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रॉबर्ट वाड्रा की मुश्किलें बढ़ीं, स्काइलाइट का अधिकारी गिरफ़्तार

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी के पति और उद्यमी रॉबर्ट वाड्रा की मुश्किलें बढ़ी हैं, और बढ़ सकती हैं। उनके निकट सहयोगी और उनकी एक कंपनी से जुड़े सी. सीं. थम्पी को प्रवर्तन निदेशालय (एनफ़ोर्समेंट डाइरेक्टरेट) ने गिरफ़्तार कर लिया है। इसके बाद यह सवाल पूछा जाने लगा है कि क्या अब रॉबर्ट वाड्रा भी गिरफ़्तार हो सकते हैं?
एनफ़ोर्समेंट डाइरेक्टरेट ने दुबई में रहने वाले इस अनिवासी भारतीय को मनी लॉन्डरिंग यानी ग़ैरक़ानूनी तरीके से पैसे विदेश भेजने के आरोप में सोमवार को गिरफ़्तार किया है। उन पर 1,000 करोड़ रुपए मूल्य के विदेशी मुद्रा के घपले करने और इस तरह विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के उल्लंघन के आरोप लगे हैं। 

लेकिन बड़ी बात यह है कि थम्पी के तार रॉबर्ट वाड्रा से जुड़े हुए हैं। वे वाड्रा की कंपनी स्काइलाइट इनवेस्टमेंट्स के नियंत्रक हैं।
एनफ़ोर्समेंट डाइरेक्टरेट का कहना है कि 2009 में रॉबर्ट वाड्रा के एक और सहयोगी संजय भंडारी की कंपनी सैनटेक एफ़ज़ेडई ने 19 लाख पौंड की कीमत की एक संपत्ति एक निजी कंपनी वर्टेक्स से खरीदी थी। उसके तुरन्त बाद स्काइलाइट इनवेस्टमेंट्स ने वर्टेक्स के सारे शेयर खरीद लिए।
इसके पहले प्रवर्तन निदेशालय यानी एनफ़ोर्समेंट ने कहा था कि वाड्रा को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ करने की ज़रूरत है क्योंकि मनी लॉन्डरिंग मामले में पैसे के लेनदेन के तार सीधे उनसे जुड़ते हैं। निदेशालय ने दिल्ली हाई कोर्ट से यह भी कहा था कि वाड्रा जाँच एजेन्सियों से सहयोग नहीं कर रहे हैं। 

क्या है मामला?

वाड्रा पर आरोप है कि वह लंदन में 19 लाख पौंड के एक फ़्लैट खरीदने के लिए ग़लत तरीके से पैसे विदेश ले गए। वाड्रा ने तमाम आरोपों को खारिज कर दिया है। कांग्रेस ने चिदंबरम के मामले में कहा था कि बीजेपी बदले की भावना से काम कर रही है और उनके लोगों को फँसा रही है। कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने पहले कई बार कहा है कि वाड्रा के ख़िलाफ़ जाँच हो, लेकिन अमित शाह के बेटे जयेश शाह के ख़िलाफ़ भी जाँच होनी चाहिए। 
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क़मर वहीद नक़वी

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