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कर्नाटक सरकार में असंतोष, दो मंत्री नाराज़, एक मंत्री दे सकते हैं इस्तीफ़ा

बीजेपी हाईकमान तमाम कोशिशों के बाद भी कर्नाटक में राजनीतिक संकट को नहीं सुलझा पाया है। कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री बनाए गए बसवराज बोम्मई को दो-दो मंत्रियों की नाराज़गी का सामना करना पड़ रहा है। चर्चा यहां तक है कि एक मंत्री अपने पद से इस्तीफ़ा दे सकते हैं। 

नाराज़ मंत्रियों में आनंद सिंह और एमटीबी नागराज का नाम शामिल है। आनंद सिंह को जो विभाग मिले हैं, उनसे वे नाख़ुश बताए जा रहे हैं। बड़े व्यवसायी आनंद सिंह पर अवैध खनन के आरोप लग चुके हैं। आनंद सिंह को पर्यटन सहित कुछ और मंत्रालय दिए गए थे लेकिन वह ऊर्जा मंत्रालय चाहते हैं। ऊर्जा मंत्रालय संघ से जुड़े सुनील कुमार करकाला को दिया गया है। 

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बग़ावत करके आए थे आनंद सिंह 

आनंद सिंह 2019 में कांग्रेस-जेडीएस की सरकार से बग़ावत कर बीजेपी में आए थे और कुमारस्वामी की सरकार को गिराने में उनकी बड़ी भूमिका मानी जाती है। मुख्यमंत्री बोम्मई ने उन्हें समझाने की कोशिश की है लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ है और आनंद सिंह ने अपना विधायक कार्यालय बंद कर दिया है। 

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक़, आनंद सिंह रविवार को अपने इस्तीफ़े के साथ मुख्यमंत्री बोम्मई से मिले थे लेकिन मुख्यमंत्री ने उनसे कहा कि इस मसले को जल्द सुलझा लिया जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने भी आनंद सिंह के साथ बैठक कर उन्हें समझाने की कोशिश की है। आनंद सिंह ने अपनी नाराज़गी की बात को स्वीकार किया है और कहा कि येदियुरप्पा अगर मुख्यमंत्री बने रहते तो ऐसे हालात पैदा नहीं होते हालांकि उन्होंने मंत्री पद छोड़ने की बात से इनकार किया है। 

सीबीआई की जांच 

आनंद सिंह कह चुके हैं कांग्रेस-जेडीएस के विधायकों के इस्तीफ़ा देने के कारण ही बीजेपी कर्नाटक की सत्ता में आई है। आनंद सिंह के ख़िलाफ़ अवैध खनन और वन अपराध से जुड़े 15 मुक़दमे लंबित हैं। विजयनगर सीट से विधायक आनंद सिंह के ख़िलाफ़ तीन मामलों में सीबीआई की जांच चल रही है। 

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एमटीबी नागराज भी खफ़ा

एक और मंत्री एमटीबी नागराज ने भी उन्हें मिले विभागों को लेकर नाराज़गी जाहिर की है। नागराज भी कांग्रेस से बीजेपी में आए थे और उन्हें नगरीय प्रशासन विभाग दिया गया था। नागराज ने साफ कहा है कि अगर उन्हें उनकी पसंद का मंत्रालय नहीं मिलता है तो वे आगे काम नहीं करेंगे। 

बीजेपी हाईकमान इस मामले में दबाव में नहीं आना चाहता। अगर वह आनंद सिंह और एमटीबी नागराज की बात को मानता है तो उसे बाक़ी मंत्रियों और विधायकों की बातों को भी मानना होगा।

एएनआई के मुताबिक़, सुरपुरा विधायक राजूगौड़ा, हिरियूर विधायक पूर्णिमा श्रीनिवास और येदियुरप्पा के क़रीबी और सांसद रेणुकाचार्य बोम्मई कैबिनेट में जगह न मिलने को लेकर उनके सामने रोए थे। कांग्रेस-जेडीएस की सरकार गिरने के बाद जब बीजेपी की सरकार बनी थी, तो यहां तीन उप मुख्यमंत्री बनाए गए थे जबकि इस बार किसी भी नेता को उप मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया है। 

कुछ वरिष्ठ विधायक नाराज़

इस बात की भी ख़बरें हैं कि बीजेपी के कुछ वरिष्ठ विधायक कैबिनेट के विस्तार के बाद नाराज़ हैं। इन नेताओं का कहना है कि बाहर से आए लोगों को अहमियत दी गई है जबकि उन्हें बाहर ही रखा गया है। उनका साफ इशारा कांग्रेस-जेडीएस से आए विधायकों की ओर है। 

जिन वरिष्ठ बीजेपी विधायकों के नाराज़ होने की बात कही जा रही है, उनमें एम. सतीश रेड्डी, एसआर विश्वनाथ, एम. कृष्णप्पा, एसए रामदास, अरविंद बेलाड और विजयपुरा के विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल शामिल हैं। 

हालांकि अभी कैबिनेट में चार पद खाली हैं लेकिन बीजेपी हाईकमान के लिए इन पदों को भरना टेढ़ी खीर है।

बीजेपी हाईकमान परेशान

येदियुरप्पा को भी मुख्यमंत्री रहते हुए कई नेताओं से लगातार जूझना पड़ा था और ऐसा लग रहा है कि बोम्मई की राह भी आसान नहीं रहेगी। कर्नाटक में मई, 2023 में विधानसभा चुनाव होने हैं और बीजेपी हाईकमान की कोशिश एकजुट होकर चुनाव में जाने की है लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है। 

बीजेपी हाईकमान तमाम कोशिशों के बाद भी दक्षिण के अपने एकमात्र क़िले को चुस्त-दुरुस्त करने में क़ामयाब नहीं हो पाया है। 

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