loader

जेटली के निधन से मैंने अपना क़ीमती दोस्त खो दिया: मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरुण जेटली के निधन को बड़ी क्षति बताते हुए कहा है कि जेटली का जाना बेहद दुखद है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जेटली बड़ी राजनीतिक हस्ती, बुद्धिजीवी और क़ानून के ज्ञाता थे। मोदी ने जेटली की पत्नी और बेटे से बात कर उन्हें सांत्वना दी। जेटली को प्रधानमंत्री मोदी के क़रीबी लोगों में गिना जाता था। पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री जेटली काफ़ी लंबे समय से बीमार चल रहे थे और एम्स में भर्ती थे। उन्होंने शनिवार सुबह एम्स में अंतिम सांस ली। हाल के दिनों में यह बीजेपी के दूसरे वरिष्ठ नेता का निधन हुआ है। 6 अगस्त को ही पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का निधन हो गया था।

ताज़ा ख़बरें
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ट्वीट में कहा, ‘जेटली जिंदादिली से भरे हुए, बुद्धिजीवी और करिश्माई व्यक्ति थे। जेटली को समाज के सभी वर्गों के लोगों के द्वारा सराहा जाता था। उन्हें भारत के संविधान, इतिहास, सार्वजनिक नीति, शासन और प्रशासन के बारे में बेजोड़ जानकारी थी।’ मोदी ने आगे कहा, ‘अपने लंबे राजनीतिक जीवन के दौरान, जेटली ने कई मंत्रालयों की जिम्मेदारियाँ निभाईं, जिसने उन्हें भारत की आर्थिक वृद्धि, भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने, लोगों के लिए आसान क़ानून बनाने और दूसरे देशों के साथ व्यापार बढ़ाने के योग्य बनाया।’ 
श्रद्धांजलि से और ख़बरें
प्रधानमंत्री ने कहा, जेटली के निधन से मैंने एक ऐसे मूल्यवान दोस्त को खो दिया है, जिसे मैं दशकों से जानता था। मुद्दों पर उनकी गहरी पहुँच और समझ के समानांतर बहुत कम लोग थे।, मोदी ने कहा, वह अच्छी तरह जिए और हमें काफ़ी ख़ुशनुमा यादों के साथ छोड़ गए। हमें उनकी कमी महसूस होगी। 
जेटली ने ख़राब स्वास्थ्य के कारण ही इस बार केंद्र सरकार में शामिल होने से इनकार कर दिया था। जेटली को बीजेपी के प्रमुख रणनीतिकारों में माना जाता था और वह कई बार पार्टी को मुश्किलों से निकालकर लाये थे। प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार सत्ता संभालने पर जेटली को वित्त, रक्षा और सूचना प्रसारण जैसे अहम मंत्रालय दिये थे। 
संबंधित ख़बरें
मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में और उससे पहले भी जेटली मोदी के लिए हमेशा संकटमोचक रहे। जीएसटी पर उन्होंने तमाम राज्यों के वित्त मंत्रियों को राजी किया, उन्हें मोदी का 'चाणक्य' भी कहा जाता था।
जेटली पाँच साल वित्त मंत्री रहे लेकिन उनके कार्यकाल में वित्त मंत्रालय बैंकों का एनपीए, डिफ़ॉल्टर्स  का विदेश भाग जाना, नोटबंदी, जीएसटी, रफ़ाल जैसे अनेक विवादों में घिरा रहा। लेकिन मीडिया में अपनी पकड़ का इस्तेमाल कर उन्होंने कुशलता से सरकार का बचाव किया। 
सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
क़मर वहीद नक़वी

अपनी राय बतायें

श्रद्धांजलि से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें