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रजनीकांत को दादा साहब फाल्के अवार्ड देने का एलान 

दक्षिण फ़िल्मों के सुपर स्टार रजनीकांत को दादा साहब फाल्के अवार्ड देने का एलान किया गया है। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने गुरूवार को यह एलान किया है। इन दिनों तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं और ऐसे वक़्त में रजनीकांत को इस प्रतिष्ठित सम्मान को दिए जाने से इसकी टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। 

रजनीकांत ने 1975 में अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी और वे तमिल पर्दे पर आते ही छा गए थे। रजनीकांत कुछ ही सालों में सुपरस्टार बन गये थे। लोकप्रियता के मामले में रजनी ने बड़े-बड़े कलाकारों को पछाड़ दिया था। रजनी की अदाकारी का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोलने लगा था। बड़ी बात यह रही कि विधानसभा चुनावों में रजनी ने जिस पार्टी का समर्थन किया वह पार्टी सत्ता में आई। लेकिन रजनी परोक्ष राजनीति से हमेशा दूर रहे। 

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दक्षिण में और ख़ासकर तमिलनाडु में फ़िल्मी हस्तियों और राजनेताओं का चोली-दामन का जैसा संबंध रहा है, इसी कारण से पिछले दो दशकों से यह अटकलें थीं कि सुपरस्टार रजनीकांत राजनीति में आएंगे लेकिन वह परोक्ष रूप से राजनीति में नहीं आए। जयललिता की मृत्यु के बाद ऐसे कयास लगाये गये कि वह तमिलनाडु में अपनी राजनीतिक ज़मीन तलाश सकते हैं।

रजनीकांत के चाहने वाले उन पर राजनीति में सक्रिय होने का दबाव बनाते रहे हैं। बीते साल सितंबर महीने में तमिलनाडु के कई शहरों और गाँवों में उनके चाहने वालों ने 'अभी नहीं तो कभी नहीं' वाले पोस्टर लगाकर यह जताने की कोशिश की कि तमिल फ़िल्मों के सुपरस्टार के लिए समय हाथ से निकलता जा रहा है। 

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लेकिन बीते साल दिसंबर में रजनीकांत ने कहा था कि वह राजनीतिक पार्टी लॉन्च नहीं करेंगे। उन्होंने इसके पीछे ख़राब स्वास्थ्य का हवाला दिया था। जबकि इससे कुछ दिन पहले ही उन्होंने अपने राजनीतिक दल की घोषणा करने का एलान किया था और कहा था कि वे जनवरी में इसे लॉन्च करेंगे। 

लोगों के दिलों पर राज करने वाले इस अभिनेता ने कहा था कि वह नहीं चाहते कि जो लोग उन पर भरोसा करते हैं उन्हें ऐसा लगे कि उन्हें बलि का बकरा बनाया गया। 

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क़मर वहीद नक़वी

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