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आँध्र प्रदेश और चंडीगढ़ में भी ओमिक्रॉन के मामले आए

आंध्र प्रदेश और चंडीगढ़ में भी ओमिक्रॉन वैरिएंट के  एक-एक मामले रविवार को आए। इन दोनों राज्यों में ये पहले मामले हैं। इसके अलावा कर्नाटक में भी आज ही ओमिक्रॉन के एक केस की पुष्टि हुई है और इस तरह राज्य में अब तक कुल 3 मामले सामने आ चुके हैं। इसके साथ ही देश में अब कुल मिलाकर ओमिक्रॉन के 36 केस की पुष्टि हो चुकी है।

आंध्र प्रदेश में जिस 34 वर्षीय शख्स में ओमिक्रॉन के नये मामले की पुष्टि हुई है वह आयरलैंड से आया है। यात्री आयरलैंड से मुंबई होते हुए विशाखापट्टनम पहुँचा था। शनिवार को किए गए आरटी-पीसीआर टेस्ट में कोरोना की रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। 

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आंध्र प्रदेश में अब तक विदेश से आए कुल पंद्रह यात्री कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। सभी पंद्रह नमूने जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजे गए। दस मामलों की रिपोर्ट वापस गई है। दस में से केवल एक ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमित था।

इस बीच शनिवार देर रात चंडीगढ़ में ओमिक्रॉन वैरिएंट के पहले मामले की पुष्टि हुई। वह 20 वर्षीय शख्स चंडीगढ़ में अपने रिश्तेदारों से मिलने इटली से आया है। 22 नवंबर को जहाज से उतरने के बाद वह होम क्वारेंटीन में था और 1 दिसंबर को फिर से टेस्ट करने पर कोरोना पॉजिटिव पाया गया। जीनोम सिक्वेंसिंग से ओमिक्रॉन की पुष्टि हुई।

उस शख्स ने इटली में रहते हुए फाइजर वैक्सीन लगवाई थी। वह फ़िलहाल इंस्टीट्यूशनल क्वारेंटीन में है। उस शख्स के संपर्क में आए और सबसे ज़्यादा जोखिम वाले सात पारिवारिक सदस्यों को भी क्वारेंटीन में रखा गया है। हालाँकि उन सभी की आरटी पीसीआर टेस्ट रिपोर्ट नकारात्मक रही है।

महाराष्ट्र में अब तक कुल 17 मामले आ चुके हैं और इसके अलावा राजस्थान में नौ, गुजरात में तीन, कर्नाटक में तीन और दिल्ली में दो मामलों की पुष्टि हुई है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश और चंडीगढ़ में भी एक-एक मामले की पुष्टि हुई है।

ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों के बीच मास्क का इस्तेमाल कम किए जाने और सुरक्षा उपायों में ढील दिए जाने को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने चेताया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि पार्टी हो रही है, शादियाँ हो रही हैं इसलिए कोरोना नियमों का पालन किया जाना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि भारत में सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन किया जाना चाहिए। अग्रवाल ने डब्ल्यूएचओ की चेतावनी का हवाला देते हुए कहा था कि 'टीकाकरण के अलावा सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को बनाए रखा जाना चाहिए। पर्याप्त सावधानियाँ बरती जानी चाहिए। सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों में ढिलाई के कारण यूरोप में कोरोना के मामलों में वृद्धि हुई।'

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खुद नीति आयोग ने माना है कि कोरोना की वजह से मास्क का इस्तेमाल करने वालों की संख्या 60 प्रतिशत से भी कम हो गई है और देश 'ख़तरनाक क्षेत्र' बन गया है। नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वी. के. पाल ने इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मेट्रिक्स के आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा है कि, 'हम कोरोना की पिछली लहर से बदतर स्थिति में पहुँच गए हैं। हम तकनीकी रूप से एक बार फिर ख़तरनाक क्षेत्र बन गए हैं। रोग के रोकथाम के नज़रिए से हम पहले से निचले स्तर और अस्वीकार्य स्तर पर हैं।' उन्होंने कहा, "वैज्ञानिक समुदाय के साथ ही हम भी यह चेतावनी दे रहे हैं कि मास्क छोड़ देने का समय अभी भी नहीं आया है।"

इंस्टीट्यूट ऑफ़ हेल्थ मेट्रिक्स के आँकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2020 के बाद से ही मास्क का इस्तेमाल करने वालों की संख्या गिरती चली गई और फरवरी 2021 में यह 60 प्रतिशत से भी नीचे चली गई।

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