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भारत-चीन सीमा पर तनाव क्या कोरोना संकट से ध्यान हटाने के लिए है?

भारत-चीन सीमा पर 1967 के सिकिक्म संघर्ष के बाद से अब तक गोली नहीं चली है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह दोनों देशों के राजनीतिक नेतृत्व की परिपक्व समझ का प्रतीक है। लेकिन आज का चीनी नेतृत्व इस समझ को नज़रअंदाज करने पर तुला हुआ लगता है।
रंजीत कुमार
ऐसे वक़्त जब भारत कोरोना महामारी से राष्ट्रीय स्तर पर जूझ रहा है, बीते एक महीने के भीतर ही भारत और चीन की सीमा के कई इलाक़ों में दोनों देशों के सैनिकों के बीच तनातनी का माहौल पैदा होना चिंताजनक है।
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अंग्रेजी मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ की ताज़ा रिपोर्ट इस बात की ओर इशारा करती है कि चीन भारत की सीमाओं पर तनाव का माहौल पैदा कर भारत पर सैन्य दबाव बढ़ाना चाहता है।  

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भारत को धमकी

रिपोर्ट से साफ़ है कि लद्दाख की गलवान नदी के इलाक़े में चीनी सेना अपने टेन्ट लगा कर फिर डोकलाम जैसी स्थिति पैदा करने का इरादा रखती है। याद दिला दें कि 2017 के जून में भारत और चीन के सैनिक 73 दिनों तक आमने सामने तैनात थे और ‘ग्लोबल टाइम्स’ भारत को धमकियाँ दे रहा था कि भारत को काफी बुरे और अकल्पनीय नतीजे भुगतने होंगे।

सामरिक हलकों में सवाल य़ह उठ रहा है कि इसके पीछे चीन की क्या रणनीति है। चीन ने सीमांत इलाक़ों में अपनी ताज़ा हरक़तें फरवरी महीने से ही शुरू कर दी थीं जब कोरोना की वजह से चीन पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक हमले शुरू हो चुके थे।
कहा जाता है कि कोरोना को लेकर अपनी चाल छुपाने के इरादे से चीन ने अपने नागरिकों और दुनिया का ध्यान हटाने के लिये भारत सहित दुनिया के बाकी इलाकों में सैन्य हलचल तेज़ की है।

चीन की मंशा?

चीन ने न केवल भारत चीन सीमा बल्कि दक्षिण चीन सागर के इलाके में भी इसी तरह कई द्वीपों को अपना  प्रशासनिक इलाक़ा बताने वाला नाम घोषित किया है और इस समुद्री इलाके के तटीय देशों की सम्प्रभुता को चुनौती दी है। सवाल यह उठता है कि क्या चीनी कम्युनिस्ट नेतृत्व की मंशा कोरोना की वजह से दबी जुबान से घरेलू आलोचना की दिशा मोड़ना है?
आखिर क्यों कोरोना के खिलाफ चल रहे विश्वव्यापी युद्ध के दौर में चीन दक्षिण चीन सागर से लेकर भारतीय सीमा तक सैन्य तनाव पैदा कर रहा है। क्या उसे लग रहा है कि अपने प्रादेशिक दावे के विस्तार का यह स्वर्णिम मौका है?
क्या चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने देशवासियों को बताना चाहते हैं कि वह चीन के चक्रवर्ती सम्राट हैं, जिनकी आक्रामक राष्ट्रवादी नीतियों की वजह से पूरी दुनिया पर चीन का प्रभुत्व स्थापित होगा?

उत्तरी सिक्किम

बीते पांच मई को ही सिक्किम के सीमांत नाकुला इलाक़े में भारत और चीन के सैनिक आपस में गुत्थमगुत्था हुए थे और एक दूसरे पर पत्थर भी फेंंके थे। भारत-चीन सीमा पर 1967 के सिकिक्म संघर्ष के बाद से अब तक गोली नहीं चली है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह दोनों देशों के राजनीतिक नेतृत्व की परिपक्व समझ का प्रतीक है। लेकिन आज का चीनी नेतृत्व इस समझ को नज़रअंदाज करने पर तुला हुआ लगता है।
1967 के बाद से भारत- चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा पर 2013 के बाद से ही खुले तौर पर अतिक्रमण का दौर चीनी सेना ने शुरू किया था। सिकिक्म के बाद लद्दाख की ही पेंगोंग झील के इलाक़े में भारत और चीन के सैनिक फिर आमने-सामने हुए। लेकिन इससे भी चीनी सेना का मन नहीं भरा तो अब लद्दाख के गालवान नदी घाटी इलाक़े में भारत और चीन के सैनिक आमने सामने हो गए हैं।

चीनी गश्त

इस इलाके में चीनी सेना अक्सर गश्ती लगाते हुए भारतीय इलाक़े में घुस जाती थी जिसे रोकने के लिये भारतीय सेना ने कुछ ढाँचागत सुविधाएँ बनाईं जिस पर चीन ने एतराज किया और अब चीनी सेना ने इस इलाक़े के पीछे अपने सैनिकों को भारी संख्या में तैनात कर दिया है।
चीनी सैनिक वहाँ लगाए गए 80 टेंटों में रह रहे हैं और कथित तौर पर अपने भू-भाग की रक्षा कर रहे हैं।
ग्लोबल टाइम्स ने दावा किया है कि गलवान घाटी के चीनी इलाक़े में भारत ने हाल में सैन्य सुविधा बढ़ाने वाले अवैध ढाँचागत निर्माण किये हैं जिसका चीनी सेना ने दृढ़ जवाब दिया है। इसके जवाब में चीन के सीमांत सैनिकों ने इस इलाक़े पर अपना नियंत्रण मजबूत करने के लिये ज़रूरी कदम उठाए हैं।

सीमा पर तनाव

ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक़, मई महीने के शुरू से ही भारतीय सेना गलवान घाटी में सीमा रेखा पार करती रही है और चीनी क्षेत्र में घुसती रही है।
इस इलाक़े में भारतीय सेना ने रक्षा- किलेबंदी की थी और चीनी सेनाओं की गतिविधियों और गश्ती में अड़चन पैदा करने के लिये बाधाएँ खड़ी की थीं।
ग्लोबल टाइम्स ने चीनी सैन्य सूत्रों के हवाले से कहा है कि भारतीय सेना ने जानबूझ कर चीनी सेना के साथ टकराव शुरू किया और एकपक्षीय तौर पर सीमांत इलाक़ों की नियंत्रण स्थिति बदलने की कोशिश की।

चीन का आरोप

ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक़, गलवान घाटी इलाक़ा चीनी भू-भाग है और स्थानीय सीमा नियंत्रण स्थिति पूरी तरह साफ़ है। भारतीय सेना की कार्रवाई ने भारत- चीन सीमा पर हुए समझौतों का हनन किया है, चीनी प्रादेशिक इलाक़े का उल्लंघन किया है और दोनों देशों के बीच सैन्य सम्बन्धों को नुक़सान पहुँचाया है।

ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक़, मौजूदा माहौल के अनुरूप चीनी सेना ने घटनास्थल पर जवाब देने के लिये उपाय  मजबूत कर लिये हैं और सीमांत इलाकों पर नियंत्रण बनाए रखा है। चीनी सेना चीनी भू-भाग की दृढ़ता से रक्षा कर रही है और इलाक़े में शांति व स्थिरता बनाए रखने के लिये कृतसंकल्प है। चीनी सैन्य सूत्रों के अनुसार,  भारत और चीन के सीमांत सैनिक बैठकों और प्रतिनिधियों के जरिये आपस में सम्पर्क बनाए रखेंगे।

आम तौर पर भारत चीन सीमा पर अतिक्रमण और तनाव की ख़बरें ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित नहीं होती हैं। लेकिन गलवान नदी के इलाक़ में चीनी सेना द्वारा दृढ़ कदम उठाए जाने का इरादा चीनी सैन्य सूत्रों के हवाले से जाहिर कर चीन ने यह संकेत दिया है कि वह गलवान नदी इलाके में अपने सैनिक पीछे नहीं हटाएगा। चीन के इस रवैये से भारत चीन सीमा पर नये सिरे से तनाव पैदा होगा जिससे निबटना भारत के राजनीतिक नेतृत्व के लिये मुश्किल होगा।

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