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आरबीआई गवर्नर की नियुक्ति पर सरकार की आलोचना की थी अभिजीत ने

नोबेल पुरस्कार के लिए चुने गए अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने शक्तिकांत दास को भारतीय रिज़र्व बैंक का गवर्नर नियुक्त करने पर सरकार की आलोचना की थी। 
शक्तिकांत दास की नियुक्त पर बनर्जी ने कहा था कि इससे सार्वजनिक संस्थानों के शासन से जुड़े मुद्दे पर भयावह सवाल खड़ हो रहे हैं। बनर्जी ने कहा था कि उनके मन में इस नियुक्ति पर भयावह सवाल खड़े हो रहे हैं। 
याद दिला दें कि शक्तिकांत दास अर्थशास्त्री नहीं हैं, उन्होंने अर्थशास्त्र की कभी पढ़ाई नहीं की है। वह इतिहास के छात्र रहे हैं, वह आईएएस थे और पहले गुजरात कैडर में थे, जहाँ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें रिज़र्व बैंक ले आए और उन्हें डिप्टी गवर्नर बना दिया। जब नोटबंदी का विवादास्पद फ़ैसला लिया गया, उसे लागू करने की ज़िम्मेदारी दास पर ही डाली गई थी। 
दास के ठीक पहले उर्जित पटेल रिज़र्व बैंक के गवर्नर थे और केंद्रीय बैंक से सरप्लस रिज़र्व देने के मुद्दे पर केंद्र सरकार से उनके मतभेद उभरे। पटेल ने इस्तीफ़ा दे दिया था, हालांकि इस्तीफ़े में उन्हों ने निजी कारण का हवाला दिया था। उनके पहले रिज़र्व बैंक के गवर्नर थे रघुराम राजन। उन्होंने अपरोक्ष रूप से केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की थी। उनका कार्यकाल नहीं बढाया गया, हालांकि उन्होंने संकेत दे दिया था कि वह और कुछ समय वह ज़िम्मेदारी उठाने को तैयार हैं। 
केंद्र सरकार और केंद्रीय बैंक के मुखिया के बीच मतभेद की बातें सामने आ रही थीं और यह समझा जा रहा था है कि मोदी सरकार अपने मनपसंद आदमी को रिज़र्व बैंक के गवर्नर के पद पर बैठाना चाहते हैं। ऐसे में शक्तिकांत दास की नियुक्ति पर सवाल उठना लाज़िमी था। 
अभिजीत बनर्जी ने इस पर अपनी बड़ी साफ़गोई से रखी थी। उन्होंने कहा था, 'संस्थानें इसलिए टिकी रहती हैं कि लोग कह सकें, हाँ, मैं यह काम कर सकता हूँ, पर नहीं करूँगा, मेरे हाथ बँधे हुए हैं। ऐसे मौक़ों पर हमें अपने हाथ बाँध लेना चाहिए, पर हम तो हाथ कुछ ज़्यादा ही खोल बैठे हैं।'
अभिजीत बनर्जी ने केंद्र सरकार की आलोचना दूसरे मुद्दों पर भी की थी। उन्होंने सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर पर संकेत दे दिया था कि सरकार जिस दर का दावा कर रही है, उतना नहीं होगा। लेकिन उस समय उनकी बातों को तवज्जो नहीं दिया गया था। पर अब तो ख़ुद सरकारी एजेंसियों ने कहा है कि जीडीपी वृद्धि दर अनुमान से कम होगी। इसी तरह बनर्जी ने नोटबंदी, जीएसटी और गुजरात मॉडल जैसे विषयों पर भी सरकार की आलोचना की थी। 
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