loader

हाई कोर्ट :  नवाब मलिक को वानखेड़े से जुड़ी सामग्री सार्वजनिक करने का हक़ 

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के क्षेत्रीय निदेशक समीर वानखेड़े की दिक्क़तें बढ़ती ही जा रही हैं। बंबई हाई कोर्ट ने वानखेड़े और उनके परिवार के लोगों के ख़िलाफ़ सामग्री प्रकाशित करने से नवाब मलिक को रोकने के इनकार कर दिया है।  

 जस्टिस माधव जामदार ने समीर वानखेड़े के पिता ध्यानदेव वानखेड़े की ओर से दायर मानहानि के मुक़दमे की सुनवाई के दौरान यह फ़ैसला दिया।

उन्होंने राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के नेता व महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब मलिक पर वानखेड़े व उनके परिवार के बारे में सामग्री प्रकाशित करने पर रोक लगाने से इकार कर दिया। 

जस्टिस माधव ने कहा, 

हालांकि वादी को निजता का हक़ है, पर प्रतिवादी को भी अभिव्यक्ति की आज़ादी है। मौलिक अधिकारों में संतुलन रहना चाहिए।


जस्टिस माधव जामदार, जज, बंबई हाई कोर्ट

क्या कहा अदालत ने?

अदालत ने इसके साथ ही नवाब मलिक को आगाह किया कि वे किसी सामग्री को सार्वजनिक करने के पहले उसकी अच्छी तरह से पड़ताल कर लें और उसे सत्यापित कर लें। 

इसके पहले समीर वानखेड़े के पिता ने मानहानि का मामला दर्ज करते हुए एक अंतरिम आवेदन में गुजारिश की थी कि उनके व परिवार के ख़िलाफ़ सामग्री सार्वजनिक करने से नवाब मलिक को रोका जाए। अदालत ने 12 नवंबर को इस पर सुनवाई करने के बाद इस पर फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने सोमवार को इस पर फैसला दिया। 

यह मामला तब दायर किया गया था जब नवाब मलिक ने ट्वीट कर कहा था कि समीर वानखेड़े के पिता मुसलमान हैं और उनका नाम दाऊद है। 

क्या है विवाद?

ध्यानदेव वानखे़ड़े ने अदालत में कहा था कि नवाब मलिक के दामाद को गिरफ़्तार करने की वजह से मलिक ने यह अभियान छेड़ा था। 

यह विवाद इसलिए उठा कि नवाब मलिक का कहना है कि मुसलिम होने के बावजूद वानखेड़े ने फर्जीवाड़ा कर दलित कोटे से सरकारी नौकरी हासिल की।

महाराष्ट्र सरकार के इस मंत्री ने वानखेड़े का स्कूल में दाख़िला लेने और इसे छोड़ने का सर्टिफ़िकेट जारी किया था। इसमें वानखेड़े के धर्म के आगे मुसलिम लिखा गया है। इससे पहले वानखेड़े के जन्म प्रमाण पत्र को लेकर खासा विवाद हुआ था। 

ख़ास ख़बरें

जिस स्कूल का ये सर्टिफ़िकेट है, उसका नाम सेंट पॉल्स हाई स्कूल है और यह मुंबई के दादर में है। इसमें एनसीबी अफ़सर का नाम समीर दाऊद वानखेड़े लिखा गया है। स्कूल में दाख़िला लेने की तारीख़ 13 जून, 1985 लिखी गई है जबकि छोड़ने की तारीख़ 19 जून, 1986 है। 

निकाहनामा

नवाब मलिक ने कुछ दिन पहले ही एक निकाहनामा ट्वीट किया था और कहा था कि यह समीर दाऊद वानखेड़े और शबाना क़ुरैशी का निकाहनामा है और यह एनसीबी अफ़सर की पहली शादी थी। 

इसके बाद नवाब मलिक ने रविवार रात को ट्विटर पर एक तसवीर पोस्ट की है। मलिक ने इस तसवीर के जरिये यह कहने की कोशिश है कि यह समीर वानखेड़े की है। उन्होंने फ़ोटो के कैप्शन में लिखा है- “कबूल है, कबूल है, कबूल है...यह क्या किया तूने Sameer Dawood Wankhede?”

bombay high court no restriant on sameer wankhede nawab malik defamation - Satya Hindi

बता दें कि कुछ दिन पहले काज़ी मुजम्मिल अहमद सामने आए थे। उन्होंने ‘आज तक’ से कहा था कि यह निकाहनामा पूरी तरह सही है और निकाह के वक़्त समीर वानखेड़े, शबाना, समीर के माता-पिता और पूरा खानदान मुसलमान था। उन्होंने कहा था कि लोखंडवाला में 2006 में यह शादी बहुत धूमधाम से हुई थी। 

शबाना क़ुरैशी के पिता डॉ. ज़ाहिद क़ुरैशी ने भी कहा था कि समीर का पूरा परिवार इसलामिक नियमों को मानता था और शादी इसलामिक रीति-रिवाज़ से सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में हुई थी।

सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
क़मर वहीद नक़वी

अपनी राय बतायें

महाराष्ट्र से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें