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अखिलेश पर मोदी का हमला : वे उद्घाटन करते हैं, हम उसे पूरा करते हैं

हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्व चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेन्स स्टाफ़ की मृत्यु पर तीन दिनों के राजकीय शोक का एलान कर रखा है, पर सरकारी कार्यक्रम नहीं रुक रहे हैं। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे उचित ठहराने के लिए कहा कि 'देश शोक मना रहा है, पर हम रुकेंगे नहीं, विकास के रास्ते पर बढ़ते रहेंगे।' 

नरेंद्र मोदी ने बलरामपुर में 9,800 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले सरयू नहर परियोजना का उद्घाटन करते हुए कहा, "देश शोक मना रहा है, पर पीड़ा में होने के बावजूद हम न तो अपने कदम रोकेंगे न ही विकास। भारत नहीं रुकेगा। भारत ठहर नहीं जाएगा।"

उन्होंने इसके आगे कहा, "हम भारतीय कड़ी मेहनत करेंगे और अंदरूनी व बाहरी चुनौतियों का सामना करेंगे।" 

प्रधानमंत्री ने इसके साथ ही दावा किया कि 

सरयू नहर परियोजना पर पचास साल में जितना काम नहीं हुआ, उससे ज़्यादा काम पिछले पाँच साल में हुआ है। यह डबल इंजन की सरकार है, यह डबल इंजन की सरकार का काम है।


नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

अखिलेश पर तंज

उन्होंने यह भी कहा कि "देश के जल संसाधनों का सही इस्तेमाल हो रहा है, खेतों तक पानी पहुँच रहा है और किसानों को खेती के लिए पानी मिल रहा है क्योंकि खेती ही हमारी प्राथमिकता है।"

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाम लिए बग़ैर समाजवादी पार्टी और इसके नेता अखिलेश यादव पर तीखा तंज किया। उन्होंने कहा, 

जब मैं दिल्ली से चला, मैं इंतजार कर ही रहा हूँ कि कब कोई सामने आकर कहेगा कि हमने इस परियोजना का शिलान्यास तो पहले ही कर दिया था।


नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

'फीता काटने का स्वभाव'

उन्होंने अखिलेश यादव पर तीखा हमला करते हुए कहा कि 'कुछ लोगों को ऐसा दावा करने की आदत है। वे कह सकते हैं कि उन्होंने जवानी में ही इस परियोजना का फीता काटा था।' 

नरेंद्र मोदी ने इसके बाद कुछ ज़्यादा तल्ख़ी से कहा, 

कुछ लोगों का यह स्वभाव होता है कि वे फीता काट कर भूल जाते हैं। हो सकता है कि उन्होंने कई दशक पहले फीता काटा हो, पर वे यही कर भी सकते हैं, बस फीता काटते हैं।


नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

उन्होंने इसके आगे कहा कि 'बीजेपी सरकार का स्वभाव परियोजना को समय पर पूरा करना है।' 

क्या है सरयू परियोजना?

याद दिला दें कि वर्ष 1978 में बहराइच और गोंडा ज़िले में सिंचाई का विस्तार करने के लिए घाघरा कैनाल (लेफ्ट बैंक) के नाम से यह परियोजना शुरू हुई।

इसके बाद साल 1982-83 में इसका विस्तार पूर्वांचल के ट्रांस घाघरा-राप्ती-रोहिणी क्षेत्र में कर दूसरे नौ जिलों को इसमें शामिल किया गया। केंद्र सरकार ने इसका नाम बदलकर सरयू परियोजना रख दिया। सरकार ने यह भी तय किया कि इसमें घाघरा के साथ राप्ती, रोहिणी को भी नहर प्रणाली से जोड़ा जाएगा।

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