेश बीजेपी के रणनीतिकार और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह बार-बार दावा कर रहे थे कि अबकि बार मध्य प्रदेश की सभी 29 सीटें बीजेपी हासिल करेगी। ये दावे अपनी जगह हैं लेकिन एग्ज़िट पोल के नतीजों के बाद राजनीति में रूचि रखने वालों के मन में आशंका छिंदवाड़ा को लेकर बहुत ज़्यादा थीं। दरअसल, इस बार छिंदवाड़ा से कमलनाथ नहीं थे और उन्होंने विधानसभा उपचुनाव लड़ने की मजबूरी के चलते अपने बेटे नकुलनाथ को पहली बार चुनाव मैदान में उतारा था।
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चुनाव के नतीजे आये तो नकुलनाथ कशमकश भरे संघर्ष में छिंदवाड़ा सीट को जीतने में कामयाब हो गए। ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी पारंपरिक सीट गुना-शिवपुरी में डाक मतपत्रों की गणना से ऐसे पिछड़े कि फिर उबर ही नहीं पाये और अंत में बुरी तरह से सीट हार गये। संभवत: इस हार की कल्पना कांग्रेस और ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों ने सपने में भी नहीं की होगी।

‘महारानी’ भी घूमी थीं गली-गली

राजे-रजवाड़ों का दौर ख़त्म हुए लंबा वक़्त बीत चुका है, लेकिन ग्वालियर और गुना में आज भी जनता उस दौर को भुला नहीं पायी है। ज्योतिरादित्य सिंधिया स्वयं को भले ही जनता का सेवक बतायें, लेकिन उनका अंदाज ‘महाराजा’ वाला ही है। क्षेत्र की जनता उन्हें ‘महाराज’ संबोधन से पुकारती है।

ज्योतिरादित्य की पत्नी को महारानी साहब और बेटे आर्यमन को युवराज अथवा श्रीमंत जी। छोटा हो या बड़ा अथवा बुजुर्ग, क्षेत्र के बहुतेरे लोग इस परिवार के सदस्यों (आर्यमन तक के) पैर छूने में गुरेज नहीं करते। ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस आलाकमान ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ज़िम्मेदारी सौंपी थीं। प्रचार के लिए सिंधिया वहाँ भी काफ़ी सक्रिय रहे थे। उनके यूपी में सक्रिय रहने के दरमियान ज्योतिरादित्य के चुनाव प्रचार की कमान उनकी पत्नी ने अपने हाथों में ले रखी थी। उन्होंने ज्योतिरादित्य के लिए जमकर मेहनत की थी, लेकिन काम नहीं आयी। सिंधिया को 1,25,549 वोटों से हार मिली।

सिंधिया उतने के ही लगभग वोटों से चुनाव हारे जितने वोटों से उन्होंने मोदी की 2014 की आँधी में इस सीट को जीता था। ज्योतिरादित्य 2014 में 1.20 लाख से ज़्यादा वोटों से चुनाव जीते थे।

छिंदवाड़ा ने बचाई नाक 

मुख्यमंत्री कमलनाथ की पारंपरिक छिंदवाड़ा लोकसभा सीट ने कांग्रेस की इज्जत बचा ली। कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ ने इस सीट को कांटे के मुक़ाबले में 37,536 वोटों से जीतकर बचा लिया, वर्ना कांग्रेस का मध्य प्रदेश में खाता भी नहीं खुल पाता। उधर, कमलनाथ ने भी विधानसभा उपचुनाव के लिए छिंदवाड़ा सीट को 25,837 वोटों से जीत लिया। मुख्यमंत्री के नाते उनकी जीत उस तरह की नहीं रही जैसी कि कांग्रेसी उम्मीद पाले बैठे थे।
नकुलनाथ की जीत के साथ ही छिंदवाड़ा सीट पर एक अद्भुत संयोग यह भी बना कि इस सीट को उनके पिता कमलनाथ तो लगातार जीतते ही रहे। एक अवसर पर कमलनाथ की पत्नी अलका नाथ ने छिंदवाड़ा को जीता था और अब नकुलनाथ भी जीत दर्ज करने में सफल हुए। बता दें कि 1996 में हवाला कांड में नाम आने पर कमलनाथ का टिकट कटा था और तब उनकी पत्नी अलका नाथ को पार्टी ने टिकट दिया था।  
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संजीव श्रीवास्तव

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