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रामदेव की डेयरी का काम देखने वाले बंसल की कोरोना से मौत

एलोपैथिक दवाओं के ख़िलाफ़ दिए गए बयानों के कारण इन दिनों मीडिया में चर्चाओं का केंद्र बने योग गुरू रामदेव के डेयरी बिजनेस का काम देखने वाले शख़्स की कोरोना से मौत हो गयी है। इनका नाम सुनील बंसल था और वह पंतजलि आयुर्वेद लिमिटेड की डेयरी डिविजन में वाइस प्रेसीडेंट के पद पर थे। 57 साल के बंसल की मौत पर पतंजलि ने कहा है कि बंसल का इलाज एलोपैथिक दवाओं के जरिए चल रहा था। 

पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड ने कहा है कि बंसल की मौत राजस्थान के एक अस्पताल में 19 मई को कोरोना वायरस से हुई और बंसल की पत्नी इस अस्पताल के स्वास्थ्य महकमे में सीनियर अफ़सर हैं। पतंंजलि ने कहा है कि एलोपैथिक दवाओं के जरिये चल रहे बंसल के इलाज में उसकी कोई भूमिका नहीं रही है क्योंकि उनकी पत्नी ही उनकी देख-रेख कर रही थीं। कंपनी लगातार उनकी सेहत के बारे में ख़बर लेती रहती थी। 

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बंसल को डेयरी साइंस का जानकार माना जाता था और उन्होंने जनवरी, 2018 में पतंजलि के डेयरी व्यवसाय को ज्वाइन किया था। उस वक़्त पतंजलि लिमिटेड ने घोषणा की थी कि वह दूध से बने कई उत्पादों को लांच करेगा। 

कोरोनिल को किया था लांच 

रामदेव ने पिछले साल कोरोना के इलाज का दावा करने वाली दवा कोरोनिल को लांच किया था लेकिन तमाम विवादों में घिरने के बाद इस साल फरवरी में उन्होंने इसे फिर से लांच किया। भारत में डॉक्टर्स की सबसे बड़ी संस्था इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने डॉ. हर्षवर्धन से सवाल पूछा था कि वह आख़िर किस तरह एक झूठे उत्पाद को देश के सामने प्रमोट कर सकते हैं। 

केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और नितिन गडकरी, दोनों उस प्रेस कॉन्फ्रेन्स में मौजूद थे, जिसमें रामदेव ने कोरोनिल को री-लांच किया था। पिछले साल कई जगहों पर रामदेव के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कराई गई थी। 

रामदेव और उनके सहयोगी बालकृष्ण ने कोरोनिल दवा से कोरोना वायरस के संक्रमण के इलाज का दावा किया था। उन्होंने कहा था कि कोरोनिल के साथ श्वासारी वटी भी लेनी ज़रूरी है। 

लेकिन सवाल यह है कि पतंजलि अपने कर्मचारियों को आख़िर यह दवा क्यों नहीं दे रहा है। एक ओर जब रामदेव ने एलोपैथिक दवाओं के ख़िलाफ़ अभियान छेड़ा हुआ है तो उनके कर्मचारी आख़िर क्यों एलोपैथिक दवाओं से इलाज करा रहे हैं बजाए इसके कि उन्हें कोरोनिल पर ज़्यादा भरोसा होना चाहिए था। 

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बयान पर बवाल 

रामदेव का एक वीडियो कुछ दिनों पहले वायरल हुआ जिसमें वह कह रहे हैं कि कोरोना के इलाज में एलोपैथिक दवाएं लेने के कारण लाखों लोगों की मौत हो चुकी है। उनके इस बयान पर डॉक्टर्स ने उन्हें ख़ूब खरी-खोटी सुनाई और सोशल मीडिया पर भी लोगों ने रामदेव को आड़े हाथों लिया है। 

बवाल बढ़ने के बाद केंद्रीय मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने रामदेव से इस बयान को वापस लेने को कहा। डॉक्टर हर्षवर्धन ने ख़ुद भी इस बयान को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया था। इसके बाद रामदेव को अपना बयान वापस लेना पड़ा था। 

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