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जेएनयू पर हमले में है जर्मनी के नात्सीवाद की ओर बढ़ने की गूंज: अभिजीत बनर्जी

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय परिसर में रविवार की शाम नकबापोश लोगों द्वारा छात्रों-शिक्षकों की पिटाई का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सत्तारूढ़ बीजेपी इस पर अलग-थलग पड़ती जा रही है और चारों ओर इसकी तीखी आलोचना हो रही है। 

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अर्थशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अभिजीत बनर्जी ने जेएनयू परिसर में हुए हमले पर बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए इसे नात्सीवाद की गूँज क़रार दिया है। उन्होंने कहा कि हर उस आदमी को इस पर चिंतित होना चाहिए जो विदेश में देश की छवि के बारे में सोचता है। उन्होंने कहा : 

जेएनयू हमले में उन दिनों की गूंज सुनाई देती है, जब जर्मनी हिटलर के नात्सीवाद की ओर बढ़ रहा था।


अभिजीत बनर्जी, नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री

उन्होंने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार के उस बयान का भी विरोध किया, जिसमें हिंसा के लिए फ़ीस बढ़ाने का विरोध करने वालों को ज़िम्मेदार ठहराया गया था। अभिजीत बनर्जी ने कहा, ‘सरकार को यह पता लगाना चाहिए कि दरअसल हुआ क्या था और इसे आरोप-प्रत्यारोप के कोरस में डूबने नहीं देना चाहिए।’

बनर्जी ने इस कांड में घायल हुए लोगों के स्वास्थ्य पर चिंता जताई और कहा कि वे चाहते हैं कि सारे लोग जल्द से जल्द स्वस्थ हो जाएं।
दलित चिंतक कंचा इलैया शेफ़र्ड ने भी रविवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हुए हमले की ज़ोरदार शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा, ‘आज़ादी के बाद यह पहली बार हुआ है कि उच्च शिक्षा के किसी संस्थान में रात के अंधेरे में नकाबपोश लोगों ने हमला किया और छात्रों और शिक्षकों बुरी तरह पीटा है।’
कंचा इलैया ने कहा : 

‘यह विश्वविद्यालय प्रशासन और दूसरे उच्च पदस्थ अधिकारियों की मिलीभगत से किए जाने वाले संगठित अपराधों की शुरुआत है।’


कंचा इलैया शेफ़र्ड, दलित चिंतक

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में रविवार शाम को हिंसा भड़क गई। दर्जनों नकाबपोश लोगों ने कैंपस में छात्रों और अध्यापकों पर हमला कर दिया। इसमें विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष गंभीर रूप से घायल हो गईं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार क़रीब 50 गुंडे कैंपस में घुसे और तोड़फोड़ करने लगे। उन्होंने कारों में तोड़फोड़ की और लोगों पर हमले भी किए। छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष ने कहा कि 'मास्क पहने गुंडों द्वारा मुझ पर घातक हमला किया गया। मेरी बुरी तरह पिटाई की गई।' घटना के बार छात्रसंघ ने एबीवीपी पर हिंसा करने का आरोप लगाया है, जबकि एबीवीपी ने कहा है कि इसके सदस्यों पर वामपंथी छात्रों ने हमला किया है।
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