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उत्तराखंड: बीजेपी को फिर बदलना होगा सीएम?, कांग्रेस ने दिया नियम का हवाला 

इस साल मार्च के महीने में राजनीतिक संकट के दौर से गुजर चुका उत्तराखंड क्या एक बार फिर ऐसे किसी संकट का सामना कर सकता है। कांग्रेस ने संवैधानिक नियमों का हवाला देते हुए इस ओर इशारा किया है। मार्च में बीजेपी ने त्रिवेंद्र सिंह रावत को मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाकर तीरथ सिंह रावत को इस कुर्सी पर बैठाया था। 

उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नवप्रभात ने कहा है कि राज्य में बीजेपी को एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन करना पड़ सकता है। एएनआई से बात करते हुए नव प्रभात ने कहा, “वर्तमान मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत विधायक नहीं हैं। उन्हें इस पद पर बने रहने के लिए मुख्यमंत्री चुने जाने के दिन से छह महीने के अंदर विधानसभा का निर्वाचित सदस्य बनना होगा और यह समय सीमा 9 सितंबर को ख़त्म हो जाएगी।” 

राज्य सरकार में मंत्री रह चुके नव प्रभात ने कहा कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुच्छेद 151ए के मुताबिक़, ऐसे राज्य में जहां चुनाव होने में एक साल का वक़्त बचा हो, उपचुनाव नहीं कराए जा सकते। 

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कांग्रेस नेता ने एएनआई से कहा कि राज्य की विधानसभा का कार्यकाल मार्च 2022 में ख़त्म होगा। इसका मतलब अभी 9 महीने का वक़्त बचा हुआ है। लेकिन अनुच्छेद 151ए के हिसाब से देखें तो तीरथ सिंह रावत के लिए 9 सितंबर, 2021 के बाद मुख्यमंत्री के पद पर बने रहना संभव नहीं हो पाएगा। 

कांग्रेस नेता ने कहा कि ऐसे में उत्तराखंड में एक बार फिर नेतृत्व का परिवर्तन करना होगा। राज्य में अभी विधानसभा की दो सीटें खाली हैं लेकिन कांग्रेस नेता ने जिस नियम का हवाला दिया है, उसके हिसाब से राज्य में उपचुनाव नहीं कराए जा सकते। 

खाली सीटों के नाम गंगोत्री और हल्द्वानी हैं। ये दोनों सीटें यहां के विधायकों के इंतकाल के बाद खाली हुई हैं। गंगोत्री सीट से गोपाल सिंह रावत विधायक थे जबकि हल्द्वानी सीट से विपक्ष की नेता इंदिरा हृदयेश विधायक थीं। नव प्रभात का कहना है कि बीजेपी के पास कोई विकल्प नहीं है और उसे किसी दूसरे शख़्स को मुख्यमंत्री बनाना होगा। 

तीरथ सिंह रावत अभी पौड़ी सीट से सांसद हैं और उन्होंने 10 मार्च, 2021 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। 

Congress nav prabhat said Constitutional Crisis In Uttarakhand  - Satya Hindi

सरकार ने दिया जवाब 

लेकिन उत्तराखंड सरकार के प्रवक्ता और सरकार में मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा है कि कांग्रेस नेता आधी-अधूरी जानकारी देकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। उनियाल ने कहा कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम का यह अनुच्छेद चुनाव से जुड़ा है और यह कहता है कि किसी भी खाली सीट पर चुनाव छह महीने के अंदर हो जाना चाहिए। 

उनियाल ने कहा कि लेकिन ऐसे राज्यों में जहां विधानसभा चुनाव होने में एक साल से कम का वक़्त बचा हो और वहां उप चुनाव होने हों, चुनाव आयुक्त अपने विवेकाधिकार की शक्ति से इस बारे में फ़ैसला लेते हैं।

चुनावी तैयारियों में जुटी बीजेपी 

इस संवैधानिक संकट से शायद बीजेपी बेख़बर है और वह चुनावी तैयारियों में जुटी हुई है। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष ने कुछ दिन पहले राज्य का दौरा किया था और चुनावी तैयारियों को लेकर पार्टी नेताओं के साथ बातचीत की थी। 

बीजेपी 27 से 29 जून तक चुनावी तैयारियों को लेकर बैठक बुलाने जा रही है और इसमें राज्य बीजेपी के तमाम बड़े नेताओं के अलावा पार्टी के सभी प्रकोष्ठों के पदाधिकारी भी शामिल होंगे।

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त्रिवेंद्र-तीरथ आमने-सामने 

इन दिनों कुंभ मेले के दौरान कोरोना की फ़र्जी टेस्टिंग के मामले में त्रिवेंद्र और तीरथ सिंह के आमने-सामने होने के कारण राज्य का सियासी माहौल गर्म है। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के इस बयान पर कि फ़र्जी टेस्टिंग का मामला उनके मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने से पहले का है, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा है कि स मामले की जांच हाई कोर्ट के किसी वर्तमान जज से कराई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना की फ़र्जी रिपोर्ट बनाने के आरोपों की जांच होनी चाहिए और जो लोग इसमें शामिल रहे हैं, उनके ख़िलाफ़ हत्या का मुक़दमा दर्ज होना चाहिए। 

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