loader

आपराधिक केस सार्वजनिक नहीं करने पर बीजेपी, कांग्रेस सहित कई दलों पर जुर्माना

चुनाव उम्मीदवार बनाने वालों के ख़िलाफ़ दर्ज आपराधिक केस सार्वजनिक नहीं करने पर सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी, कांग्रेस सहित 9 दलों को दोषी पाया है और इसमें से 8 पर जुर्माना लगाया है। 'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के अनुसार बीजेपी, कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (राजद), जनता दल यूनाइटेड, भाकपा और लोक जन शक्ति पार्टी पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। सीपीएम और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी पर 5-5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। पिछले साल के बिहार विधानसभा चुनाव में आदेश का पालन नहीं करने पर यह कार्रवाई की गई है।

अदालत ने यह फ़ैसला एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याचिका में उन राजनीतिक दलों के चुनाव चिन्ह को निलंबित करने की माँग की गई थी जो अपने उम्मीदवारों की आपराधिक पृष्ठभूमि का खुलासा नहीं करते हैं। उसमें यह भी मांग की गई थी कि उम्मीदवारों के ख़िलाफ़ दर्ज मामले सार्वजनिक नहीं करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का मामला माना जाए। 

ताज़ा ख़बरें

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल फ़रवरी में अपने फ़ैसले में कहा था कि उम्मीदवारों को इन विवरणों को प्रत्याशी चयन के 48 घंटों के भीतर या नामांकन पत्र दाखिल करने की पहली तारीख़ से कम से कम दो सप्ताह पहले अपलोड करना होगा। अदालत ने वह फ़ैसला पिछले साल नवंबर में बिहार विधानसभा चुनाव से जुड़े एक मामले में दिया था। 

पहले के उस फ़ैसले में कहा गया था कि सभी राजनीतिक दलों को यह बताना होगा कि उन्होंने आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवारों को क्यों चुना और ऐसे उम्मीदवारों के चयन के कारणों के साथ मामलों के विवरण अपनी पार्टी की वेबसाइट पर खुलासा करें। चुनाव आयोग ने भी राजनीतिक दलों को उम्मीदवारों के बारे में यह जानकारी अख़बारों में प्रकाशित करने का निर्देश दिया था। इसका सही से पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।

याचिका पर सुनवाई करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन्ना, न्यायमूर्ति विनीत सरन और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की बेंच ने मंगलवार को कहा है कि राजनीतिक दलों को अपने उम्मीदवारों के चयन के 48 घंटों के भीतर आपराधिक रिकॉर्ड सार्वजनिक करना ही होगा। इसके साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि सांसदों, विधायकों के ख़िलाफ़ दर्ज आपराधिक मामले हाई कोर्ट की मंजूरी के बिना वापस नहीं लिए जा सकेंगे। 
सुप्रीम कोर्ट का यह फ़ैसला काफ़ी अहम इसलिए है क्योंकि राजनीति के अपराधीकरण या अपराध के राजनीतिकरण को ख़त्म किए जाने की वकालत की जाती रही है। लेकिन हर प्रयास के बाद भी ऐसा होता नहीं दिखता है।

सांसदों और विधायकों के ख़िलाफ़ दर्ज ऐसे मामले काफ़ी ज़्यादा आते रहे हैं। चुनाव सुधार के लिए काम करने वाली संस्था एसोसिएशन फ़ोर डेमोक्रेटिक रिफ़ार्म्स यानी एडीआर इसका आकलन करती रही है। हाल ही में केंद्रीय कैबिनेट विस्तार के बाद एडीआर ने दागी मंत्रियों पर ऐसी ही एक रिपोर्ट जारी की है।

एडीआर की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ कैबिनेट में शामिल 78 मंत्रियों में से 42 फ़ीसदी ने अपने ख़िलाफ़ आपराधिक मामले घोषित किए हैं, जिनमें से चार पर हत्या के प्रयास से जुड़े मामले हैं। एडीआर ने इसी साल जुलाई में तब रिपोर्ट जारी की जब 15 नए कैबिनेट मंत्रियों और 28 राज्य मंत्रियों ने शपथ ली थी। इसी के बाद मंत्रिपरिषद की संख्या 78 हो गई।

ख़ास ख़बरें

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने चुनावी हलफनामों का हवाला देते हुए कहा है कि विश्लेषण किए गए सभी मंत्रियों में से 33 (42 फ़ीसदी) ने अपने ख़िलाफ़ आपराधिक मामले घोषित किए हैं। लगभग 24 यानी 31 प्रतिशत मंत्रियों ने अपने ख़िलाफ़ दर्ज हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती आदि से संबंधित मामलों सहित गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए हैं।

कूचबिहार निर्वाचन क्षेत्र से निसिथ प्रमाणिक, जिन्हें गृह राज्य मंत्री नियुक्त किया गया है, ने अपने ख़िलाफ़ हत्या (आईपीसी धारा-302) से संबंधित मामला घोषित किया है। 35 साल की उम्र में वह कैबिनेट में सबसे कम उम्र के मंत्री भी हैं। चार मंत्रियों- जॉन बारला, प्रमाणिक, पंकज चौधरी और वी मुरलीधरन ने हत्या के प्रयास (आईपीसी की धारा-307) से जुड़े मामले घोषित किए हैं। 

देश से और ख़बरें

विश्लेषण किए गए मंत्रियों में से 70 (90 फ़ीसदी) करोड़पति हैं और प्रति मंत्री औसत संपत्ति 16.24 करोड़ रुपये हैं। चार मंत्रियों ने 50 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति घोषित की है। ये मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, पीयूष गोयल, नारायण राणे और राजीव चंद्रशेखर हैं।

आपराधिक पृष्ठभूमि वाले सांसद भारत में कोई नया मामला नहीं है, लेकिन नरेंद्र मोदी ने 2014 में जिस तरह से राजनीति में अपराध, पैसे के प्रभाव और भ्रष्टाचार को ख़त्म करने का वादा किया था उससे काफ़ी ज़्यादा उम्मीदें थीं।

लेकिन इसके कम होने की तो बात ही दूर है, और ज़्यादा मामले बढ़ते रहे हैं। एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार 2019 में चुनाव के बाद संसद के निचले सदन के नए सदस्यों में से लगभग 43% ने आपराधिक आरोपों का सामना करने के बावजूद जीत हासिल की। यह उनके द्वारा दायर चुनावी हलफ़नामे में ही कहा गया है। रिपोर्ट के अनुसार, उनमें से एक चौथाई से अधिक बलात्कार, हत्या या हत्या के प्रयास से संबंधित हैं।

एडीआर की ही एक रिपोर्ट के अनुसार पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई. क़ुरैशी ने कहा था कि 2004 के राष्ट्रीय चुनाव में लंबित आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवारों का प्रतिशत 24 प्रतिशत था, जो 2009 में बढ़कर 33 प्रतिशत, 2014 में 34 प्रतिशत था जो 2019 में और ज़्यादा बढ़कर 43 प्रतिशत हो गया।

सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।

अपनी राय बतायें

देश से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें