काबुल एयरपोर्ट के बाहर हुए बम धमाकों की जिम्मेदारी इसलामिक स्टेट ऑफ़ खोरासान ने ली है जिसे आईएसआईएस (के) या आईएस (के) भी कहा जाता है। ताज़ा बम धमाकों में इसका नाम आने के बाद भारत की चिंता ज़्यादा बढ़ गई है, लेकिन क्यों, हम इसी बारे में यहां बात करेंगे।
2014-15 के वक़्त जब आईएसआईएस सीरिया और इराक़ में अपना विस्तार कर रहा था, उसी दौरान यह आईएस (के) वजूद में आया था। सीधे शब्दों में आईएस (के) आईएस का ही विस्तार है। 2015-16 में आईएस (के) ने अफगानिस्तान में मौजूद अमेरिकी सेनाओं पर हमले किए थे।
आईएसआईएस के सरगना अबु बकर-अल बग़दादी का ही सपना इसलामिक स्टेट ऑफ़ ख़ोरासान बनाने का था। वह चाहता था कि उज़्बेकिस्तान, कज़ाकिस्तान, लेबनान, फिलिस्तीन, पाकिस्तान, इराक़, आधा ईरान, सीरिया, तुर्कमेनिस्तान, जॉर्डन और अफ़ग़ानिस्तान के साथ ही हिंदुस्तान के भी कुछ इलाक़ों को शामिल कर इसलामिक स्टेट ऑफ़ ख़ोरासान बनाया जाए।
ख़ोरासान नाम अफगानिस्तान के ख़ोरासान प्रांत से लिया गया था। बग़दादी चाहता था कि इसलामिक स्टेट ऑफ़ ख़ोरासान बनने के बाद उस इलाक़े में शरीयत का राज चले।
आतंकवादी हमलों में माहिर
वाशिंगटन के एक थिंक टैंक के मुताबिक़, आईएस (के) ने 2017-18 के दौरान अफगानिस्तान और पाकिस्तान में लगभग 100 हमले किए थे और इसमें 250 से ज़्यादा अमेरिकी-अफ़ग़ान और पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हो गई थी। आईएस (के) के पास 1,500-2,000 आतंकवादी हैं और इन्हें गुरिल्ला युद्ध और आतंकवादी हमलों में माहिर माना जाता है।
इसलामिक स्टेट ऑफ़ ख़ोरासान की जो योजना थी, चूंकि इसमें भारत के भी कुछ हिस्से शामिल थे, इसलिए आईएस (के) ने यहां भी पैर जमाने की कोशिश की थी।
ट्रेन बम धमाका
2017 में जब मध्य प्रदेश में शाजापुर के पास एक पैसेंजर ट्रेन में आईएस के हिंदुस्तान मॉड्यूल ने पहला धमाका किया था तो सुरक्षा एजेंसियों ने देश में इस संगठन से जुड़े लोगों की धरपकड़ शुरू की थी और लखनऊ में इससे जुड़े आतंकवादी सैफ़ुल्लाह को मार गिराया था। सुरक्षा एजेंसियों ने मध्य प्रदेश और कानपुर से भी 7 लोगों को गिरफ़्तार किया था।
इसके बाद 2018 के दिसंबर में श्रीनगर के नौहट्टा इलाक़े में स्थित जामा मसजिद में कुछ युवकों के द्वारा आईएस के झंडे लहराने की घटना सामने आई थी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इन युवकों ने आईएस के समर्थन में नारेबाज़ी भी की थी।
इसलामिक स्टेट से आकर्षित हुए युवा
इसलामिक स्टेट जब चर्चा में आया था तो दुनिया के कई देशों के मुसलिम युवा इसकी विचारधारा से प्रभावित हुए थे। यहां तक कि यूरोप के अति-आधुनिक माहौल में पले-बढ़े मुसलिम युवा भी अपना घर-देश छोड़ कर इराक़ पहुंच गए थे। क्योंकि आईएस यही सपना दिखाता था कि वह दुनिया में शरीयत और इसलाम का शासन स्थापित कर देगा।
चूंकि आईएस (के) के आतंकवादियों का मक़सद इसलामिक स्टेट ऑफ़ ख़ोरासान बनाने का है और इसमें भारत के इलाक़े भी हैं, इसलिए देश की सुरक्षा एजेंसियों को इसे लेकर बेहद सतर्क रहने की ज़रूरत है। ये संगठन 2019 में श्रीलंका में चर्च और होटलों में सीरियल धमाके भी कर चुका है, जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी।
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