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सत्यमेव जयते की हत्या क्या इसलिए कर दी गई कि वह दलित थे?

उसका नाम था सत्यमेव जयते, संस्कृत से ली गई इस लाइन का मतलब है 'सत्य की जीत होती है'। उसके भतीजे का नाम है लिंकन। यह लिया गया है अब्राहम लिंकन से, वही लिंकन जिन्होंने अमेरिका में दास प्रथा को ख़त्म कर दिया। इन दो नामों से यह साफ़ है कि यह परिवार दूसरे दलित परिवारों से हट कर था, यहां शिक्षा की वह लौ जली थी, जिसने लोगों की आत्मा को आलोकित किया था और जो किसी तरह के अन्याय को मानने को तैयार नहीं था।
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लेकिन सत्यमेव की जीत नहीं हुई, उसकी हत्या हो गई। आज़मगढ़ के बांसगाँव के इस दलित ग्राम प्रधान की हत्या कथित रूप से सवर्णों ने कर दी। 

लेकिन क्यों? 

सत्यमेव जयते की हत्या क्या इसलिए कर दी गई कि वह दलित थे? क्या एक पढ़ा लिखा दलित ग्राम-प्रधान कुछ लोगों को खटक रहा था? क्या उनकी हत्या इसलिए की गई ताकि दलितों के मन में में ख़ौफ़ पैदा किया जा सके?

परिजनों का आरोप

मृतक के परिजनों का यही आरोप है। 

बता दें कि दलित-बहुल इस गाँव में शुक्रवार को ग्राम प्रधान को सवर्णों ने कथित रूप से गोली मार कर हत्या कर दी। 

ग्राम प्रधान सत्यमेव जयते के भतीजे लिंकन ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि यह हत्या जातीय नफ़रत की वजह से हुई। सवर्ण लोग एक दलित के प्रधान बनने और उनके सामने उसके तन कर खड़े होने को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे। 
लिंकन ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, 'वे सत्यमेव की हैसियत से ईर्ष्या करते थे। वे इस बात से चिढ़ते थे कि वह सबके सामने सिर उठा कर चल रहा है। उन्होंने उसकी हत्या कर दी क्योंकि वे यह बर्दाश्त नहीं कर सकते थे कि एक दलित उन्हें किसी बात पर ना कहे।'

लिंकन ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि सूर्यांश कुमार दुबे सत्यमेव पर यह दबाव बना रहे थे कि वह उसे यह प्रमाणपत्र दें कि वह गाँव में रहते थे। दुबे तीन बार सत्यमेव के पास आए। मृतक सत्यमेव के भतीजे लिंकन ने कहा,

'ठाकुरों को इस बात पर गुस्सा आता था कि कोई दलित उनके सामने सिर उठा कर खड़ा है। सत्यमेव की हत्या इसलिए कर दी गई ताकि दलितों को उनकी औकात बताई जा सके।'

माँ को गालियाँ दीं

लिंकन के मुताबिक़, 'अभियुक्त हत्या के बाद सत्यमेव की माँ के पास गए, उन्हें जातिसूचक गालियाँ दीं और कहा कि उन लोगों ने सत्यमेव की हत्या कर दी है, वह जाएं और खुद देख लें।'
मृतक की पत्नी मुन्नी के अनुसार, 'शुक्रवार की शाम विवेक सिंह उनके यहां गए और सत्यमेव को मोटरसाइकिल पर बैठा कर अपने साथ पास के ट्यूब वेल पर ले गए। बाद में विवेक सिंह, सूर्यांश कुमार दुबे, बृजेंद्र सिंह और वसीम उसे सिंह के तालाब पर ले गए। उन लोगों ने वहाँ सत्यमेव की हत्या कर दी।'

दलित का संपन्न होना बर्दाश्त नहीं?

इस हत्याकांड में ज़मीन का मामला भी जुड़ा हुआ है। गाँव के गप्पू नामक व्यक्ति ने अपने निजी तालाब के लिए सार्वजनिक रास्ते की ज़मीन को हड़प लिया, इस पर समझौता होने के बावजूद उसने वह ज़मीन नहीं छोड़ी। इस वजह से भी पहले से ही तनाव चल रहा था। 
रामू राम ने कहा कि गाँव के कई दलितों ने पढ़-लिख लिया है, वे शहरों में रहते हैं, अच्छा पैसा कमाते हैं। इससे गाँव के सवर्णों का गुस्सा और असंतोष बढ़ा हुआ है। रामू राम स्वयं अंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया में काम करते हैं और कोलकाता में रहते हैं।
लिंकन ने कहा कि पढ़ाई-लिखाई, अच्छी नौकरी, अच्छा पैसा और कड़ी मेहनत की वजह से इस संयुक्त परिवार में 15 बीघा ज़मीन है। यह भी लोगों को हजम नहीं हो रहा है। 

हत्या के बाद तनाव

सत्यमेव की कथित हत्या के बाद गाँव के लोगों में गुस्सा फैल गया। वे विरोध प्रदर्शन करने लगे, पुलिस पहुँची, उसने लाठीचार्ज किया। सूरज नाम के एक आठ साल के बच्चे की मौत कथित रूप से गाड़ी से कुचल कर हो गई। 
दलित-बहुल इस गाँव में ज़बरदस्त तनाव है। वहाँ पुलिस तैनात कर दी गई। आज़मगढ़ रेंज के डीआईजी ने कहा कि मामले की जाँच शुरू हो चुकी है। उन्होंने कहा कि हत्या का मक़सद चाहे जो हो, यह अपने आप में बहुत ही गंभीर मामला है। सत्यमेव गाँव प्रधान यानी निर्वाचित प्रतिनिधि थे और निर्वाचित प्रतिनिधि की हत्या अपने आप में गंभीर बात है, इसके पीछ मक़सद चाहे कुछ भी हो। 

कर्नाटक

दलित उत्पीड़न की घटना देश के अलग-अलग हिस्सों में होती रहती है और वहां से इस तरह की ख़बरे लगभग हर समय आती ही रहती हैं। कर्नाटक में हुई एक वारदात में एक सवर्ण की मोटर साइकिल छू लेने के कारण एक दलित को कथित तौर पर नंगा कर बुरी तरह पीटा गया। उसके परिवार वालों को भी नहीं बख्शा गया और उन्हें भी बुरी तरह मारा-पीटा गया।

राजधानी बेंगलुरू से क़रीब 530 किलोमीटर दूर विजयपुर ज़िले की यह घटना है। एक वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि कुछ लोगों ने एक व्यक्ति को नंगा कर ज़मीन पर लिटा दिया है और उसे लाठियों व जूतों से बुरी तरह पीट रहे हैं। 

कर्नाटक के चित्रदुर्ग से बीजेपी के एक दलित सांसद को एक गाँव में वहाँ के लोगों ने आने ही नहीं दिया। सांसद का नाम ए. नारायणस्वामी है।

सांसद सांसद तुमाकुरु ज़िले के पावागड़ा इलाक़े के परामलहल्ली गाँव में जा रहे थे तभी इस गाँव के पिछड़ी जाति के लोगों ने उन्हें गांव में आने से रोक दिया। इस गाँव में काडू गोला जनजाति के लोग रहते हैं। जब यह घटना हुई तो सांसद अपने साथियों के साथ गाँव में विकास कार्यों का जायजा लेने के लिए जा रहे थे।

महाराष्ट्र

महाराष्ट्र के पुणे में दलित समाज के एक युवक की बेरहमी से हत्या कर दी गई। युवक का कसूर सिर्फ़ इतना था कि वह सवर्ण जाति की एक युवती से प्यार करता था। युवक का नाम विराज विलास जगताप था और उसकी उम्र 20 साल थी। 

‘इंडिया टुडे’ के मुताबिक़, विराज ने मौत से पहले दिए अपने अंतिम बयान में उसके साथ हुई क्रूरता को बताया है। बयान में विराज ने कहा था कि वह अपनी मोटरसाइकिल से जा रहा था, तभी युवती के रिश्तेदारों ने एक ऑटो से उसे टक्कर मार दी। विराज ने कहा था कि उसके नीचे गिरने के बाद, अभियुक्त आए और उस पर रॉड और पत्थरों से हमला कर दिया। 

गुजरात

गुजरात के बनासकांठा में एक दलित सैनिक को शादी में घोड़ी चढ़ने से रोक दिया गया, बाद में पुलिस हस्तक्षेप के बाद वह बारात लेकर जा सका। पुलिस ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि इस मामले में एफ़आईआर दर्ज कर लिया गया है, स्थिति नियंत्रण में है। 

संदीपद गाँव के आकाश कोटडिया की शादी थी, वह सेना में है और जम्मू-कश्मीर में तैनात है। जब वह बारात लेकर निकला, गाँव के दबंग सवर्णों ने उसे घोड़ी चढ़ने से रोका। इसके बाद बारात पर पथराव किया गया। 

मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के शिवपुरी में दो दलित बच्चों को खुले में शौच करने की वजह से पीट-पीट कर मार डाला गया।  यह वारदात भावकेडी गाँव की है। पुलिस ने 12 साल की उम्र के इन दो बच्चों की पहचान रोशनी और अविनाश के रूप में की है। ये बच्चे पंचायत भवन के सामने ही खुले में शौच कर रहे थे। इस पर कुछ लोगों ने उन्हें पकड़ कर बुरी तरह पीटा। बाद में उन्हें पास के अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने कहा कि उन्हें मृत घोषित कर दिया। 

उत्तर प्रदेश

हरदोई में 20 साल के युवक को कुछ दंबंगों ने जिंदा जला दिया। बताया जा रहा है कि उसके दूसरी जाति की महिला के साथ संबंध थे। इस घटना का सबसे दुखद पहलू यह है कि बेटे की मौत के सदमे में युवक की मां की भी मौत हो गई है।

कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश के ही जौनपुर में भी दलित समुदाय के लोगों के साथ ऐसी ही बर्बर घटना हुई थी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसमें दलित समुदाय के तीन लोगों को नंगा कर पीटते हुए देखा गया था। इन पर चोरी की कोशिश करने का आरोप लगाया गया था।

सत्यमेव जयते की हत्या इसी कड़ी का एक हिस्सा है, इसे अलग या अनूठी घटना मानना भूल होगी। अभी भी दलितों पर आत्याचार होते हैं, उन्हें उनका ह़क नहीं मिलता है, उन्हें जातिसचूक गालियाँ दी जाती हैं, उन्हें अपमानित किया जाता है, जाति के आधार पर भेदभाव होता है। सत्यमेव जयते बस एक और नाम है। 
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क़मर वहीद नक़वी

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