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एलजी को अधिक अधिकार देने वाला एनसीटी बिल भारी विरोध के बीच पास

विपक्ष के ज़ोरदार विरोध, ज़बरदस्त हंगामा और भारी शोर-शराबे के बीच बुधवार को एनसीटी विधेयक राज्यसभा में पारित हो गया। इस विधेयक को लोकसभा की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है।

इस विधेयक के क़ानून बन जाने से दिल्ली में केंद्र का प्रतिनिधित्व करने वाले उपराज्यपाल यानी लेफ़्टिनेंट गवर्नर को दिल्ली की निर्वाचित सरकार की तुलना में अधिक अधिकार मिल जाएंगे।

टीएमसी ने राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू से कहा था कि विधानसभा चुनावों के बाद इस पर बहस कराया जाए क्योंकि चुनाव प्रचार में व्यस्त करने के कारण टीएमसी के सांसद इसमें भाग नहीं ले पाएंगे। पर विधेयक उसी दिन राज्यसभा में पेश कर दिया गया और वह पारित भी हो गया। 

विपक्ष पर सरकार का हमला

विपक्ष ने एनसीटी विधेयक पर सरकार के अड़ियल रुख पर पर विरोध जताया और उसके बाद ने सदन से वॉकआउट कर दिया। 

सरकार की ओर से विपक्ष के विरोध का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि सदन में चर्चा के दौरान हम पर लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप लगा, प्रजातंत्र पर खतरा बताया गया, लेकिन 1975 में न्यायालय के एक फ़ैसले से एक व्यक्ति की कुर्सी को बचाने के लिए 1975 में 18 महीने के लिए आपातकाल लगा दिया गया। 

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रेड्डी ने ज़ोर देकर कहा कि एनसीटी विधेयक में संविधान के ख़िलाफ़ कुछ भी नहीं है। 

इसी तरह सरकार का पक्ष रखते हुए केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा, "हम तो किसी को डराना नहीं चाहते हैं, लेकिन चुनाव में सबको हराना चाहते हैं, हम सरकार के अधिकार को लेना नहीं चाहते हैं, लेकिन लेफ़्टिनेंट गवर्नर को अधिकार देना चाहते हैं, हम तो संविधान को बदलना नहीं चाहते हैं, संविधान बदलने वालों को हम बदलना चाहते हैं।"

'असंवैधानिक विधेयक'

विपक्ष की ओर से शिरोमणि अकाली दल के नरेश गुजराल ने एनसीटी विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि यह असंवैधानिक विधेयक है। ऐसा कई बार हुआ है कि राज्य और केंद्र में अलग-अलग सरकार रही है।
आम आदमी पार्टी ने एनसीटी विधेयक का ज़बरदस्त विरोध किया। इसके सासंद संजय सिंह ने दिल्ली सरकार के शिक्षा मॉडल की तारीफ अमेरिका ने की। इस पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने ठहाका लगाया। संजय सिंह ने इस पर गुस्सा होकर कहा कि 'जब अत्याचार किया जाता है तो ऐसी हंसी रावण हंसता है।' 
उन्होंने कहा, 

एनसीटी विधेयक संविधान के ख़िलाफ़ है, चुनी हुई सरकार के ख़िलाफ़ है। महाभारत में द्रौपदी का चीरहरण राजसभा में धृतराष्ट्र के सामने हुआ था। आज इस सदन में संविधान का चीरहरण हो रहा है।


संजय सिंह, राज्यसभा सदस्य, आम आमी पार्टी

'हमारा अपराध क्या है?'

उन्होंने भावुक होकर सवाल किया कि 'आखिर हमारा अपराध क्या है, जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बने तो स्कूलों में जाले लगे होते थे आज वहाँ एसी क्लासरूम है। हमने मोहल्ला क्लीनिक बनाए और महिलाओं को मुफ़्त बस यात्रा की सुविधा दी। हमें जनता के हित में काम करने के अपराध की सजा दी जा रही है।'

'अगला नंबर आपका है'

एनसीटी विधेयक का विरोध करते हुए राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज कुमार झा ने कहा कि 'आज इस मसले पर कई दल चुप हैं, या सोच रहे हैं कि इसमें हमारा क्या है, दूसरे का मसला है या वो इस पर निर्णय नहीं कर पा रहे हैं।'

उन्होंने कहा,

मैं सिर्फ ये दो लाइन कहना चाहूँगा उसके कत्ल पर मैं भी चुप था, मेरा नंबर अब आया, मेरे कत्ल पर आप भी चुप हैं, अगला नंबर आपका है।


मनोज झा, राज्यसभा सदस्य, राष्ट्रीय जनता दल

सेलेक्ट कमिटी में भेजने की माँग

समाजवादी पार्टी ने विधेयक को सेलेक्ट कमिटी के पास भेजने की माँग की, ऐसा नहीं किए जाने पर वॉक आउट कर गए। इसी तरह बीजू जनता दल के सांसद ने कहा कि वे विधेयक को पारित किए जाने का भागीदार नहीं बनना चाहते और इसलिए सदन से वॉक आउट कर रहे हैं। 

तृणमूल कांग्रेस सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने पीठासीन अधिकारी हरिवंश पर तंज करते हुए कहा कि जब कभी कोई महत्वपूर्ण विधेयक राज्यसभा में रखा जाता है, चेअर पर आप ही होते हैं। कृषि क़ानूनों के समय आप थे, आज भी आप ही हैं।
याद दिला दें कि पिछले साल कृषि क़ानूनों को भी भारी शोर शराबे के बीच पारित किया गया था। उस समय हरिवंश पर यह आरोप लगा था कि उन्होंने विपक्ष के एक सदस्य के मत-विभाजन की माँग को यह कह कर खारिज कर दिया था कि वह सदस्य उस समय सीट पर नहीं था, जबकि उसका और उस समय सदन में मौजूद दूसरे कुछ सदस्यों का दावा था कि वह सदस्य उस समय अपनी सीट पर ही था। 
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