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कौन था आईएस का सरगना बग़दादी, क्या था इस्लामिक स्टेट का प्लान? 

आख़िरकार कुख्यात आतंकवादी संगठन आईएसआईएस का सरगना अबु बकर-अल बग़दादी मारा गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को इसका एलान किया। अमेरिका ने बग़दादी पर 25 मिलियन डॉलर का इनाम घोषित किया हुआ था। 2014, 2015 में बग़दादी के मारे जाने की ख़बर सामने आई थी। 2016 में सीरिया के रक्का में हुए हवाई हमले में भी उसके मरने की ख़बर सामने आई थी। लेकिन पुष्टि नहीं हो सकी थी। 

कुछ महीने पहले आईएस की ओर से एक वीडियो जारी किया गया था जिसमें दिख रहे एक शख़्स के बग़दादी होने का दावा किया गया था। वीडियो में बग़दादी इस्लामिक स्टेट को हुए नुक़सान का बदला लेने की बात कहता दिखाई दिया था। इस वीडियो को इस्लामिक स्टेट के मीडिया नेटवर्क अल-फ़ुरक़ान ने जारी किया था। 

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लेकिन इस बार ख़ुद राष्ट्रपति ट्रंप सामने आये और उन्होंने कहा कि बग़दादी कुत्ते की मौत और डरपोक की तरह मारा गया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि आगे वह किसी भी बेकसूर को अपना निशाना नहीं बना सकेगा और उसके मारे जाने से दुनिया अब सुरक्षित है। 
निश्चित रूप से आईएस दुनिया का सबसे क्रूर आतंकवादी संगठन है जिसने न जाने कितने ही बेग़ुनाहों को मौत के घाट उतार दिया। इस ख़ूंखार आतंकवादी संगठन ने लाखों बच्चों, महिलाओं, पुरुषों को हलाक़ कर दिया और इसका एक ही मक़सद था इस्लामिक राज्य की स्थापना करना।

ख़ुद को घोषित किया ख़लीफ़ा 

बग़दादी मूल रूप से इराक़ का रहने वाला था और उसका असली नाम इब्राहिम अव्वाद इब्राहिम अल-बदरी है। बग़दादी के बारे में यह प्रचलित है कि वह पैग़म्बर मुहम्मद के परिवार से संबंध रखता था। वह इस्लामिक मामलों का बड़ा जानकार भी माना जाता था। जून, 2014 में मोसुल पर क़ब्ज़ा करने के बाद उसने ख़ुद को इस्लामिक स्टेट का ख़लीफ़ा घोषित कर दिया था और यह एलान कर दिया था कि जहाँ-जहाँ इस्लामिक स्टेट का कब्ज़ा है वहाँ-वहाँ शरीयत के हिसाब से शासन चलेगा। 

इस्लामिक स्टेट का यह मानना है कि जो राज शरीयत के हिसाब से न चले उसे हिंसा के ज़रिये उखाड़ फेंको और इस्लामिक राज्य की स्थापना करना उसका धार्मिक कर्तव्य है। इस्लामिक राज्य में सब कुछ इसलाम के अनुसार ही होना चाहिये फिर चाहे वह स्कूल हो या अस्पताल या बैंक या रेस्टोरेंट या फिर बिज़नेस। इस्लामिक स्टेट के मुताबिक़, उसके राज में काफ़िरों के लिये कोई जगह नहीं है।

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पहले मौलवी था बग़दादी 

बग़दादी इराक़ के समारा इलाक़े की एक मसजिद में मौलवी था। बग़दादी का सपना उज़्बेकिस्तान, कज़ाकिस्तान, इराक़, आधा ईरान, सीरिया, तुर्कमेनिस्तान, जॉर्डन, लेबनान, फिलिस्तीन, पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान पर कब्जा कर 'इस्लामिक स्टेट ऑफ़ ख़ुरासान' बनाने का था। बग़दादी के ‘खुरासान प्लान’ में हिंदुस्तान के भी कई इलाक़ों का नाम शामिल था। 

हिंदुस्तान पर भी थी पैनी नज़र 

'इस्लामिक स्टेट ऑफ़ ख़ुरासान' बनाने के बग़दादी के सपने को पूरा करने के लिए इस आतंकवादी संगठन ने हिंदुस्तान में भी पैर जमाने की कोशिश की थी। 2017 में जब मध्य प्रदेश के शाजापुर के पास एक पैसेंजर ट्रेन में आईएस के हिंदुस्तान मॉड्यूल ने पहला धमाका किया था तो सुरक्षा एजेंसियों ने देश में इस संगठन से जुड़े लोगों की धरपकड़ शुरू की थी और लखनऊ में इससे जुड़े आतंकवादी सैफ़ुल्लाह को मार गिराया था। सुरक्षा एजेंसियों ने मध्य प्रदेश और कानपुर से भी 7 लोगों को गिरफ़्तार किया था। 

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मसजिद में लहराये थे आईएस के झंडे

पिछले साल दिसंबर में उस वक्त़ देश भर में हंगामा मच गया था जब श्रीनगर की जामा मसजिद में कुछ युवकों के आईएस के झंडे लहराने की घटना सामने आई थी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। वायरल वीडियो में कुछ युवक आईएस के समर्थन में नारेबाज़ी करते और आईएस का झंडा भी लहराते दिखाई दिये थे। यह मसजिद श्रीनगर के नौहट्टा इलाक़े में है और इस इलाक़े को बेहद संवेदनशील माना जाता है। श्रीनगर में पहले भी कई बार आईएस के झंडे लहराने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

पढ़े-लिखे युवा भी चपेट में आये 

इस्लामिक स्टेट ने दुनिया भर के रैडिकल मुसलिम युवाओं को अपनी ओर आकर्षित किया। यहाँ तक कि यूरोप के अति-आधुनिक माहौल में पले-बढ़े मुसलिम युवा भी अपना घर-देश छोड़ कर इस्लाम के लिये लड़ने इराक़ पहुँच गए। जो मुसलिम युवा अपना घर छोड़कर गए उन्हें यह लगा कि वे इसलाम के रास्ते पर चल रहे हैं और जेहाद करने के लिये निकले हैं। 

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सीरिया में आतंकवादियों के ख़िलाफ़ चली लंबी लड़ाई में अमेरिका की नाटो सेना ने आतंकवादियों को हरा दिया था। कुछ साल पहले तक सीरिया और इराक़ के बड़े हिस्से पर आईएस का क़ब्जा था और यह संगठन तब काफ़ी मज़बूत हुआ करता था। लेकिन पहले इराक़ का मोसुल आईएस के हाथ से निकल गया था और 2017 में सीरिया के रक़्क़ा से भी इस संगठन को खदेड़ दिया गया था। 

हाल ही में श्रीलंका में चर्च और होटलों में हुए सीरियल धमाकों की ज़िम्मेदारी भी आईएस ने ली थी। इस आतंकवादी संगठन ने अपनी पत्रिका अमक़ में यह दावा किया था कि कोलंबो और श्रीलंका के दूसरे शहरों में चर्चों और होटलों पर धमाके उसके संगठन से जुड़े लोगों ने किए हैं।

श्रीलंका में हुए हमलों के बाद यह चिंता सामने आई थी कि क्या यह खूंखार आतंकवादी संगठन फिर से जिंदा हो गया है और इससे भारत भी सतर्क हो गया था क्योंकि श्रीलंका में हुए धमाकों के तार तमिलनाडु और केरल से जुड़ने की ख़बर भी आई थीं।
लेकिन अब जब ट्रंप ने ख़ुद सामने आकर कहा है कि आईएस का सरगना बग़दादी मारा जा चुका है तो निश्चित रूप से यह दुनिया के लिए सुकून की बात है। लेकिन आईएस की विचारधारा को भी पूरी तरह से कुचलने के लिए दुनिया भर के देशों को मिलकर काम करना होगा क्योंकि आईएस की विचारधारा से प्रेरित युवाओं ने फ़्रांस, यूरोप के कई शहरों और लंदन में लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। 
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क़मर वहीद नक़वी

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