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नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी.ओली।

क्यों लगातार भारत विरोधी क़दम उठा रहा है नेपाल?

नेपाल लगातार भारत विरोधी क़दम उठा रहा है। ताज़ा क़दम यह है कि उसने एक क़ानून पारित किया है जिसके तहत विदेशी महिलाओं को नेपाली पुरूषों से शादी करने के 7 साल बाद वहां की नागरिकता मिलेगी। नेपाल के इस क़दम को इसलिए भारत विरोधी माना जा रहा है क्योंकि दोनों देशों के बीच शादी-विवाह ख़ूब होते हैं। 

एक और मामले में नेपाल ने अड़ियल रूख़ दिखाया है। वह बिहार में गंडक नदी के बांध की मरम्मत के काम के लिए अनुमति नहीं दे रहा है। बिहार सरकार ने आशंका जताई है कि नेपाल के इस क़दम से बिहार में बाढ़ आ सकती और ख़ासा नुक़सान हो सकता है। 

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बिहार के जल संसाधन मंत्री संजय झा ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से कहा, ‘गंडक बैराज में 36 गेट हैं, जिसमें से 18 गेट नेपाल में आते हैं और जिस जगह बाढ़ को रोकने में काम आने वाला सामान रखा है, वहां नेपाल ने बैरियर लगा दिए हैं।’ झा ने कहा कि इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि नेपाल ने कई और जगहों पर मरम्मत से जुड़ा काम रोक दिया है। 

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इससे पहले नेपाल देश के नए राजनीतिक नक्शे को लेकर भारत को आंखें दिखा चुका है। इस नक्शे में लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा बताया गया है। इस नक्शे को संसद से मंजूरी के बाद राष्ट्रपति से भी स्वीकृति मिल गई है। इसका सीधा मतलब यह है कि नेपाल भारत की नाराज़गी की परवाह नहीं करता और इस बात को वहां के प्रधानमंत्री के.पी.ओली भी कह चुके हैं। 

ओली संसद में कह चुके हैं कि इस मुद्दे को अब और ज़्यादा नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता और अगर कोई नाराज़ होता है तो परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। ओली ने कहा था कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को किसी भी क़ीमत पर नेपाल के नक्शे में वापस लाया जाएगा। 

नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावाली कह चुके हैं कि नेपाल का नया राजनीतिक नक्शा पूरी तरह स्थायी है और इसमें परिवर्तन करने की कोई गुंजाइश नहीं है। ग्यावाली ने कहा था कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा के भारत में होने की बात पूरी तरह झूठ है। उन्होंने कहा था कि भारत और नेपाल के बीच काली नदी की सीमा थी और इस नदी को सीमा न मानने का कोई कारण नहीं है।

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क्या चीन की शह?

नेपाल के सीमांत इलाक़े के नजदीक भारत ने लिपुलेख के रास्ते कैलाश मानसरोवर तक जाने के लिए 80 किलोमीटर का सड़क मार्ग बनाया है। गत 8 मई को जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सड़क मार्ग का उद्घाटन किया था तब से नेपाल भारत को तेवर दिखा रहा है और लगातार भारत विरोधी बयान दे रहा है। यह मार्ग चीन को भी इसलिए खटक रहा है क्योंकि इससे भारत को सामरिक लाभ होगा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन नेपाल-भारत रिश्तों में सड़क मार्ग के उद्घाटन के बाद पैदा हुई खटास का लाभ उठाने की कोशिश में है। 

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