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'छपाक' के प्रमोशन के लिए जेएनयू गई थीं दीपिका?

दीपिका पादुकोण की फ़िल्म ‘छपाक’ रिलीज़ हो गई। इसके दो दिन पहले अचानक शाम को यह ख़बर आई कि दीपिका पादुकोण जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के आंदोलनकारी छात्रों के बीच पहुँच गईं। इस ख़बर के साथ ही सोशल मीडिया पर घमासान मच गया। ट्विटर के बयानवीरों ने इसको दीपिका की हिम्मत के साथ जोड़कर उनकी शान में कशीदे पढ़ने शुरू कर दिए। कई लोग तो इतने जोश में आ गए कि उनकी इस बात के लिए तारीफ़ करनी शुरू कर दी कि इतनी बड़ी फ़िल्म को दाँव पर लगाकर आंदोलनकारी छात्रों के साथ खड़ी हो गई। ट्विटर पर जोशीले ट्वीट तूफ़ानी अंदाज़ में लिखे जाने लगे। सोशल मीडिया पर ही दूसरा पक्ष विरोध में उठ खड़ा हुआ और दीपिका के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय पहुँचने को उनकी फ़िल्म के प्रमोशन से जोड़ दिया। दोनों पक्षों में सोशल मीडिया पर भिड़ंत हो गई। ट्विटर पर ‘छपाक’ फ़िल्म के पक्ष और विपक्ष में बनाया गया हैशटैग ट्रेंड करने लगा। बॉलीवुड के भी अनुराग कश्यप जैसे सूरमाओं को यह लगा कि उनके विरोध को दीपिका के साथ आने से ताक़त मिली है। वे भी जोश में आ गए। लेकिन उनको यह नहीं समझ आया कि दीपिका पादुकोण का वहाँ पहुँचने के पीछे की वजह एक रिपोर्ट थी।

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दरअसल, एक कंपनी ऑरमैक्स, सिनेमैट्रिक्स रिपोर्ट जारी करती है जिसके आधार पर पहले दिन बॉक्स ऑफ़िस ओपनिंग (एफ़बीओ)  के बारे में अंदाज़ लगाया जाता है। ऑरमैक्स सिनेमैट्रिक्स निश्चित तारीख़ पर रिलीज़ होनेवाली फ़िल्मों के प्रमोशन कैंपेन को चार आधार पर ट्रैक करती है ताकि पहले दिन फ़िल्म की ओपनिंग का अंदाज़ लगाया जा सके। ये चार आधार होते हैं बज़ (चर्चा), रीच (पहुँच), अपील और इंटरेस्ट (रुचि)। यह एक रियल टाइम रिपोर्ट होती है जो किसी भी फ़िल्म के प्रमोशन कैंपेन को रोज़ाना ट्रैक करती है। इसको फ़र्स्ट डे बॉक्स ऑफ़िस मॉडल कहते हैं। इस रिपोर्ट के सब्सक्राइवर को इसके अलावा उनकी माँग के अनुरूप अन्य आँकड़े और जानकारियाँ भी दी जाती हैं। 

फ़िल्म जगत में इस रिपोर्ट पर बड़ी फ़िल्म निर्माता कंपनी काफ़ी भरोसा करती हैं। इसके आधार पर प्रमोशन कैंपेन को डिज़ाइन भी किया जाता है और उसमें बदलाव भी किया जाता है। इंडस्ट्री से जुड़े लोग इसको बख़ूबी जानते और समझते भी हैं। इस कंपनी की बेवसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक़ इस व्यवस्था को भरोसेमंद और व्यापक बनाने के लिए फ़िल्मों के 29 मार्केट से जानकारियाँ उठाई जाती हैं। उन जानकारियों और सूचनाओं के आधार पर उसका विश्लेषण किया जाता है और फिर सिनेमैट्रिक्स रिपोर्ट तैयार की जाती है।

इस रिपोर्ट में फ़िल्मों पर असर डालनेवाले बाहरी कारकों का भी ध्यान रखा जाता है। इसके प्रभाव को भी इसमें शामिल किया जाता है। बाहरी कारक यानी फ़िल्म रिलीज़ की तारीख़ के दिन या उसके आसपास पड़नेवाले त्योहार, छुट्टियाँ, क्रिकेट मैच, परीक्षाएँ या मौसम का भी ध्यान रखकर विश्लेषित किया जाता है और फिर रिपोर्ट तैयार की जाती है। ग़ौरतलब है कि फ़िल्म ‘धूम 3’ के लिए एफ़बीओ रिपोर्ट साढ़े बत्तीस करोड़ रुपए की ओपनिंग की थी जबकि वास्तविक ओपनिंग 30.9 करोड़ रुपये की रही जो कि पूर्वानुमान के बहुत क़रीब थी। फ़िल्म ‘आर..राजकुमार’ के लिए ओपनिंग का पूर्वानुमान 8.3 करोड़ रुपये का था जबकि वास्तविक ओपनिंग 8.8 करोड़ रुपए की हुई थी। कंपनी मानती है कि उसकी रिपोर्ट एकदम सटीक नहीं होती है और उसमें पाँच फ़ीसदी ऊपर नीचे की गुँज़ाइश होती है। बेवसाइट का दावा है कि फ़िल्म उद्योग के कई स्टूडियोज़ उनकी इस रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हैं।

अब शुरू होती है दीपिका के जेएनयू पहुँचने की असली कहानी। जिस दिन दीपिका शाम को जेएनयू पहुँचती हैं उस दिन यानी 7 जनवरी को दिन में यही रिपोर्ट आती है जिसमें वह ऊपर उल्लिखित चारों मापदंडों पर तीसरे स्थान पर आती हैं।

जबकि आज ही रिलीज़ होनेवाली अजय देवगन-काजोल की फ़िल्म ‘तानाजी, द अनसंग वॉरियर’ पहले स्थान पर थी। पहुँच में भी फ़िल्म ‘छपाक’, इसी दिन रिलीज़ होनेवाली फ़िल्म ‘तानाजी, द अनसंग वॉरियर’ और 24 जनवरी को रिलीज़ होनेवाली फ़िल्म ‘स्ट्रीट डांसर’ से पीछे थी। दर्शकों की रुचि में भी दीपिका की फ़िल्म ‘तानाजी, द अनसंग वॉरियर’ से पीछे चल रही थी। इससे भी चिंता की बात यह थी कि एफ़बीओ में ‘छपाक’ और ‘तानाजी, द अनसंग वॉरियर’ की पहले दिन की ओपनिंग में बहुत अधिक फर्क था। ‘तानाजी, द अनसंग वॉरियर’ को इस रिपोर्ट में ‘छपाक’ से लगभग दुगनी ओपनिंग मिलने का पूर्वानुमान लगाया गया था। बताया जाता है कि इस रिपोर्ट के आते ही फ़िल्म ‘छपाक’ का प्रमोशन देख रहे लोगों ने रणनीति बदली और उसके बाद ही दीपिका के जेएनयू जाने की योजना बनी। दीपिका जेएनयू पहुँच गईं। 

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दीपिका के जेएनयू जाने को लेकर सोशल मीडिया पर भले ही हो-हल्ला मचा हो लेकिन सिनेमैट्रिक्स की 9 जनवरी की रिपोर्ट बताती है कि इसका मामूली फ़ायदा ‘छपाक’ को हुआ। चार मापदंडों पर दीपिका के जेएनयू जाने का थोड़ा ही असर हुआ लेकिन फ़र्स्ट डे बॉक्स ऑफ़िस ओपनिंग के पूर्वानुमान पर कोई असर नहीं पड़ा। जबकि ‘तानाजी, द अनसंग वॉरियर’ के एफ़बीओ में मामूली वृद्धि होती दिख रही है। आज दोनों फ़िल्म रिलीज़ हो गई और उसके वास्तविक आँकड़े आएँगे तो पता चलेगा कि दीपिका की जेएनयू जाने की रणनीति कितनी कामयाब रही और फ़िल्म को ओपनिंग में या कारोबार में कितना फ़ायदा हो पाया या इसका कोई असर नहीं पड़ा।

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प्रमोशन या आंदोलन?

दरअसल, अगर हम फ़िल्मी कलाकारों को देखें तो विवादित विषयों को उठाकर या उनके साथ खड़े होकर फ़िल्म प्रमोशन की रणनीति बहुत पुरानी है। दीपिका पादुकोण की ही फ़िल्म ‘पद्मावत’ को लेकर उठा विवाद अभी पाठकों और दर्शकों के मानस पर अंकित ही है। पूर्व में भी बॉलीवुड के हीरो इस तरह के विवादों को हवा देते रहे हैं, कभी किसी को डर लगने लगता है तो किसी की पत्नी को डर लगने लगता है तो कभी किसी अभिनेता को अपने बच्चों की चिंता सताने लगती है। कई बार फ़िल्म के उन अंशों को जानबूझकर लीक कर दिया जाता है जो विवाद पैदा कर सकते हैं। ऐसे भी उदाहरण हैं जब विवाद उठाने के बाद निर्माता सफ़ाई देते हैं कि इस तरह का कोई प्रसंग इस फ़िल्म में नहीं है। कई बार इस तरह की रणनीति सफल होती है और कई बार असफल। दीपिका की फ़िल्म छपाक का प्रमोशन देख रही टीम ने इस बार आंदोलन के साथ जाकर फ़िल्म को सफल करने का दाँव चला है। सफलता तो दर्शकों के हाथ में है, दाँव पर तो सिनेमैट्रिक्स की रिपोर्ट की साख भी है।

'दैनिक जागरण' से साभार।

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अनंत विजय

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