loader

दिल्ली नगर निगम चुनाव 2022 0 / 250

BJP
0
AAP
0
CONG
0
OTH
0

एम्स के बाद सीबीआई जाँच में भी सुशांत की आत्महत्या के संकेत; रिया कैसे फँसीं?

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में अब सीबीआई की रिपोर्ट भी आत्महत्या की ओर ही इशारा कर रही है। एम्स ने हाल ही में मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर कहा है कि सुशांत ने आत्महत्या की थी। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अब सीबीआई की जाँच में भी कुछ ऐसे तथ्य आए हैं। सुशांत की मौत के सीन को रिक्रिएट किया गया यानी उस घटना को उसी तरह से पेश कर पड़ताल की गई। लेकिन इसमें भी कोई गड़बड़ी नहीं मिली। सुशांत के बैंक खाते के ऑडिट में भी कोई ऐसी गड़बड़ी नहीं पाई गई है जिससे कुछ संदेह पैदा हो। तो सवाल है कि जिस मामले में एक सबूत या घटना भी यह इशारा नहीं कर रहा हो कि उसमें किसी साज़िश हुई है उसमें तीन-तीन एजेंसियाँ क्यों लगाई गईं और मुख्यधारा की मीडिया में दिन-रात इसे क्यों चलाया गया? 

सम्बंधित खबरें
बहरहाल, इस पूरे विवाद के केंद्र में सुशांत की दोस्त रिया चक्रवर्ती रहीं। उन पर तरह-तरह के आरोप लगाए गए और इसमें से भी अधिकतर आरोप तो गढ़े गए। लेकिन अब उन्हीं रिया के बारे में सीबीआई को कुछ नहीं मिला है। 'द इंडियन एक्सप्रेस' ने सीबीआई सूत्रों के हवाले से ख़बर दी है कि इस पूरे मामले में अब तक कुछ भी ऐसा नहीं है जिससे लगे कि रिया चक्रवर्ती ने पैसे के लिए सुशांत को आत्महत्या के लिए उकसाया हो। 

जिस रिया चक्रवर्ती के बारे में सीबीआई की रिपोर्ट किसी संदेह से इनकार कर रही है उन्हीं के ख़िलाफ़ सुशांत के पिता केके सिंह ने बिहार में एफ़आईआर दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि सुशांत के बैंक खाते से 15 करोड़ रुपये निकाले गए थे और उसके लिए उन्होंने रिया चक्रवर्ती पर आरोप लगाया था। 

पहले भी इन आरोपों की जाँच प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने की थी और उसे सुशांत के पिता के के सिंह के आरोप सही नहीं लगे। सुशांत के बैंक खाते से इतने रुपये रिया को ट्रांसफ़र किए जाने का ईडी को कोई भी सबूत नहीं मिला।

अब सीबीआई भी ऐसी ही बात कह रही है। 'द इंडियन एक्सप्रेस' के अनुसार, पिछले पाँच साल में सुशांत के खाते से 70 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है जिसमें से 55 लाख रुपये के लेनदेन से रिया चक्रवर्ती का संबंध है। अख़बार ने ख़बर दी है कि इसमें से अधिकतर पैसे यात्रा, स्पा और गिफ़्ट पर ख़र्च किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, जाँच से जुड़े एक सीबीआई अधिकारी ने कहा, 'आत्महत्या के लिए रिया अभी भी सवालों के घेरे में हैं। लेकिन यह सच है कि सीबीआई को अभी तक उकसाने वाला कोई भी कारण नहीं मिला है। राजपूत के खाते का फोरेंसिक ऑडिट किया गया था। ऑडिट रिपोर्ट में कुछ भी ठोस नहीं है जिससे लगे कि रिया ने रुपये की निकासी की और इससे सुशांत ने आत्महत्या कर ली हो। राजपूत द्वारा उस पर किए गए ख़र्च तुलनात्मक रूप से छोटे हैं और एक दोस्त पर ख़र्च के रूप में आसानी से सफ़ाई दी जा सकती है। हालाँकि, आत्महत्या करने के कई एंगल हैं और हमारी जाँच अभी जारी है।'

देखिए वीडियो, सुशांत मामले में पत्रकारिता या गुंडागर्दी?

रिपोर्ट में सीबीआई सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि सीबीआई ने इस मामले में एक दर्जन से ज़्यादा लोगों से पूछताछ की। इन लोगों में रिया व उनके परिवार वाले, सुशांत के परिवार वाले, उनके स्टाफ़ व हाउस मैनेजर, जहाँ पर उनके खाते हैं उस बैंक के स्टाफ़, उनके मनोचिकित्सक, उनके दोस्त और जानपहचान वाले शामिल हैं। 

सीबीआई की यह जाँच रिपोर्ट एम्स की रिपोर्ट की तरह ही लगती है। एम्स पैनल ने सुशांत सिंह की हत्या की संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। डॉक्टरों की एक टीम ने केंद्रीय जाँच ब्यूरो को सौंपी एक रिपोर्ट में अभिनेता को ज़हर दिए जाने या गला घोंटने की आशंकाओं से इनकार किया है।

एम्स पैनल ने मुंबई के उस अस्पताल की राय पर अपनी सहमति जाहिर की है, जिसने अभिनेता का पोस्टमॉर्टम किया था। मुंबई के अस्पताल ने अपनी रिपोर्ट में मौत का कारण 'फाँसी के कारण श्वास अवरोध' बताया था। रिपोर्ट में कहा गया कि 'परिस्थितिजन्य साक्ष्य से भी लगता है कि अभिनेता ने आत्महत्या की है, उनकी हत्या नहीं हुई है।' 

अब ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, सीबीआई ने सुशांत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की आत्महत्या की भी जाँच की है और उसे दोनों आत्महत्याओं में कोई संबंध नहीं मिला है। सूत्रों ने कहा कि सीबीआई अब उन कारणों पर ध्यान दे रही है जिसके कारण अभिनेता को अपनी जान लेने के लिए मजबूर होना पड़ा होगा। अब जिसकी जाँच की जा रही है उसमें शामिल है- चक्रवर्ती द्वारा निभाई गई कोई भी भूमिका; बॉलीवुड में पेशेवर प्रतिद्वंद्विता और भाई-भतीजावाद; ड्रग्स के दुरुपयोग और राजपूत के मानसिक स्वास्थ्य का प्रभाव।

सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।

अपनी राय बतायें

देश से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें