loader

जाति जनगणना हो, ओबीसी के लिए बने अलग मंत्रालय: अनुप्रिया पटेल

बीजेपी को जाति जनगणना के मुद्दे पर तो सहयोगियों के बयानों का सामना करना ही पड़ रहा था, अब एक सहयोगी ने चार क़दम आगे बढ़ाते हुए अलग ओबीसी मंत्रालय के गठन की मांग की है। केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने जाति जनगणना के मुद्दे पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को उनका वादा भी याद दिलाया है। 

बीते सोमवार को ही जाति जनगणना की मांग को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात की थी। नीतीश ने इस मामले में जल्द से जल्द क़दम उठाने की मांग की है। 

केंद्रीय वाणिज्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने ‘इकनॉमिक टाइम्स’ से बातचीत में कहा कि वह एनडीए और संसद में कई बार जाति जनगणना की मांग कर चुकी है। 

ताज़ा ख़बरें
पटेल ने कहा कि 1990 में जब मंडल आयोग की रिपोर्ट को लागू किया गया तब ओबीसी की जातियों की ग़िनती अनुमान पर आधारित थी। उन्होंने कहा कि हाल ही में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने इस मुद्दे को उठाया है और अब जनगणना कराने में देर करने का कोई कारण नहीं है। 

उत्तर प्रदेश में कुर्मी जाति के बीच में बड़ा आधार रखने वाले अपना दल (सोनेलाल) की नेता अनुप्रिया ने कहा कि सितंबर, 2018 में गृह मंत्री रहते हुए राजनाथ सिंह ने 2021 की जनगणना के दौरान ओबीसी की जातियों की ग़िनती कराने का वादा किया था। उन्होंने हैरानी जताई कि अब सरकार अपने वादे को पूरा करने से पीछे क्यों हट रही है। 

Apna dal demands OBC census  - Satya Hindi

अनुप्रिया पटेल को मोदी कैबिनेट के हालिया विस्तार में मंत्री बनाया गया था। अपना दल (सोनेलाल) उत्तर प्रदेश में बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ता है। पटेल ने कहा कि जाति जनगणना से ही पता चलेगा कि पिछड़ी जातियों को कितना आरक्षण मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर हमारी आबादी के अुनपात में आरक्षण देना है तो हमारी संख्या को ग़िनना होगा। 

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्तमान में ओबीसी जातियों के बारे में जो अनुमान है, वह 1931 की जाति जनगणना के आधार पर है हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस बारे में अंतिम फ़ैसला प्रधानमंत्री को ही लेना है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सभी राजनीतिक दल इसकी मांग कर रहे हैं। 

Apna dal demands OBC census  - Satya Hindi

संसद में उठी थी मांग 

बिहार की नीतीश सरकार में बीजेपी के कोटे से मंत्री रामसूरत राय ने कुछ दिन पहले कहा था कि जातीय जनगणना कराई जानी चाहिए। बीजेपी की सांसद संघमित्र मौर्य ने लोकसभा में जातीय जनगणना कराने का समर्थन किया था। संघमित्र मौर्य ने कहा था कि यहां तक कि राज्यों और जिलों तक में जानवरों की गिनती हुई लेकिन पिछड़े समाज के लोगों की ग़िनती नहीं की गई। 

जातीय जनगणना के साथ ही 27 फ़ीसदी आरक्षण की सीमा को बढ़ाए जाने की मांग उठ चुकी है। एसपी के मुखिया अखिलेश यादव भी इस बात को लोकसभा में उठा चुके हैं। अखिलेश ने ओबीसी की जातियों के जो आंकड़े हैं, उन्हें जारी करने की भी मांग रखी थी। 

अनुप्रिया पटेल ने कहा कि ओबीसी के लिए केंद्र में अलग मंत्रालय का गठन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब तक सामाजिक कल्याण मंत्रालय के अंदर ओबीसी कल्याण एक छोटा विभाग है। लेकिन जिस तरह उत्तर प्रदेश में अलग से ओबीसी कल्याण मंत्रालय है, उसी तरह केंद्र में भी बनाया जाना चाहिए। 

अनुप्रिया पटेल ने ओबीसी आरक्षण में क्रीमी लेयर की सीमा को बढ़ाने की भी मांग उठाई और कहा कि इसे बढ़ाकर 15 लाख कर दिया जाना चाहिए लेकिन इसे 6 लाख से बढ़ाकर सिर्फ़ 8 लाख किया गया है।

अनुप्रिया की सियासी ख़्वाहिश

जाति जनगणना के मुद्दे पर बीते दिनों में आक्रामक रूप से मुखर हुईं अनुप्रिया पटेल उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबी सियासी छलांग लगाना चाहती हैं। वह कुर्मी मतों के साथ ही ओबीसी की बाक़ी जातियों में भी घुसपैठ कर यह संदेश देना चाहती हैं कि वह इस समुदाय की लड़ाई लड़ने में पीछे नहीं हैं। इसी के बल पर वह विधानसभा चुनाव में बीजेपी पर ज़्यादा सीटें देने के लिए दबाव बना सकती हैं। अनुप्रिया के पति आशीष पटेल भी राजनीति में सक्रिय हैं। 

उत्तर प्रदेश से और ख़बरें

लुभा रही बीजेपी 

बीजेपी ओबीसी समुदाय को लुभाने में जुटी है। वह पिछड़े वर्ग को राष्ट्रीय आयोग का दर्जा देना, नीट परीक्षा में ओबीसी छात्रों के लिए 27 फ़ीसदी आरक्षण, क्रीमी लेयर की सीमा को 6 लाख से बढ़ाकर 8 लाख करना और केंद्रीय विद्यालयों, जवाहर नवोदय विद्यालय, सैनिक स्कूलों में ओबीसी समूहों के छात्रों के दाखिले को आसान बनाना, मोदी सरकार में 27 मंत्री ओबीसी से हैं, इन क़दमों का प्रचार कर रही है। लेकिन इस सबके बाद भी जाति जनगणना के मुद्दे पर वह फंसी हुई दिखाई देती है। 

सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।

अपनी राय बतायें

उत्तर प्रदेश से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें