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सरकार ने कहा, वॉट्सऐप ने नहीं दी थी सेंध की जानकारी, कंपनी बोली, बताया था

वॉट्सऐप यूजर्स की जासूसी के मामले में असल बात क्या है, यह किसी के सामने नहीं आ पा रही है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि मोदी सरकार और वॉट्सऐप के दावों में विरोधाभास है। अंग्रेजी अख़बार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में सूत्रों के हवाले से छपी एक ख़बर के मुताबिक़, केंद्र सरकार इस बात से नाराज़ है कि न तो वॉट्सऐप और न ही इसके स्वामित्व वाली कंपनी फ़ेसबुक ने उसे भारतीय यूजर्स की सुरक्षा में सेंध लगने के बारे में कोई जानकारी दी, जबकि गर्मियों के दौरान उसकी कंपनी के अधिकारियों के साथ कई बार बैठक हुई थी। 

दूसरी ओर, वॉट्सऐप ने शुक्रवार को कहा है कि उसने भारत और अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों को मई में ‘सुरक्षा से जुड़े मुद्दे’ को लेकर जानकारी दी थी। वॉट्सऐप का कहना है कि उसने इस मुद्दे को हल भी कर लिया था और जिन लोगों को निगरानी की गई, उन तक पहुंचने की कोशिश भी की थी। 

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अख़बार के मुताबिक़, लेकिन सरकार के एक भरोसेमंद सूत्र ने वॉट्सऐप के दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। सूत्र ने कहा कि मई में वॉट्सऐप की ओर से जो जानकारी दी गई थी वह तकनीकी शब्दजाल जैसी थी और इस प्लेटफ़ॉर्म ने इस बात का ख़ुलासा नहीं किया था कि इंडियन यूजर्स की गोपनीयता से कोई समझौता किया गया था। 

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक़, वॉट्सऐप के एक सूत्र ने कहा कि मई में जो मुद्दा था वह सुरक्षा से जुड़ा था और बाद में इसका पेगासस से संबंध पाया गया था। कुल मिलाकर इस बात का पता नहीं चल पा रहा है कि यूजर्स की निजता में किस तरह सेंध लगी है क्योंकि सरकार और कंपनी के दावों में अंतर है। 

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सरकार ने इस मामले में वॉट्सऐप से जवाब तलब किया है और सफ़ाई माँगी है। विपक्षी राजनीतिक दल भी इसे लेकर सरकार पर हमलावर हैं। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के सांसद राहुल गाँधी ने इस विषय के सामने आने के बाद कहा था, 'वॉट्सऐप से पेगैसस के बारे में सरकार की ओर से सवाल पूछना वैसा ही है जैसा दसॉ से यह सवाल करना कि रफ़ाल जेट सौदे से किसने पैसे बनाए।' 

अंग्रेजी अख़बार 'द इंडियन एक्सप्रेस' ने ख़बर दी थी कि अमेरिका के सैन फ़्रांसिस्को की एक संघीय अदालत में एक मुक़दमे की सुनवाई के दौरान वॉट्सऐप ने आरोप लगाया था कि इजरायली एनएसओ समूह ने पेगैसस स्पाइवेयर का इस्तेमाल कर 1400 वॉट्सऐप यूजर्स पर नज़र रखी थी। और ऐसा लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान दो हफ़्ते के लिए किया गया। 

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मुक़दमे के दौरान वॉट्सऐप ने इन यूजर्स की पहचान और फ़ोन नंबर बताने से इनकार कर दिया था। वॉट्सऐप के प्रवक्ता ने कहा था कि इस दौरान इस स्पाइवेयर ने भारतीय पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर नज़र रखी गई थी। जबकि एनएसओ का कहना है कि उसने यह सॉफ़्टवेयर सिर्फ़ सरकारी एजेंसियों को ही दिया और वह भी सिर्फ़ आतंकवाद और अपराध रोकने के लिए। लेकिन सरकार ने इससे साफ़ इनकार किया था। 
गृह मंत्रालय और सूचना प्रसारण मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि इस मामले का सरकार का कोई लेना-देना नहीं है। सरकार ने वॉट्सऐप से पूछा है कि वह बताए कि निजता का उल्लंघन करते हुए कैसे भारतीय यूजर्स को निशाना बनाया गया।

अख़बार के मुताबिक़, इससे पहले एक सरकारी अधिकारी ने कहा था कि वॉट्सऐप क़ानूनी रूप से इस बात के लिए बाध्य है कि वह भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (सीईआरटी-इन) को किसी भी साइबर घटना की जानकारी देगा। अधिकारी ने यह भी कहा था कि ऐसे समय में जब वॉट्सऐप भारत में अपनी पेमेंट सर्विस को लांच करने की तैयारी में है तो वॉट्सऐप यूजर्स की निगरानी का यह मुद्दा सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े करता है। 

अख़बार के मुताबिक़, एक और सरकारी अधिकारी ने कहा था कि सरकार इस बात को लेकर परेशान है कि आख़िर यह कैसा संयोग है कि वॉट्सऐप सुराग लगने की बात को लेकर वैश्विक स्तर पर दबाव में है और एनएसओ ग्रुप (एक अमेरिकी संघीय अदालत में) के साथ यह क़ानूनी मामला भी उसी समय दायर किया गया है।” अख़बार के मुताबिक़, इस बारे में वॉट्सऐप ने कहा है कि यूजर्स की निजता की सुरक्षा का मुद्दा उसके लिये सबसे अहम है। 

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क़मर वहीद नक़वी

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